अब न बिजली घर के चक्कर काटने की टेंशन, न बिल जमा करने की आफत, गांव की महिलाएं सुलझा रही हैं समस्या, घर बैठे भरवा रही हैं बिल
Ghaziabad News: गाजियाबाद के ग्रामीण इलाकों में अब बिजली के बिल जमा करने के लिए न तो लंबी लाइनों में लगने की जरूरत है और न ही तपती धूप में बिजली घर के चक्कर काटने की. यह मुमकिन हुआ है उन 87 जांबाज महिलाओं की वजह से, जिन्होंने ‘विद्युत सखी’ के रूप में नई पहचान बनाई है. राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के तहत प्रशिक्षित ये महिलाएं न सिर्फ आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि गांव-गांव जाकर बिजली से जुड़ी उन समस्याओं को भी सुलझा रही हैं, जिनसे लोग सालों से परेशान थे.
87 महिलाओं ने संभाली कमान, घर-घर दे रही हैं सुविधा
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से गाजियाबाद जिले की 87 ग्रामीण महिलाओं को विशेष रूप से ‘विद्युत सखी’ के रूप में तैयार (प्रशिक्षित) किया गया है. इन महिलाओं को बिजली विभाग के तकनीकी और प्रशासनिक कामों की बारीकी से ट्रेनिंग दी गई है. अब ये महिलाएं केवल घरेलू काम-काज तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बिजली बिल निकालने से लेकर उसे जमा करने तक की पूरी प्रक्रिया को संभाल रही हैं.
सबसे बड़ी राहत यह है कि ग्रामीण इलाकों के उपभोक्ता अब अपने घर के दरवाजे पर ही बिजली बिल का भुगतान कर सकते हैं. डीडीओ प्रज्ञा श्रीवास्तव के अनुसार, इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाना है. प्रशिक्षण के बाद ये महिलाएं अब न केवल स्वरोजगार प्राप्त कर रही हैं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली से जुड़ी जटिल समस्याओं के समाधान में भी अपनी अहम भूमिका निभा रही हैं.
क्या-क्या काम कर रही हैं विद्युत सखियां?
इन महिलाओं को केवल बिल जमा करने तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि उन्हें तकनीकी और प्रशासनिक कार्यों की भी ट्रेनिंग दी गई है. उनके प्रमुख कार्यों में शामिल हैं:
- ऑनलाइन और ऑफलाइन बिजली बिल निकालना और उपभोक्ताओं को उपलब्ध कराना.
- नए बिजली कनेक्शन की प्रक्रिया को समझाना और उसमें मदद करना.
- पुराने बिलों में नाम संशोधन कराना.
- लोड बढ़ाने या घटाने जैसे तकनीकी कार्यों में सहयोग.
- घर-घर जाकर उपभोक्ताओं से बिल की राशि एकत्रित करना.
कमीशन के जरिए सुनिश्चित हो रही आय
यह मॉडल महिलाओं के लिए कमाई का एक बेहतरीन जरिया बन गया है. इन महिलाओं को बिजली बिल की जमा राशि पर एक प्रतिशत (1%) कमीशन मिलता है. इससे न केवल उनकी एक निश्चित मासिक आय सुनिश्चित हो रही है, बल्कि वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुधारने में भी योगदान दे रही हैं. एक तरफ जहां महिलाएं ‘स्वावलंबी’ बन रही हैं, वहीं दूसरी तरफ उपभोक्ताओं को अब बिजली घर या शहरों के चक्कर नहीं काटने पड़ते.
उपभोक्ताओं को मिली बड़ी राहत, समय और पैसे की बचत
पहले ग्रामीणों को छोटा सा बिजली बिल जमा करने के लिए भी शहर जाना पड़ता था, जिसमें उनका पूरा दिन और किराया दोनों खर्च होते थे. अब ‘विद्युत सखी’ घर आकर बिल थमाती हैं और पैसे भी वहीं जमा कर लेती हैं. इससे ग्रामीणों के समय और पैसे दोनों की बचत हो रही है. ग्रामीण क्षेत्रों में यह सुविधा किसी वरदान से कम नहीं साबित हो रही है.
ट्रांस हिंडन में बिजली कटौती से मचा हाहाकार
एक तरफ जहां ग्रामीण क्षेत्रों में सुधार हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ शहरी इलाकों में बिजली की ट्रिपिंग ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है. सोमवार को वैशाली, वसुंधरा और इंदिरापुरम जैसे इलाकों में रुक-रुक कर हुई बिजली कटौती से लोग परेशान रहे. दिनभर में करीब 2 से 3 घंटे बिजली गुल रही, जिससे ऑफिस जाने वाले लोगों और घर के कामकाज पर बुरा असर पड़ा.
निवासियों का आरोप है कि मरम्मत के नाम पर बिना किसी पूर्व सूचना के बिजली काट दी जाती है. वैशाली के निवासी अमन गोयल और अन्य स्टूडेंट्स ने बताया कि बिना सूचना कटौती से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में बाधा आती है. हालांकि, बिजली विभाग के चीफ इंजीनियर पवन अग्रवाल का कहना है कि किसी तकनीकी फॉल्ट के कारण शटडाउन लेना पड़ा था.