chandra grahan 2026 begins shortly why temples are closed during lunar eclipse | अब से कुछ देर बाद चंद्र ग्रहण शुरू, मंदिरों के कपाट क्यों कर दिए जाते
Chandra Grahan 2026: अब से कुछ देर में चंद्र ग्रहण लगने वाला है और इस ग्रहण का सूतक काल शुरू हो चुका है. जब भी सूर्य या चंद्र ग्रहण आता है, मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं. इसी क्रम में रामलला, तिरुमाला समेत देशभर के कई मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए. ग्रहण के दौरान मंदिरों के कपाट बंद होना केवल रूढ़िवादी परंपरा नहीं बल्कि पुराणों और शास्त्रों में वर्णित शुद्धिकरण और सूतक काल से जुड़ी सावधानी के तौर पर किया जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण काल के समय नकारात्मक प्रभाव का संचार बढ़ जाता है और राहु-केतु की वजह से प्राण-प्रतिष्ठित मूर्तियों की दिव्यता, शुद्धता और ऊर्जा को सुरक्षित रखने के लिए मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं.
चंद्र ग्रहण के दौरान मंदिर क्यों होते हैं बंद
परंपरागत हिंदू मान्यता के अनुसार, चंद्र ग्रहण को ऐसा समय माना जाता है जब चंद्रमा, जो मन और भावनात्मक संतुलन का प्रतीक है, अस्थायी रूप से छाया में आ जाता है. आज ग्रहण काल का पहला चरण दोपहर में शुरू हो जाएगा, जिसमें मुख्य छाया का चरण 03 बजकर 21 मिनट पर शुरू होगा, पूर्ण ग्रहण 04:35 बजे से 05:33 बजे तक रहने वाला है और ग्रहण का समापन पूरी तरह 07:52 बजे होगा.
ग्रहण के समय राहु-केतु का प्रभाव
ग्रहण के समय राहु-केतु का प्रभाव बढ़ जाता है. पौराणिक कथाओं के मुताबिक, राहु-केतु द्वारा सूर्य या चंद्र को ग्रसित करना ब्रह्मांडीय संकट माना गया है. इस दौरान तमोगुण का प्रभाव बढ़ जाता है. मंदिरों में प्रतिष्ठित मूर्तियां केवल पत्थर की नहीं होती, इन मूर्तियों में दिव्य ऊर्जा समाहित होती है. ग्रहण के अशुभ प्रभाव से मूर्ति की दिव्य ऊर्जा प्रभावित ना हो इसलिए आध्यात्मिक तौर पर सुरक्षा कवच के तहत मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं. ग्रहण समापन के बाद मंदिर का शुद्धिकरण किया जाता है, इसके बाद ही कपाट खोल दिए जाते हैं.
सूतक काल में ही मंदिर के कपाट बंद
मंदिरों के कपाट ग्रहण काल में नहीं बल्कि सूतक काल में ही हो जाते हैं. सूतक काल में मंदिरों में हर दिन की जाने वाली पूजा जैसे आरती, भोग और सार्वजनिक दर्शन रोक दिए जाते हैं. इसका मतलब यह नहीं है कि भगवान निष्क्रिय हो जाते हैं, बल्कि यह समय शारीरिक पूजा नहीं बल्कि मानसिक जप के लिए फायदेमंद माना जाता है. परंपरा के अनुसार ग्रहण के दौरान व्यक्तिगत प्रार्थना, मंत्र जाप और शांत ध्यान करने की सलाह दी जाती है. ग्रहण का समय अक्सर बाहरी नहीं, बल्कि अंदरूनी ध्यान का समय माना जाता है.
मंदिर कब खुलते हैं?
मंदिर पूर्ण ग्रहण के समाप्त होते ही तुरंत नहीं खुलते. वे तब तक इंतजार करते हैं जब तक ग्रहण पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाता. आज 07 बजकर 52 मिनट पर चंद्र ग्रहण का अंतिम चरण खत्म होगा. इसके बाद ही मंदिर खोलने की प्रक्रिया शुरू होती है और तब भी तुरंत सार्वजनिक प्रवेश के लिए नहीं खुलता.
मंदिर के कपाट फिर से खुलने से पहले क्या होता है?
ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिरों में शुद्धिकरण की प्रक्रिया होती है. परिसर को गंगाजल से धोया जाता है. भगवान का अभिषेक किया जाता है. भगवान को नए वस्त्र और सजावट दी जाती है. नया भोग तैयार कर अर्पित किया जाता है. शुद्धि मंत्रों का जाप कर पूजा की लय फिर से शुरू की जाती है. इन सभी चरणों के बाद मंदिर दर्शन के लिए फिर से खोल दिया जाता है. कई घरों में लोग इसका सरल रूप अपनाते हैं, ग्रहण के बाद स्नान करते हैं, पूजा स्थान की सफाई करते हैं और छाया हटने के बाद ताजे फूल या जल अर्पित करते हैं.
यह समय चिंतन के लिए शुभ
ग्रहण के दौरान मंदिर बंद करना डर या पीछे हटने के लिए नहीं है, यह समय की गहराई को समझने की परंपरा है. कुछ घंटे मानसिक जप के लिए होते हैं, कुछ घंटे मौन के लिए. आज 04 बजकर 35 मिनट से 05 बजकर 33 मिनट के बीच, परंपरागत रूप से आत्मचिंतन का समय माना गया है. जब चंद्र ग्रहण की छाया 07 बजकर 52 मिनट पर पूरी तरह से हटेगी, मंदिर के कपाट फिर से खुलना शुरू हो जाएंगे. फिर भी ग्रहण काल में मंदिर के कपाट ही बंद होते हैं, बाकी मंदिर से जुड़े सभी कार्यक्रम किए जाते हैं.