पिता ने प्यार से बोले 4 शब्द, बेटे ने उसी पर बनाई फिल्म, गानों ने दी दिल में दस्तक, मेकर्स हुए मालामाल
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पिता के शब्दों से दिल से लगाकर बेटे ने उसी पर फिल्म बनाई. फिल्म में हीरो-हीरोइन के नए चेहरे थे. फिल्म जब बनकर तैयार हुई तो मूवी से जुड़े कलाकारों की किस्मत बदल गई. फिल्म के हीरो ने तो बॉलीवुड की दिशा ही बदल दी. चॉकलेटी चेहरे वाले हीरो का चलन इंडस्ट्री में आया. मूवी की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस फिल्म के दो गाने कालजयी साबित हुए. इन गानों की ट्यून ही फिल्म की पहचान बन गई. यह फिल्म कौन सी थी, आइये जानते हैं.
1986-87 के आसपास की बात है. मशहूर फिल्मकार की तबीयत खराब हो गई तो उन्होंने अपने बेटे को अधूरी फिल्म की स्क्रिप्ट दिखाई और मूवी बनाने को कहा. बेटे ने स्क्रिप्ट देखी तो उसमें बदलाव करने की बात कही. पिता ने बेटे की सभी शर्तें मान ली, बस इतनी सी गुजारिश की फिल्म का टाइटल ना बदला जाए. बेटे ने उसे मान लिया. बेटे ने ऐसी मूवी बनाई जो सुपरहिट निकली. आज इस मूवी की गिनती कल्ट मूवी में होती है. हम बात कर रहे हैं ‘कयामात से कयामत तक’ फिल्म की जो कि 29 अप्रैल 1988 को रिलीज हुई थी. आमिर खान-जूही चावला की यह डेब्यू फिल्म थी. फिल्म ने बॉलीवुड में कई मामलों में नया ट्रेंड स्थापित किया. आमिर खान-जूही चावला दोनों रातोंरात सुपर स्टार बन गए.
‘कयामत से कयामत तक’ फिल्म में आमिर खान-जूही चावला के अलावा गोगा कपूर, दिलीप ताहिल, आलोक नाथ, रविंद्र कपूर, बीना बनर्जी, रीमा लागू, युसुफ परवेज और वीजू खोटे जैसे सितारे भी नजर आए थे. स्टोरी-स्क्रीनप्ले और डायलॉग नासिर हुसैन ने लिखे थे. म्यूजिक आनंद-मिलिंद का था. फिल्म के सदाबहार रोमांटिक गाने गीतकार मजरूह सुल्तानपुरी ने लिखे थे. प्रोड्यूसर आमिर खान के ताया नासिर हुसैन थे. आमिर खान के पिता ताहिर हुसैन और नासिर हुसैन भाई-भाई थे. दोनों का ताल्लुकात यूपी के हरदोई जिले से था. हरदोई में अभी भी आमिर खान की जमीन है. आम के बाग हैं. नासिर हुसैन पहले मुंबई आए थे. वो कहानियां लिखते थे. फिर फिल्मकार बने. फिर उन्होंने अपने भाई ताहिर खान को भी मुंबई बुलाया.
‘कयामत से कयामत तक’ का डायरेक्शन नासिर हुसैन के चचेरे भाई मंसूर खान ने किया था. इस फिल्म ने प्लेबैग सिंगर उदित नारायण, अलका ज्ञागनिक, संगीतकार आनंद-मिलिंद, आमिर खान, जूही चावला सबकी तकदीर बदल दी. यह भी दिलचस्प है कि इस फिल्म से पहले नासिर हुसैन की तीन फिल्में जमाने को दिखाना है (1981), मंजिल मंजिल (1984) और जबर्दस्त (1985) फ्लॉप हो गई थीं.
