1858 में चंदे के पैसे से खरीदी ‘हैट’ से हुआ ‘हैट्रिक’ शब्द का जन्म, अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में 184 बार गेंदबाज ले चुके है 3 गेंदों पर 3 विकेट
नई दिल्ली. क्रिकेट में जब कोई गेंदबाज लगातार तीन गेंदों पर तीन विकेट चटकाता है तो कमेंट्री बॉक्स से एक शब्द बिजली की तरह गूंजता है “हैट्रिक!” यह सिर्फ आंकड़ा नहीं, बल्कि उस पल का जादू है जब गेंदबाज खेल पर पूरी तरह हावी हो जाता है लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस शब्द की शुरुआत कैसे हुई? इसकी जड़ें 18वीं सदी के इंग्लैंड में छिपी हैं, जहां एक असाधारण प्रदर्शन ने क्रिकेट शब्दकोश को हमेशा के लिए बदल दिया.
हैट्रिक सिर्फ तकनीक का परिणाम नहीं होती, यह मानसिक मजबूती की भी परीक्षा है. दो गेंदों पर दो विकेट लेने के बाद तीसरी गेंद पर दबाव चरम पर होता है. बल्लेबाज सतर्क होता है, कप्तान रणनीति बदलता है और दर्शकों की सांसें थम जाती हैं. ऐसे में तीसरा विकेट लेना गेंदबाज की कला और संयम दोनों का प्रमाण होता है.
1858: जब “हैट” से शुरू हुई कहानी
साल 1858 में इंग्लैंड में खेले गए एक मुकाबले में गेंदबाज एच. स्टीफेंसन ने लगातार तीन गेंदों पर तीन विकेट लेकर सनसनी फैला दी. उस दौर में क्रिकेट आज जितना संगठित और व्यावसायिक नहीं था, लेकिन दर्शकों का जुनून कम भी नहीं था. स्टीफेंसन के इस अद्भुत प्रदर्शन से प्रभावित होकर उनके प्रशंसकों ने चंदा इकट्ठा किया और उन्हें एक खास टोपी एक “हैट”भेंट की. उस समय हैट सम्मान और प्रतिष्ठा का प्रतीक मानी जाती थी. यहीं से “हैट” शब्द इस उपलब्धि से जुड़ गया बाद में गेंदबाज की कला या कौशल यानी “ट्रिक” को जोड़ते हुए “हैट-ट्रिक” शब्द अस्तित्व में आया. यह सिर्फ तीन विकेट नहीं थे, बल्कि एक ऐसी उपलब्धि थी, जिसे विशेष सम्मान के साथ याद रखा गया.
1879: स्पॉफोर्थ और आधिकारिक पहचान
हालांकि 1858 की घटना ने शब्द की नींव रख दी थी, लेकिन “हैट्रिक” शब्द को आधिकारिक पहचान 1879 में मिली, जब ऑस्ट्रेलिया के तेज गेंदबाज Fred Spofforth ने मेलबर्न में लगातार तीन गेंदों पर तीन विकेट लिए. “द डेमन” के नाम से मशहूर स्पॉफोर्थ ने अपनी घातक गेंदबाजी से बल्लेबाजों को चौंका दिया. इसी दौर में पहली बार “हैट्रिक” शब्द को औपचारिक रूप से क्रिकेट साहित्य और रिपोर्ट्स में इस्तेमाल किया गया.
हैट्रिक: दुर्लभता का रोमांच
क्रिकेट के तीनों प्रारूपों में हैट्रिक एक दुर्लभ उपलब्धि मानी जाती है. अब तक तीनों फॉर्मेट में कुल 185 हैट्रिक हुई है. टेस्ट क्रिकेट में अब तक 50 से भी कम 49 हैट्रिक दर्ज हुई हैं. वनडे क्रिकेट में यह संख्या 52 है है, जबकि टी20 में आक्रामक खेल के कारण हैट्रिक की संभावनाएं बढ़ी हैं, और इस फॉर्मेट में कुल 84 हैट्रिक लगी है, फिर भी यह उपलब्धि आसान नहीं है. भारत की बात करें तो टेस्ट क्रिकेट में पहली हैट्रिक 2001 में हरभजन सिंह ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ कोलकाता में ली थी. वनडे में चेतन शर्मा ने 1987 विश्व कप में न्यूजीलैंड के खिलाफ हैट्रिक लेकर इतिहास रचा था. टी20 अंतरराष्ट्रीय में Deepak Chahar की बांग्लादेश के खिलाफ 2019 की हैट्रिक आज भी यादगार है.
क्रिकेट के इतिहास में कई बार “डबल हैट्रिक” (चार गेंदों पर चार विकेट) और “स्प्रेड हैट्रिक” (दो ओवरों में लगातार तीन गेंदों पर विकेट) भी देखने को मिली हैं, जो इस उपलब्धि की विविधता को दर्शाती हैं.
सबसे ज्यादा अंतरराष्ट्रीय हैट्रिक
श्रीलंका के दिग्गज तेज गेंदबाजलसिथ मलिंगा के नाम अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे ज्यादा हैट्रिक लेने का रिकॉर्ड है. मलिंगा ने कुल 5 हैट्रिक ली हैं जिसमें 3 वनडे और 2 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में आईं. उनकी यॉर्कर गेंदबाजी और डेथ ओवरों में सटीक लाइन-लेंथ ने उन्हें यह उपलब्धि दिलाई.
कई प्रारूपों में हैट्रिक लेने वाले गेंदबाज
क्रिकेट के अलग-अलग प्रारूपों में हैट्रिक लेना और भी मुश्किल माना जाता है, क्योंकि हर फॉर्मेट की अपनी अलग चुनौती होती है. फिर भी कुछ चुनिंदा गेंदबाज ऐसे हैं जिन्होंने एक से अधिक प्रारूपों में हैट्रिक लेकर अपनी बहुमुखी प्रतिभा साबित की है. वसीम अकरम और मोहम्मद शमी ने टेस्ट और वनडे दोनों प्रारूपों में हैट्रिक ली है. ब्रैटली,लसिथ मलिंगा, तिसारा परेरा, हसारंगा और कैगिसो रबाडा ने वनडे और टी20 अंतरराष्ट्रीय दोनों में हैट्रिक लेने का कारनामा किया है. यह उपलब्धि दर्शाती है कि ये गेंदबाज परिस्थितियों और प्रारूप के अनुसार खुद को ढालने में माहिर रहे हैं.
ऑस्ट्रेलिया के कप्तान पैट कमिंस टी20 विश्व कप के एक ही संस्करण में दो हैट्रिक लेने वाले इकलौते खिलाड़ी हैं. उन्होंने यह ऐतिहासिक उपलब्धि 2024 टी20 वर्ल्ड कप में हासिल की. इंग्लैंड के जिम्मी मैथ्यूज क्रिकेट इतिहास में एक ही टेस्ट मैच में दो हैट्रिक लेने वाले एकमात्र खिलाड़ी हैं. उन्होंने 1912 में यह अविश्वसनीय कारनामा किया था.