क्या जानते हैं कौन थी भारतीय फिल्मों की पहली आइटम डांसर? हेलन के बारे में सोच रहे हैं तो गलत हैं आप!

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भारतीय सिनेमा के सौ सालों से ज्यादा के सफर में ‘आइटम सॉन्ग्स’ (Item Songs) एक ऐसी विधा बन चुके हैं, जिनके बिना बड़ी फिल्में अधूरी मानी जाती हैं. आज के दौर में चाहे फिल्म की कहानी कैसी भी हो, लेकिन एक धमाकेदार गाना और उस पर थिरकती एक मशहूर अभिनेत्री फिल्म की कामयाबी की गारंटी बन जाती है. तमन्ना भाटिया से लेकर मौनी रॉय तक ने अपने डांस के दम पर करोड़ों दिलों को जीता है, वहीं नोरा फतेही जैसी डांसर ने तो इस कला को एक नए मुकाम पर पहुंचा दिया है. लेकिन अक्सर जब भी पहली आइटम डांसर की बात आती है, तो लोगों के दिमाग में सबसे पहले ‘कैबरे क्वीन’ हेलेन का नाम आता है. हालांकि, फिल्मी इतिहास के पन्ने कुछ और ही कहानी बयां करते हैं. हेलन से भी दशकों पहले भारतीय पर्दे पर आइटम डांस की शुरुआत हो चुकी थी.

आइटम सॉन्ग्स की इस परंपरा की नींव साल 1936 में पड़ी थी. भारतीय फिल्मों की पहली आइटम गर्ल होने का गौरव ‘अजूरी’ (Madam Ajurie) को जाता है. साल 1936 में रिलीज हुई बंगाली फिल्म ‘सोनार संसार’ (Sonar Sansar) में अजूरी ने एक ऐसा डांस परफॉर्म किया था, जिसे उस समय के हिसाब से काफी बोल्ड और अलग माना गया. इस फिल्म को देबकी कुमार बोस ने डायरेक्ट किया था, जबकि धीरज भट्टाचार्या के साथ छाया देवी मुख्य भूमिका में थीं. वहीं, अजूरी फिल्म में नर्तकी के किरदार में दिखी थीं. वो एक बेहतरीन डांसर थीं और अपनी अदाओं से उस दौर के दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया था. अजूरी का डांस पारंपरिक शास्त्रीय नृत्य से हटकर था, जो केवल दर्शकों के मनोरंजन के उद्देश्य से फिल्म में डाला गया था. यही वह पल था जब फिल्म मेकर्स को समझ आया कि कहानी के बीच में एक छोटा सा डांस ब्रेक फिल्म की लोकप्रियता को कई गुना बढ़ा सकता है.

तब डांस करना माना जाता था खराब
मैडम अजूरी ने जब फिल्मों में काम शुरू किया, तब डांस करना और छोटे कपड़े पहनना बेहद खराब माना जाता था. आमतौर पर फिल्मों में काम करना ही लोगों की नजर में गलत था. बात अजूरी के पर्सनल लाइफ की करें तो उनका जन्म बेंगलुरु में हुआ था. ऐसा दावा किया जाता है कि अजूरी के पिता जर्मन डॉक्टर थे, तो मां हिंदू ब्राह्मण. बचपन में ही मां-बाप का तलाक हो गया और उन्होंने अपने पिता के साथ रहते हुए डांस और पियानो की ट्रेनिंग ली. इसके बाद मुंबई में फिल्मों में काम करने आ गईं. साल 1934 में रिलीज हुई नादिरा उनकी पहली फिल्म थी. साल 1935 और 1936 में उन्होंने ढेर सारी फिल्में कीं. इसी दौरान उन्होंने ‘सोनार संसार’ में आइटम डांस किया और भारत की पहली आइटम डांसर बनीं. इसके बाद वो पाकिस्तानी शख्स के प्यार में पड़ीं और शादी करने के बाद रावलपिंडी चली गईं. वहां कई पाकिस्तानी फिल्मों में भी काम किया.

1935 में रिलीज हुई बाल हत्या में अजूरी. हालांकि, पहला आइटम डांस इन्होंने साल 1936 में ‘सोनार संसार’ में किया था. क्रेडिट: नेशनल फिल्म आर्काइव ऑफ इंडिया

कुक्कू मोरे: एंग्लो-इंडियन सनसनी
अजूरी के बाद इस विरासत को जिस नाम ने सबसे ज्यादा चमक दी, वह थीं ‘कुक्कू मोरे’ (Cuckoo Moray). 1940 के दशक में कुक्कू भारतीय सिनेमा की सबसे महंगी और डिमांडिंग डांसर थीं. साल 1946 में रिलीज हुई ‘अरब का सितारा’ फिल्म से उन्होंने डेब्यू किया था. बाद में निर्देशकों की पारखी नजर उनके डांस पर पड़ी. फिर क्या था, इसके बाद उन्होंने 1948 में आई फिल्म ‘अनोखी अदा’ में बतौर आइटम डांसर काम किया, जिसे खूब सराहा गया. कहा जाता है कि उस समय किसी भी फिल्म में कुक्कू का एक डांस नंबर फिल्म को सुपरहिट कराने के लिए काफी होता था. उन्होंने ‘अंदाज’ और ‘आन’ जैसी फिल्मों में अपनी नृत्य कला का प्रदर्शन किया. कुक्कू मोरे ने ही फिल्मों में विदेशी डांसिंग स्टाइल और ग्लैमर का तड़का लगाया. वे एक एंग्लो-इंडियन थीं, इसलिए उनके डांस में पश्चिमी संस्कृति की झलक साफ दिखती थी. रोचक बात यह है कि कुक्कू ने ही आगे चलकर हेलन को फिल्म इंडस्ट्री में ब्रेक दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई थी.