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‘कयामत से कयामत तक’ फिल्म का प्रमोशन आमिर खान-जूही चावला ने अनोखे अंदाज में किया था. दोनों ऑटो के पीछे खुद ही फिल्म के पोस्टर लगाया करते थे. फिल्म की कामयाबी के बाद दोनों स्टार बन गए. इससे आमिर खान की जिंदगी बदल गई. उन्होंन अपने एक इंटरव्यू में बताया था, ‘मैं रातोंरात स्टार बन गया. दुनिया का एक पहलू बदल गया. मुझे सड़क पर चलना बंद करना पड़ा. लोग रोक लेते थे. गाड़ी में लिफ्ट ऑफर करते थे. ऑटो से मुझे निकाला जाता था. फैंस ऑटोग्राफ लेते थे. मैंने इतनी लोकप्रियता की उम्मीद नहीं की थी.’
‘कयामत से कयामत तक’ के दो क्लाइमैक्स शूट किए गए थे लेकिन फिल्म में सैड एंडिंग रखी गई थी. यह उस समय की फिल्मों में एक नया ट्रेंड था. आमिर खान ने अपने एक पुराने इंटरव्यू में बताया था कि वो सैड एंडिंग के पक्ष में थे. मंसूर खान भी यही चाहते थे. दोनों ने नासिर हुसैन को खुश रखने के लिए हैप्पी एंडिंग क्लाइमैक्स शूट जरूर किया था लेकिन बहुत ही लापरवाही के साथ. टेक्नीकली दूसरा क्लाइमैक्स शूट हुआ लेकिन उसे एडिट तक नहीं किया था.
आमिर खान की डेब्यू फिल्म ‘कयामत से कयामत तक’ का सबसे मेलोडियस सॉन्ग ‘ऐ मेरे हमसफर’ साबित हुई. 37 साल बाद भी इस गाने की मिठास कायम है. सीधे दिल में दस्तक देने वाले इस गाने को गीतकार मजरूह सुल्तानपुरी ने लिखा था. उदित नारायण-अलका याज्ञनिक ने अपनी आवाज देकर इसे अमर कर दिया. फिल्म का एक और गाना ‘पापा कहते हैं बड़ा नाम करेगा’ ने भी इतिहास रच दिया. कई फिल्मों ने इस गाने की पैरोडी यूज की गई. उदित नारायण इस सॉन्ग से स्टार बने.
उदित नारायण ने जब इस गाने के लिए स्टूडियो पहुंचे तो आमिर खान सामने बैठे थे. उन्होंने डरते हुए गाना गया था. तब उदित नारायण अपनी पहचान बनाने के लिए फिल्म इंडस्ट्री में संघर्ष कर रहे थे. इसी गाने ने उनकी किस्मत बदल दी. प्लेबैक सिंगर अलका याज्ञनिक ने तो फिल्म के गानों की रिकॉर्डिंग के दौरान आमिर खान को स्टूडियो से निकलवा दिया था. वो आमिर खान को नहीं पहचानती थीं.
फिल्म का टाइटल पहले ‘नफरत के वारिस’ था. इसे बदलकर नासिर हुसैन ने ‘कयामत से कयामत तक’ कर दिया था. फिल्म का बजट ढाई करोड़ के आसपास था. इस फिल्म ने 5 करोड़ का कलेक्शन किया था. उस 1988 की तीसरी सबसे ज्यादा पैसा कमाने वाली फिल्म थी. फिल्म बन गई लेकिन कोई डिस्ट्रीब्यूटर खरीद ही नहीं रहा था. फिल्म में हीरो-हीरोइन भी नए थे. मंसूर खान परेशान हो गए. नासिर हुसैन ने अपने जोखिम पर फिल्म रिलीज की. यह मूवी मैसिव हिट रही.
<br />’कयामत से कयामत तक’ को नासिर हुसैन-ताहिर हुसैन के पूरे परिवार ने मिलकर बनाया. फिल्म में आमिर खान के छोटे भाई फैसल खान, उनके जीजा, चचेरी बहन नुजहत, आमिर खान की पहली पत्नी रीना दत्ता भी नजर आई थीं. फिल्म के रिलीज होने से पहले ही आमिर खान ने रीना दत्ता से शादी कर ली थी.