30 सालों से बेजुबानों की सेवा, पशु-पक्षियों को मानते हैं परिवार… गजब की है सहारपुर के राजेंद्र अटल की कहानी
सहारनपुर: कुदरत की सबसे खूबसूरत रचनाओं में पशु-पक्षी भी शामिल हैं, लेकिन जब इन्हें दर्द होता है तो अक्सर कोई उसे समझने वाला नहीं होता. ऐसे में सहारनपुर के 70 वर्षीय राजेंद्र अटल इन बेजुबान जीवों की आवाज बने हुए हैं. पशु-पक्षी प्रेमी के नाम से पहचाने जाने वाले राजेंद्र अटल पिछले 25-30 वर्षों से घायल, असहाय और कटान के लिए ले जाए जा रहे जानवरों को बचाकर उनका पालन-पोषण कर रहे हैं.
आज उनके पास गाय, खरगोश, देसी और पर्शियन बिल्ली, डॉग, विदेशी और देसी मुर्गे, कबूतरों की विभिन्न प्रजातियां और रंग-बिरंगी मछलियां मौजूद हैं. इन सभी को वे अपने परिवार का हिस्सा मानते हैं.
राजाजी नेशनल पार्क से मिली प्रेरणा
राजेंद्र अटल बताते हैं कि उन्हें इस कार्य की प्रेरणा सहारनपुर के पास स्थित राजाजी नेशनल पार्क में जंगली जानवरों को देखकर मिली. जब वे वहां घूमने जाते थे तो विभिन्न वन्य जीवों को देखकर उनके मन में संरक्षण का विचार आया.
उन्हें एहसास हुआ कि कई जानवर सिर्फ इसलिए अपनी जान गंवा देते हैं, क्योंकि उनके पास अपनी पीड़ा बताने का कोई माध्यम नहीं है. इंसान अपना दर्द शब्दों में बयां कर सकता है, लेकिन जानवर ऐसा नहीं कर पाते. यही सोच उनके जीवन का उद्देश्य बन गई.
कटान से बचाए गए जानवर
राजेंद्र अटल ने कई गायों को कटान के लिए ले जाए जाने से बचाया. इसके अलावा विदेशी मुर्गों को भी खरीदकर अपने संरक्षण में लिया, जो वध के लिए भेजे जा रहे थे. उन्होंने खरगोश, देसी और पर्शियन बिल्लियों को भी सहारा दिया.
उनके घर पर आज 20-25 साल पुराने पशु-पक्षी भी मौजूद हैं, जो उनकी देखरेख में स्वस्थ जीवन जी रहे हैं. वे बताते हैं कि इन जीवों को बचाकर जो संतोष और आत्मिक शांति मिलती है, वह किसी और कार्य से नहीं मिल सकती.
पहले पशु-पक्षियों को, फिर खुद को भोजन
राजेंद्र अटल और उनका परिवार एक विशेष नियम का पालन करता है. वे अपना भोजन करने से पहले अपने हाथों से सभी पशु-पक्षियों को खाना खिलाते हैं. उनका कहना है कि ऐसा करने से उन्हें सुकून और खुशी मिलती है.
उनके लिए ये जानवर सिर्फ पालतू जीव नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य हैं. हर दिन उनकी देखभाल, भोजन, साफ-सफाई और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जाता है.
समाज में मिल रहा सम्मान
राजेंद्र अटल के इस अनोखे कार्य को देखकर कई बड़े अधिकारी और जनप्रतिनिधि भी उनके यहां पहुंचते हैं. वे पशु-पक्षियों को देखते हैं, उन्हें दाना-पानी देते हैं और उनके प्रयासों की सराहना करते हैं.
राजेंद्र अटल का मानना है कि पर्यावरण संरक्षण का अर्थ केवल पेड़-पौधे लगाना नहीं है, बल्कि पशु-पक्षियों और सभी जीव-जंतुओं की रक्षा करना भी उतना ही जरूरी है.
उनकी यह पहल समाज के लिए एक प्रेरणा है, जो यह संदेश देती है कि अगर हर व्यक्ति थोड़ी सी संवेदनशीलता दिखाए, तो कई बेजुबान जिंदगियां बचाई जा सकती हैं.