खामेनेई के मरने पर भारत के कई शहरों में शोक, गृह मंत्रालय का सुपर अलर्ट, कश्मीर में इंटरनेट और स्कूल बंद

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खामेनेई के मरने पर भारत के कई शहरों में शोक, गृह मंत्रालय ने जारी किया अलर्ट

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ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खमेनेई की अमेरिका-इजरायल के हमले में मौत क्या हुई, हिंदुस्तान के कुछ हिस्सों में लोगों का दर्द छलक पड़ा है! विदेशी मसले पर देश की सड़कों पर मच रहे इस बेवजह के बवाल को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) एक्शन में आ गया है. मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सख्त अलर्ट जारी करते हुए कानून-व्यवस्था चाक-चौबंद रखने के निर्देश दिए हैं. हालात बिगड़ने के डर से जम्मू-कश्मीर के कई इलाकों में मोबाइल इंटरनेट ठप कर दिया गया है और स्कूलों में ताले जड़ दिए गए हैं.

खामेनेई के मरने पर भारत के कई शहरों में शोक, गृह मंत्रालय ने जारी किया अलर्टZoom

खामेनेई के मौत के बाद भारतीय गृहमंत्रालय ने जारी की चेतावनी. (पीटीआई)

ईरान में सुप्रीम लिडर खामेनेई की मौत से पूरी दुनिया के मुस्लिम कम्यूनिटी में शोक की लहर है. भारत में भी शोक मनाया जा रहा है. उत्तर प्रदेश, दिल्ली से लेकर जम्मू-कश्मीर में शोक मनाया जा रहा है. लोग सड़कों पर निकलकर रो-रोकर अपने नेता को विदाई दे रहे है. अयातुल्ला खमेनेई के पक्ष में और अमेरिका-इजरायल के विरोध में सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किए जा रहे हैं. गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पत्र लिखकर ईरान के समर्थन या विरोध में संभावित प्रदर्शनों को लेकर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं.

गृह मंत्रालय ने देश भर के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों (DGP) को एक सख्त पत्र लिखा है. इस पत्र में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि मध्य पूर्व एशिया में चल रहे युद्ध और खामेनेई की मौत का बहाना बनाकर देश के अंदर कोई भी माहौल खराब करने की कोशिश कर सकता है. मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए.

गृह मंत्रालय के निर्देशों की मुख्य बातें

  1. कड़ी निगरानी: ईरान के पक्ष या विपक्ष में होने वाले किसी भी तरह के विरोध प्रदर्शन पर स्थानीय प्रशासन और पुलिस की पैनी नजर होनी चाहिए.
  2. कानून-व्यवस्था सर्वोच्च: पुलिस को स्पष्ट निर्देश है कि किसी भी हाल में कानून-व्यवस्था नहीं बिगड़नी चाहिए. यह प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है.
  3. खुफिया तंत्र सक्रिय: प्रदर्शनों की आड़ में असामाजिक तत्व या संगठित गिरोह कोई बड़ी साजिश रच सकते हैं. इसे नाकाम करने के लिए लोकल इंटेलिजेंस (LIU) को पूरी तरह से अलर्ट पर रखा जाए.
  4. सोशल मीडिया पर पहरा: भड़काऊ भाषण, आपत्तिजनक पोस्ट या अफवाह फैलाकर दंगा भड़काने वालों को तुरंत पकड़ा जाए. डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की 24 घंटे निगरानी की जाए.

उपद्रवियों से सख्ती से निपटेगी सरकार

केंद्र सरकार ने राज्य पुलिस को खुली छूट देते हुए दोहराया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के नाम पर अगर किसी ने भी अवैध गतिविधि, हिंसा या सरकारी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की जुर्रत की, तो उससे बेहद सख्ती से निपटा जाएगा. केंद्र और राज्यों के बीच लगातार समन्वय स्थापित किया जा रहा है ताकि किसी भी आपात स्थिति को तुरंत कंट्रोल किया जा सके.

घाटी में बिगड़े हालात, इंटरनेट-स्कूल सब बंद

इस अंतरराष्ट्रीय विवाद का सबसे ज्यादा असर जम्मू-कश्मीर में देखने को मिल रहा है. घाटी के कई इलाकों से इजरायल और अमेरिका के खिलाफ भारी विरोध प्रदर्शनों की खबरें सामने आ रही हैं. लोगों की इस ‘अंतरराष्ट्रीय हमदर्दी’ को देखते हुए और एहतियात के तौर पर प्रशासन ने श्रीनगर सहित कई संवेदनशील इलाकों में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं पर पूरी तरह से रोक लगा दी है. बच्चों की सुरक्षा और किसी भी अनहोनी से बचने के लिए स्कूलों को भी फिलहाल के लिए बंद कर दिया गया है.

About the Author

Deep Raj Deepak

दीप राज दीपक 2022 में न्यूज़18 से जुड़े. वर्तमान में होम पेज पर कार्यरत. राजनीति और समसामयिक मामलों, सामाजिक, विज्ञान, शोध और वायरल खबरों में रुचि. क्रिकेट और मनोरंजन जगत की खबरों में भी दिलचस्पी. बनारस हिंदू व…और पढ़ें

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