holi in braj 2026 Dwarkadhish Temple Banke Bihari temples have unique Holi celebration | इन 3 मंदिरों में होता है होली का अनोखा रंगोत्सव

Share to your loved once


होमफोटोधर्म

इन 3 मंदिरों में होता है होली का अनोखा रंगोत्सव, यहां तो कल ही खेलें होली

Last Updated:

Holi In Braj 2026: ब्रज की होली अपने आप में विशेष होती है और यहां के मंदिरों में मनाए जाने वाले इस त्योहार में शामिल होकर भक्तजन एक अद्वितीय अनुभव प्राप्त करते हैं. प्रत्येक मंदिर में होली का अपना अलग ही अंदाज है, जो भक्तों के दिलों में हमेशा के लिए बस जाता है. आइए जानते हैं ब्रज के इन तीन मंदिरों के बारे में…

Mathura and Vrindavan Holi 2026: रंग-गुलाल और खुशियों से भरे होली का त्योहार अब बहुत नजदीक है, जिसको लेकर देशभर में तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो गई हैं. यूं तो होली पूरी दुनिया में मनाई जाती है, लेकिन ब्रज की होली की बात ही अलग है. ब्रज में होली का खुमार बसंत पंचमी से शुरू हो जाता है और लगभग 40 दिनों तक चलता है. ब्रज में फूलों वाली होली, लड्डू वालों होली, लट्ठमार होली, रंगों वाली होली से लेकर हुरंगा तक खेला जाता है. ब्रज की होली सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि यह भक्ति, परंपरा और उत्सव से भरी एक महाउत्सव है, जिसे देखने हर साल देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं.

भारत में होली सबसे ज्यादा धूमधाम से उत्तर प्रदेश के मथुरा-वृंदावन के मंदिरों में मनाई जाती है, जिसे ‘ब्रज की होली’ भी कहा जाता है. यहां बरसाना के ‘श्री लाडली जी महाराज मंदिर’ की लट्ठमार और लड्डूमार होली, वृंदावन के ‘बांके बिहारी मंदिर’ की फूलों की होली और मथुरा के ‘द्वारकाधीश मंदिर’ की पारंपरिक रूप से रंग-गुलाल से मनाई जाने वाली होली सबसे प्रमुख है.

श्री लाडली जी महाराज मंदिर में लड्डूमार और लठमार होली का अनोखा उत्सव मनाया जाता है. यह प्राचीन मंदिर उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के बरसाना में स्थित है, जो देवी राधा को समर्पित है. इसे श्रीजी मंदिर, राधा रानी मंदिर और बरसाने का माथा के नाम से भी कहा जाता है. बरसाना की लट्ठमार और लड्डूमार होली खेली जा चुकी है और 27 फरवरी को नंदगांव में लट्ठमार होली खेली जा रही है.

Add News18 as
Preferred Source on Google

इस साल वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में फूलों की होली 28 फरवरी को खेली जाएगी, जो अपनी अनोखी परंपरा के लिए जानी जाती है. मान्यता है कि वृंदावन में फूलों की होली का उत्सव द्वापर युग से चलता आ रहा है. कहा जाता है कि यहां भगवान कृष्ण अपने मित्रों संग प्रिय राधा रानी और गोपियों के साथ फूलों से होली खेला करते थे. साथ ही 28 फरवरी को वृंदावन में विधवाओं की होली भी खेली जाएगी.

इस खास दिन बांके बिहारी मंदिर और राधा-कृष्ण को फूलों से सजाया जाता है. यहां रंग और गुलाल के बजाय रंग-बिरंगे फूलों की पंखुड़ियों के साथ प्राकृतिक रूप से होली खेली जाती है. मान्यता है कि गुलाब, गेंदा और चमेली के फूलों की खुशबू भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी को काफी प्रिय है.

भगवान श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा के प्रसिद्ध द्वारिकाधीश मंदिर में होली के त्योहार को तिथि के अनुसार पारंपरिक रूप से मनाया जाता है. मान्यता है कि यहां की होली श्रीकृष्ण के जीवन काल से जुड़ी है. पर्व के दिन मंदिर में आए श्रद्धालु भगवान के दर्शन करने के बाद उनके साथ रंग और गुलाल की होली खेलते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

GET YOUR LOCAL NEWS ON NEWS SPHERE 24      TO GET PUBLISH YOUR OWN NEWS   CONTACT US ON EMAIL OR WHATSAPP