पहाड़ों की मैगी ही नहीं ‘छछिया’ भी जीत लेगी आपका दिल! 1 बर्तन, कम मसाले और भरपूर स्वाद के साथ 20 मिनट में होगी तैयार

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Chhachiya Recipe: कभी-कभी ऐसा लगता है कि किचन में घंटों खड़े रहने की ताकत ही नहीं बची. भूख लगी है, लेकिन मन इंस्टेंट नूडल्स या पैकेट वाले खाने से भर गया है. ऐसे में अगर कोई घरेलू, हल्का और झटपट बनने वाला खाना मिल जाए, तो दिन बन जाता है. पहाड़ी इलाकों में ऐसी ही एक देसी डिश सालों से बनती आ रही है-छाछ और चावल से तैयार ‘छछिया’. यह कोई फैंसी रेसिपी नहीं, बल्कि घर-घर की यादों से जुड़ा खाना है, जो कम मसालों में भी पेट और दिल दोनों को सुकून देता है. खास बात यह है कि इसमें कढ़ी, चावल और हल्का तड़का-तीनों का स्वाद एक साथ मिल जाता है. आज के फास्ट लाइफस्टाइल में यह डिश फिर से लोगों का ध्यान खींच रही है, क्योंकि इसमें मेहनत कम और संतुष्टि ज्यादा है.

पहाड़ों से निकली, घरों तक पहुंची छछिया
छछिया असल में छाछ से बनी गाढ़ी चावल आधारित डिश है, जिसे कई पहाड़ी परिवार रोजमर्रा के खाने में शामिल करते हैं. गांवों में यह अक्सर दोपहर या शाम के हल्के भोजन के तौर पर बनती है. खास बात यह कि इसे बनाने के लिए बहुत ज्यादा सामग्री नहीं चाहिए-चावल, छाछ, थोड़ा मसाला और तड़का. इस डिश का नाम भी उसी से आया है-छाछ से बनी, यानी छछिया. कई घरों में इसे बिना तड़के सफेद रूप में भी बनाया जाता है, तो कहीं हल्के मसालों के साथ.

क्यों खास है यह देसी शॉर्टकट मील
आज जब लोग “वन-पॉट मील” या “कंफर्ट फूड” की बात करते हैं, तो छछिया उसी श्रेणी में फिट बैठती है. इसमें अलग से दाल, चावल या कढ़ी बनाने की जरूरत नहीं पड़ती.

एक ही बर्तन में पूरा खाना
छछिया में चावल पकते-पकते छाछ के साथ गाढ़े हो जाते हैं, जिससे कढ़ी जैसा टेक्सचर बनता है. इसमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और हल्का फैट-तीनों मिल जाते हैं. इसलिए इसे अपने आप में पूरा भोजन माना जाता है.

कम मसाला, हल्का स्वाद
पहाड़ी खाने की पहचान है-कम मसाले और असली सामग्री का स्वाद. छछिया में भी हल्दी, लाल मिर्च, जीरा और लहसुन-धनिया का हल्का तड़का ही डाला जाता है. इससे पेट पर भारीपन नहीं आता.

छछिया बनाने का घरेलू तरीका
इस डिश की खूबसूरती इसकी सादगी में है. घरों में इसे लगभग एक ही तरीके से बनाया जाता है, बस मसालों में हल्का फर्क हो सकता है.

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चावल का सही चुनाव
छछिया के लिए ज्यादा स्टार्च वाले चावल-जैसे मोटे या मोगरा प्रकार-उपयुक्त माने जाते हैं. इससे पकने पर डिश स्वाभाविक रूप से गाढ़ी होती है. बासमती जैसे लंबे चावल कम उपयोग किए जाते हैं, क्योंकि उनमें स्टार्च कम होता है.

तड़का और बेस
सरसों तेल में सूखी लाल मिर्च, जीरा और प्याज का हल्का तड़का लगाया जाता है. फिर हल्दी और लाल मिर्च मिलाकर थोड़ा पानी डाला जाता है ताकि मसाले जलें नहीं. इसके बाद भीगे चावल डालकर कुछ मिनट भूनना जरूरी माना जाता है-यही स्टेप स्वाद बढ़ाता है.

छाछ डालते समय सावधानी
जब चावल मसाले के साथ भुन जाएं, तब पतली छाछ डाली जाती है. इसे डालते ही लगातार चलाना जरूरी है, ताकि फटने का खतरा न रहे. चावल का स्टार्च भी छाछ को स्थिर रखने में मदद करता है.
धीरे-धीरे उबाल आने पर थोड़ा पानी और मिलाकर चावल पूरी तरह पकाए जाते हैं. करीब 15 मिनट में मिश्रण गाढ़ा होकर तैयार हो जाता है.

यादों से जुड़ा स्वाद
छछिया सिर्फ खाना नहीं, कई लोगों के लिए बचपन की याद है. पहाड़ी परिवारों में अक्सर दादी-नानी के हाथ की छछिया खास मानी जाती है. एक घरेलू किस्सा अक्सर सुनने को मिलता है-जब भी नानी घर आती थीं, बच्चे पहले ही कह देते थे कि उन्हें वही छाछ-चावल वाला खाना चाहिए. शायद यही वजह है कि आज भी इस डिश का जिक्र होते ही लोगों को घर का स्वाद याद आ जाता है.

आधुनिक लाइफस्टाइल में क्यों लौट रही है यह डिश
आज के शहरी जीवन में लोग जल्दी बनने वाले, लेकिन घर जैसे स्वाद वाले भोजन खोज रहे हैं. छछिया इस जरूरत पर बिल्कुल फिट बैठती है.

कामकाजी लोगों के लिए आसान
20 मिनट में तैयार होने वाली यह डिश ऑफिस से लौटने के बाद भी आसानी से बन सकती है. इसमें ज्यादा कटिंग या तैयारी नहीं लगती.

हेल्दी और हल्की
छाछ आधारित होने के कारण यह पाचन में आसान मानी जाती है. कम तेल और मसालों के कारण रात के खाने में भी इसे आराम से खाया जा सकता है.

इंस्टेंट फूड का देसी विकल्प
जहां लोग तुरंत बनने के लिए मैगी या पास्ता चुनते हैं, वहीं छछिया घरेलू और पौष्टिक विकल्प देती है.

खाने का सही तरीका
छछिया का स्वाद तभी पूरा आता है जब इसे गरमा-गरम खाया जाए. ठंडा होने पर यह और गाढ़ी हो जाती है. ऊपर से हरी मिर्च या धनिया डालकर सीधे कटोरे में परोसा जाता है. कई घरों में इसके साथ कुछ भी नहीं परोसा जाता, क्योंकि इसे अपने आप में पूरा भोजन माना जाता है.

छछिया दिखने में साधारण, लेकिन स्वाद और संतोष में भरपूर डिश है. यह याद दिलाती है कि जल्दी बनने वाला खाना हमेशा पैकेट से ही नहीं आता-हमारी परंपराओं में भी ऐसे कई शॉर्टकट छिपे हैं. आज जब लोग सरल, सुकून देने वाले भोजन की ओर लौट रहे हैं, तो छछिया जैसी देसी रेसिपी फिर से किचन में जगह बना रही है.

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