ब्रायन बेनेट ने जड़ा बुमराह की गेंद पर छक्का… जिम्बाब्वे हारी मगर अकेला जीत गया ये खिलाड़ी
Last Updated:
भारत के खिलाफ मैच में जिम्बाब्वे को बेशक हार मिली, मगर बेनेट अकेले पूरी टीम इंडिया से जीत गया. ब्रायन ने 59 गेंद पर 97 रन की पारी खेली. वह वर्ल्डकप के 5 मैचों में 4 बार नाबाद रहने वाले अकेले खिलाड़ी हैं.

बुमराह तेजी से रनरअप लेते हुए आए. सामने थे ब्रायन बेनेट. बुमराह के हाथ से गेंद छूटी और सीधे स्टैंड पर गई. लॉन्ग ऑन पर छक्का जड़कर बेनेट ने न सिर्फ 37 गेंदों में अपना पचासा पूरा किया बल्कि ये भी दिखाया कि उनका मोमेंटम किस लेवल पर है. दुनिया के बेस्ट डेथ बॉलर पर इस तरह सिक्सर मारने वाला यह बल्लेबाज जिम्बाब्वे क्रिकेट का नया उभरता सितारा है. विश्वकप के अब तक 5 मैचों में ये खिलाड़ी 4 मैच में नाबाद रहा है. कुल रनों के मामलों में भी टूर्नामेंट में साहिबजादा फरहान के बाद बेनेट दूसरे नंबर पर है, जिनके 277 रन हैं.
भारत के खिलाफ मैच में जिम्बाब्वे को बेशक हार मिली, मगर बेनेट अकेले पूरी टीम इंडिया से जीत गया. ब्रायन ने 59 गेंद पर 97 रन की पारी खेली, जिसमें 6 छक्के और 8 चौके लगाए. वह जिम्बाब्वे की तरफ से भारत के खिलाफ वर्ल्डकप में सबसे बड़ा स्कोर है. बेनेट ने किसी भी भारतीय बॉलर को नहीं बख्शा और अकेले अपनी टीम को सम्माजनक स्कोर तक पहुंचाया.
वर्ल्डकप के शुरुआती 4 मैचों में बिना आउट हुए 175 रन बनाकर वह पहले ही विराट कोहली और जोस बटलर का रिकॉर्ड तोड़ चुके हैं. कोहली के नाम वर्ल्डकप के लगातार दो मैचों में नाबाद रहकर 171 रन बनाने, तथा जोस बटलर के नाम दो मैचों में नाबाद रहकर 172 रन बनाने का रिकॉर्ड था.
ब्रायन बेनेट की कहानी घर के बैकयार्ड में धूल भरी छोटी सी जगह से शुरू हुई थी, जहां एक 10 साल का लड़का पुरानी क्रेट्स को विकेट बनाकर खेलता था. भाई डेविड बॉल फेंकते और दर्शक के तौर पर सिर्फ परिवार बेनेट के शॉट पर तालियां बजाता. वहां से देखा गया सपना अब विश्व कप के मैदान तक पहुंच गया है.
बेनेट अभी सिर्फ 22 साल के हैं. उनका जन्म 10 नवंबर 2003 को हुआ था. जिम्बाब्वे के न्यूजपेपर द स्टैंडर्ड में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक उनके पिता केली बेनेट एक ब्लूमेरी फार्मर हैं. वह 1990 के दशक में फर्स्ट क्लास क्रिकेटर भी रहे थे. डेविड ब्रायन के जुड़वा भाई हैं. उनके एक छोटे भाई शॉन भी हैं. सभी साथ में पीटरहाउस बॉयज स्कूल मारोंडेरा में पढ़े.
जिम्बाब्वे क्रिकेट में राजनीतिक अस्थिरता, फंडिंग की कमी और अनियमित अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर जैसी चुनौतियां रही हैं, लेकिन ब्रायन को एलीट स्कूलिंग का फायदा मिला. पीटरहाउस के बाद, उनके पिता ने बेनेट का एडमिशन दक्षिण अफ्रीका के ईस्टर्न केप में किंग्सवुड कॉलेज में करवाया.
About the Author
मैं इस समय News18 App टीम का हिस्सा हूं. इससे पहले मैंने, अमर उजाला, हिंदुस्तान जैसे प्रतिष्ठित अखबारों में काम किया है. साथ ही टाइम्स नाउ, जागरण और टीवी9 भारतवर्ष की वेबसाइट में राजनीति, इतिहास, शिक्षा, साहित्…और पढ़ें
खबरें पढ़ने का बेहतरीन अनुभव
QR स्कैन करें, डाउनलोड करें News18 ऐप या वेबसाइट पर जारी रखने के लिए यहां क्लिक करें


