सहारनपुर में फुटपाथ चढ़े अतिक्रमण की भेंट, सड़कों पर चलने को मजबूर जनता…जानिए क्या बोले लोग
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सहारनपुर में स्मार्ट सिटी योजना के तहत बने फुटपाथ अतिक्रमण की भेंट चढ़ गए हैं. दिल्ली रोड, अंबाला रोड और रेलवे रोड समेत कई क्षेत्रों में दुकानदारों ने फुटपाथ पर सामान सजा रखा है, जिससे पैदल चलने वाले लोग सड़कों पर चलने को मजबूर हैं। निगम की कार्रवाई के बावजूद हालात जस के तस हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि करोड़ों खर्च के बाद भी फुटपाथ का लाभ आम जनता को नहीं मिल पा रहा है.
सहारनपुर शहर को स्मार्ट सिटी योजना के तहत स्मार्ट बनने का काम तेजी से चल रहा है. इसी के तहत फुटपाथ को करोड़ों रुपए की लागत से एक खूबसूरत रूप दिया गया है, जिससे कि सड़कों पर चलने वाले व्यक्ति फुटपाथ से होकर चलें. लेकिन सहारनपुर में करोड़ों रुपए की लागत से तैयार हुए उस फुटपाथ पर आमजन नहीं बल्कि व्यापारी अपने सामान को सजा कर रखते हैं. यानी कि शहर के हर क्षेत्र में बनाया गया फुटपाथ अतिक्रमण से घिरा है और स्मार्ट सिटी की योजना ऐसे व्यापारियों के लिए वरदान साबित हो रही है. यह स्थिति सहारनपुर शहर के एक हिस्से की नहीं बल्कि सहारनपुर शहर के उस प्रत्येक हिस्से की है, जहां पर फुटपाथ बनाए गए हैं. चाहे उसमें दिल्ली रोड हो, अंबाला रोड हो, रेलवे रोड हो या फिर मार्केट का कोई भी मुख्य मार्ग सभी पर दुकानदारों के द्वारा अतिक्रमण किया गया है.
अतिक्रमण हटाने जाती है टीम तो झेलना पड़ता है व्यापारियों का विरोध
निगम टीम समय-समय पर अतिक्रमण हटाने जाती है, तो कई बार निगम टीम को व्यापारियों का विरोध भी देखने को मिलता है. व्यापारी निगम की टीम को देखकर सामान अंदर रख लेते हैं और निगम की टीम चले जाने के बाद फिर से फुटपाथ पर अपनी दुकानें सजाकर बैठ जाते हैं. अब सवाल उठता है कि आखिरकार स्मार्ट सिटी योजना के तहत करोड़ों रुपए लगाकर क्या फुटपाथ व्यापारियों को सामान सजाने के लिए दिया गया है. या फिर रोड पर चलने वाले व्यक्तियों की सुविधा के लिए. लोगों की सुविधा की अगर बात करें तो फुटपाथ पर कब्जा होने से आज भी सड़कों पर ही चलने को मजबूर हैं. कई बार स्थिति ऐसी हो जाती है कि कई वाहन सड़क से तेजी से गुजरते हैं और सड़क पर चलने वाला व्यक्ति घायल होने से बाल-बाल बचता है.
फुटपाथ होने के बाद भी सड़कों से चलने को मजबूर व्यक्ति
अंशुल, गौरव और विशाल ने लोकल 18 से बात करते हुए बताया कि फुटपाथ तो बनाए गए लेकिन फुटपाथ बनने के बावजूद भी हम लोगों को सड़कों से ही चलना पड़ता है. हकीकत नगर की स्थिति तो बेहद खराब है, जहां पर सड़क चौड़ी होनी चाहिए थी, वहां पर फुटपाथ चौड़े बनाए गए हैं यानी कि लोगों के स्थान पर व्यापारियों को सामान सजाने के लिए बड़े-बड़े फुटपाथ दे दिए गए हैं, तो व्यापारी उन पर सामान क्यों न सजाएगा. आलम यह है कि अगर कोई व्यक्ति सामान खरीदने आ रहा है और गाड़ी खड़ी कर देता है तो तुरंत जाम लग जाता है. पूरे शहर की यही स्थिति है फुटपाथ बनाए गए लेकिन उन पर आम व्यक्ति के चलने के लिए जगह नहीं बची. इसलिए फुटपाथ बनने का आम जनता को कोई फायदा नहीं हुआ.
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पिछले एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. 2010 में प्रिंट मीडिया से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जिसके बाद यह सफर निरंतर आगे बढ़ता गया. प्रिंट, टीवी और डिजिटल-तीनों ही माध्यमों म…और पढ़ें