लोदी काल की विरासत, दिल्ली में तैरते पत्थर के जहाज की अनोखी कहानी

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लोदी काल की विरासत, दिल्ली में तैरते पत्थर के जहाज की अनोखी कहानी

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यह महल लगभग 110-120 मीटर लंबा और करीब 15-18 मीटर चौड़ा है. दो मंजिला इस इमारत के दोनों सिरों पर अष्टकोणीय बुर्ज और ऊपर छोटी-छोटी गुंबदनुमा छतरियां बनी हैं, जो इसे जहाज़ जैसा रूप देती हैं. यह महल हौज़-ए-शम्सी और जहाज़ तालाब के बीच बनाया गया था.

दिल्ली: राजधानी दिल्ली में कई ऐसी ऐतिहासिक इमारतें बनी हुई हैं जो कई सदियों से लेकर अब तक पूरी दुनिया के लिए एक अलग तरह की मिसाल बनी हुई हैं. ऐसी ही एक इमारत दिल्ली के महरौली इलाके में भी है, जो कभी पानी के बीच तैरते जहाज़ जैसी दिखाई देती थी. इसे 15वीं सदी में लोदी काल के दौरान बनाया गया था जिससे लोग जहाज महल के नाम से तब से लेकर अब तक जानते हैं. इस इमारत के इतिहास के बारे में इतिहासकार क्या कुछ कहते हैं मैं आपको इसलिए मैं आगे वह भी बताते हैं.

पानी के बीच तैरता महल
इस इमारत के इतिहास के बारे में जब हमने स्वतंत्र पत्रकार और दिल्ली के इतिहास पर गहरी पकड़ रखने वाले रे खन्ना से बातचीत की, तो उन्होंने बताया की यह महल हौज-ए-शम्सी और जहाज तालाब के बीच स्थित है. जब दोनों जलाशय पानी से लबालब भरे होते थे, तब इस महल की परछाई पानी में पड़ती थी और ऐसा लगता था मानो कोई पत्थर का जहाज़ पानी पर तैर रहा हो. यही वजह है कि इसे जहाज़ महल नाम मिला. रे ने यह भी बताया की, यह इमारत सिर्फ शाही मेहमानों के ठहरने की जगह नहीं थी, बल्कि यह उस दौर की वास्तुकला और जल-प्रबंधन की समझ का भी प्रतीक थी.

इतना बड़ा है यह पत्थर का जहाज़ महल
वहीं कई और इतिहासकारों के अनुसार, यह महल लगभग 110-120 मीटर लंबा और करीब 15-18 मीटर चौड़ा है. दो मंजिला इस इमारत के दोनों सिरों पर अष्टकोणीय बुर्ज और ऊपर छोटी-छोटी गुंबदनुमा छतरियां बनी हैं, जो इसे जहाज़ जैसा रूप देती हैं. यह महल हौज़-ए-शम्सी और जहाज़ तालाब के बीच बनाया गया था. जब दोनों जलाशय पानी से भरे होते थे, तब इसकी लंबी संरचना पानी में तैरते जहाज़ का आभास कराती थी. आकार में सीमित होने के बावजूद, इसकी सीधी, लंबी संरचना और पानी के बीच की स्थिति ही इसे दिल्ली की सबसे अनोखी ऐतिहासिक इमारतों में शामिल करती है.

वक्त ने बदली तस्वीर
रे ने अंत में यह भी कहा कि समय के साथ जलाशयों का जलस्तर घटता गया और रिहायशी बनते इस इलाके ने शक्ल बदल दी. अब वह दृश्य कम ही देखने को मिलता है, जब महल की परछाई पानी में पड़े और तैरता जहाज़ दिखाई दे. हालांकि, बदलते दौर में भी जहाज़ महल अपनी शान के साथ खड़ा है. यह सिर्फ एक ऐतिहासिक इमारत नहीं, बल्कि उस दिल्ली की याद है जो कभी पानी में खुद को निहारती थी. आज भी महरौली के दिल में खड़ा यह पत्थर का जहाज़, बीते वक्त की खूबसूरती और सांस्कृतिक विरासत की कहानी कहता है.

About the Author

Amita kishor

न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें

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