कुक्कू का जन्म 4 फरवरी 1928 को एक एंग्लो-इंडियन परिवार में हुआ था. बचपन से ही उन्हें डांस का शौक था. उनकी फ्लेक्सिबिलिटी और डांस की खासियत के कारण उन्हें ‘रबर गर्ल’ का खिताब मिला. जानकर हैरानी होगी कि उस वक्त वो एक डांस के बदले 6 हजार रुपए लेती थीं, जो कि कई सितारों की फीस से भी बहुत ज्यादा था. हालांकि, कुक्कू ने जितना ज्यादा पैसे कमाए, उतनी ही ज्यादा वो खर्चीली भी थीं. मुंबई में उनके पास बंगला, गाड़ी, शानो-शौकत से जुड़ी तमाम सुविधाएं थीं. इतना ही नहीं, उन्होंने एक कार अपने कुत्ते को घुमाने के लिए भी खरीदा था. हालांकि, करियर की ऊंचाई पर उन्होंने जितने पैसे कमाए, ढलान के बाद खर्चीले स्वभाव की वजह से गरीबी भी झेलनी पड़ी. जब उनके पैसे खत्म हो गए तो उनके सारे दोस्त भी दूर होते गए. उन्हें काम मिलना भी बंद हो गया. जीवन के अंतिम चरण में उन्हें कैंसर हुआ. तंगहाली में फेंकी हुई सब्जियां खाईं और इस तरह 30 सितंबर 1981 को उनकी मौत हो गई.

हेलन: सबसे बड़ी और मशहूर डांसर

इसके बाद दौर आया सदाबहार हेलन का. 1958 से लेकर 1980 के दशक तक हेलन ने भारतीय सिनेमा पर राज किया. साल 1958 में आई फिल्म ‘हावड़ा ब्रिज’ के गाने ‘मेरा नाम चिन चिन चू’ ने उन्हें रातों-रात सुपरस्टार बना दिया. ये गाना आज भी बेहद लोकप्रिय है. किड्स स्कूल फंक्शन में बच्चे भी इस पर खूब थिरकते हैं. हेलन ने ही आइटम डांस को एक ‘सम्मानजनक कला’ के रूप में स्थापित किया. उन्होंने कैबरे, बेली डांस और बॉलीवुड अंदाज को मिलाकर एक ऐसा सिग्नेचर स्टाइल तैयार किया, जिसे आज भी कोई मात नहीं दे पाया है. ‘पिया तू अब तो आजा’ और ‘महबूबा महबूबा’ जैसे गानों के बिना आज भी बॉलीवुड का इतिहास अधूरा है. हेलन ने दिखाया कि एक आइटम डांसर फिल्म की मुख्य अभिनेत्री जितनी ही प्रभावशाली हो सकती है. बाद में हेलन ने सलमान खान के पिता सलीम खान से शादी कर ली और घर बसा लिया.

अरुणा ईरानी से लेकर मलाईका अरोड़ा हैं शामिल
जैसे-जैसे दशक बदलते गए, आइटम डांसरों का अंदाज भी बदलता रहा. 70 और 80 के दशक में बिंदु, अरुणा ईरानी और जयश्री टी जैसी अभिनेत्रियों ने अपनी बोल्ड अदाओं से पर्दे पर आग लगाई. उन्होंने अपने डांस से दर्शकों को फिल्म देखने के लिए मजबूर कर दिया. उस दौरान फिल्म से इतर इन गानों को देखने के लिए दर्शक थिएटर का रुख करने लगे थे. ये वो दौर था, जब टीवी बहुत कम लोगों के पास होता था. इसके बाद 90 के दशक में माधुरी दीक्षित ने ‘एक दो तीन’ और ‘चोली के पीछे’ जैसे गानों से आइटम सॉन्ग्स को मुख्यधारा की अभिनेत्रियों के लिए भी खोल दिया. फिर मलाईका अरोड़ा ने ‘छइयां छइयां’ और ‘मुन्नी बदनाम हुई’ जैसे गानों से इस चलन को ‘ग्लैमरस और एलीट’ बना दिया. 2000 के दशक में राखी सावंत और मुमैथ खान जैसे चेहरों ने इस विधा को छोटे शहरों तक पहुँचाया.

आज के दौर की बात करें तो आइटम सॉन्ग्स अब केवल ‘डांस नंबर्स’ नहीं रह गए हैं, बल्कि ये करोड़ों का बिजनेस बन चुके हैं. नोरा फतेही, सनी लियोनी, सामंथा रुथ प्रभु और कैटरीना कैफ जैसी अभिनेत्रियां आज एक गाने के लिए करोड़ों रुपये चार्ज करती हैं. आज के गानों में तकनीक, बेहतरीन कोरियोग्राफी और हाई-बजट सेट्स का इस्तेमाल होता है, लेकिन इसकी जड़ें आज भी अजूरी के उसी 1936 वाले परफॉर्मेंस में छिपी हैं. भारतीय सिनेमा का यह सफर अजूरी से शुरू होकर आज की नोरा फतेही तक पहुंचा है, जिसने मनोरंजन के मायने ही बदल दिए हैं. ऐसे में अगर आगे से कोई आपसे पूछे कि भारतीय फिल्मों की पहली आइटम डांसर कौन थी, तो आप मैडम अजूरी का नाम बताएं, जिन्होंने 90 साल पहले भारतीय फिल्मों में आइटम डांस किया था.

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