जानिए आयुर्वेद का शक्तिशाली स्वास्थ्य टॉनिक सप्तपर्णी के फायदे

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त्वचा, पाचन और महिलाओं के लिए भी फायदेमंद, जाने सप्तपर्णी के चमत्कारिक फायदे

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सप्तपर्णी, जिसे इंडियन सिंकोना भी कहा जाता है, आयुर्वेद में स्वास्थ्य का खजाना माना जाता है. इसकी छाल और पत्तियां बुखार, मलेरिया, पेट संबंधी समस्याओं और त्वचा संक्रमण में लाभकारी हैं. यह प्राकृतिक रूप से इम्यूनिटी बढ़ाता, हृदय और पाचन स्वास्थ्य सुधारता है, और महिलाओं की प्रसवोत्तर रिकवरी में मदद करता है. विशेषज्ञ की सलाह से इसका उपयोग कई पारंपरिक और आधुनिक स्वास्थ्य समस्याओं में फायदेमंद साबित हो सकता है.

सप्तपर्णी का पेड़, जिसको इंडियन सिंकोना के नाम से भी जाना जाता है. इसकी छाल में ऐसे गुण पाए जाते हैं, जो मलेरिया और पुराने बुखार में लाभकारी होते हैं. इसका पारंपरिक चिकित्सा में भी काढ़ा शरीर का ताप कम करने और कमजोरी दूर करने के लिए उपयोगी होता आ रहा है. यह प्राकृतिक रूप से शरीर की इम्युनिटी पॉवर बढ़ाती हैं.

सप्तपर्णी की छाल और पत्तियां त्वचा संक्रमण, अल्सर और सोरायसिस जैसी समस्याओं में उपयोगी मानी जाती हैं. इसका लेप घाव भरने में सहायक बताया जाता है, इसमें एंटी माइक्रोबियल और एंटी बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं, जो अपने त्वचा को शुद्ध करने में मदद करते हैं. इसका सही परामर्श के साथ प्रयोग करने पर त्वचा संबंधी कई परेशानियां दूर होती हैं.

सप्तपर्णी के छाल का अर्क दस्त, पेचिश और पेट दर्द जैसी समस्याओं में पारंपरिक रूप से उपयोगी होता आ रहा है. यह भूख बढ़ाने और पाचन शक्ति सुधारने में बहुत सहायक होता है. ग्रामीण इलाकों में आज भी इसका प्रयोग घरेलू उपचार के रूप में किया जाता है. हालांकि, मात्रा के लिए विशेषज्ञ की सलाह जरूर लेनी चाहिए.

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राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय नगर बलिया की पांच साल अनुभवी आयुर्वेदाचार्य डॉ. वंदना तिवारी के अनुसार, सप्तपर्णी का उल्लेख अस्थमा और ब्रोंकाइटिस जैसी श्वसन समस्याओं में भी मिलता है. इसके तत्व श्वसन तंत्र को मजबूती देने और सूजन कम करने में मददगार हैं. आयुर्वेद में इसे कफ दोष नाशक वृक्ष बताया गया है.

यह प्रसव के बाद महिलाओं को शारीरिक कमजोरी से उबरने में सहायक है. यह शरीर को ताकत देने के साथ ही स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए लाभकारी हो सकता है. ग्रामीण चिकित्सा में भी इसे रिकवरी टॉनिक की तरह इस्तेमाल किया जाता रहा है, परंतु आयुर्वेद चिकित्सक से परामर्श लेकर ही इसका उपयोग करना उचित होता हैं.

सप्तपर्णी को खून को शुद्ध करना, हृदय स्वास्थ्य सहायक और गठिया में भी बहुत उपयोगी माना गया है. इसके अर्क कैंसर में भी कुछ स्थितियों में उपयोगी हो सकती हैं. इसका सांप काटने पर भी प्रयोग किया जाता था. हाई ब्लड प्रेशर नियंत्रित करने की क्षमता को लेकर भी बहुत लाभकारी है.

हमेश इस बात का ध्यान रखें कि, जहां फायदे हैं, वहीं सावधानी भी जरूरी है. लंबे समय से बीमार या उपचाराधीन व्यक्ति बिना परामर्श इसका सेवन न करें. इसके पराग से कुछ लोगों को एलर्जी हो सकती है. इसके सही मात्रा को उम्र और रोग के अनुसार आयुर्वेद चिकित्सक ही तय कर सकता है.

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