ठूंस-ठूंस कर भरते हैं मावा, इस गुझिया के बिना विंध्य में होली नहीं, पहली बाइट में बोलेंगे वाह! जानें रेसिपी

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Vindhya Gujhiya Recipe: विंध्य में होली की रौनक गुझिया के बिना अधूरी है. मावे, नारियल और सूखे मेवों से भरी सुनहरी, कुरकुरी गुझिया यहां की पारंपरिक मिठाई है, जो हर मेहमान का दिल जीत लेती है. जानकारों के अनुसार सही विधि और एयरटाइट डिब्बे में भंडारण से इसका स्वाद कई दिनों तक बरकरार रहता है. जानें बनाने का तरीका…

होली की खास गुझिया: मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि परंपरा का जीवंत उत्सव है. होली में जहां एक ओर फगुआ गीतों की गूंज सुनाई देती है, वहीं दूसरी ओर घर-घर में बनती गुजिया की खुशबू माहौल को और खास बना देती है. इस साल 4 मार्च को मनाई जाने वाली होली को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं. होली के दिन अगर घर में गुजिया न बने तो त्योहार अधूरा रह जाता है. होली से कुछ दिन पहले ही इसे बनाकर सुरक्षित रख लेते हैं, ताकि मेहमानों का स्वागत तुरंत किया जा सके.

कई दिनों तक ताजा रहेगी गुझिया
सीधी की रसोइया प्रियंका सिंह बताती हैं कि विंध्य क्षेत्र में गुझिया बनाने की परंपरा काफी पुरानी है. इसे पारंपरिक तरीके से तैयार किया जाता है, जिससे इसका स्वाद लंबे समय तक बरकरार रहता है. सही तरीके से एयरटाइट डिब्बे में रखने पर गुझिया कई दिनों तक ताज़ा बनी रहती है. मावा, नारियल और सूखे मेवों से तैयार इसकी भरावन न सिर्फ स्वाद बढ़ाती है, बल्कि ऊर्जा भी देती है.

ऐसे बनाएं गुझिया
गुझिया बनाने के लिए मैदा में देसी घी और नमक मिलाकर सख्त आटा गूंथा जाता है. अलग से सूजी या आटे को धीमी आंच पर भूनकर उसमें मावा, काजू, बादाम, घिसा नारियल और शक्कर मिलाई जाती है. छोटी-छोटी लोइयां बेलकर उनमें यह मिश्रण भरा जाता है और सांचे या हाथ से आकार देकर किनारों को अच्छी तरह बंद किया जाता है. फिर इन्हें गरम तेल में सुनहरा होने तक तला जाता है. ठंडा होने के बाद जब ये कुरकुरी गुझिया प्लेट में सजती हैं तो हर किसी का मन ललचा उठता है.

इसी गुझिया से फगुआ से स्वागत
विंध्य में होली का जश्न फगुआ गीतों के बिना अधूरा माना जाता है. संतोष मिश्रा बताते हैं कि यहां मान्यता है कि जब तक फगुआ नहीं गाया जाता, तब तक होली का उत्सव पूरा नहीं होता. होली के दिन गांव के वरिष्ठ लोग टोली बनाकर एक-दूसरे के घर जाते हैं, ढोलक-मंजीरे की थाप पर फगुआ गाते हैं और फिर घरवालों द्वारा गुझिया खिलाकर उनका स्वागत किया जाता है. इसके बाद रंग-गुलाल लगाया जाता है और पान-सुपारी व इलायची खिलाने की परंपरा निभाई जाती है, जिसे यहां व्यवहार कहा जाता है.

विंध्य क्षेत्र में होली आपसी प्रेम, भाईचारे और लोक संस्कृति का प्रतीक है. यहां की परंपराएं आज भी पूरी शिद्दत से निभाई जाती हैं. फगुआ के सुर, गुझिया की मिठास और रंगों की छटा मिलकर ऐसा समां बांधते हैं, जो हर किसी के दिल में बस जाता है. यही कारण है कि विंध्य की होली सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक विरासत का उत्सव है.

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Rishi mishra

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें

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