अमेरिका का क्रेज पड़ा फीका! घटी 45% भारतीय छात्रों की संख्या, इंडिया के B-Schools में बढ़े 25% विदेशी आवेदन

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GMAC Report 2025: अमेरिका में पढ़ाई करने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. अगस्त 2025 में अमेरिकी विश्वविद्यालयों में भारतीय छात्रों का दाखिला 45% तक कम हो गया. वहीं दूसरी ओर भारत के मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट्स में विदेशी छात्रों के आवेदन 25% बढ़े हैं. यह जानकारी ग्रेजुएट मैनेजमेंट एडमिशन काउंसिल (GMAC) की नई रिपोर्ट में सामने आई है.

अमेरिका की जगह एशिया और यूरोप बने पसंद

रिपोर्ट के अनुसार, लंबे समय से पढ़ाई के लिए पसंदीदा रहे अमेरिका और कनाडा जैसे देशों की लोकप्रियता अब घट रही है. वीजा नियमों की अनिश्चितता, बढ़ती फीस और कमजोर होती भारतीय मुद्रा इसकी बड़ी वजह मानी जा रही है. GMAC के 2025 सर्वे में पाया गया कि यूरोप (यूके को छोड़कर) और एशिया में अंतर्राष्ट्रीय छात्रों के आवेदन बढ़े हैं, जबकि अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन में गिरावट आई है.

एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बढ़े अंतर्राष्ट्रीय छात्रों के एडमिशन

361 बिजनेस स्कूलों पर किए गए एक सर्वे में पाया गया कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र के 54% इंस्टीट्यूट्स में 2025 में विदेशी छात्रों की संख्या बढ़ी है. वहीं अमेरिका क्षेत्र के दो-तिहाई इंस्टीट्यूट्स में अंतर्राष्ट्रीय छात्रों के एडमिशन में कमी देखी गई.

वीजा में देरी से छात्रों को नुकसान

रिपोर्ट में बताया गया कि अमेरिका में करीब 90% प्रोग्राम्स ने कहा कि भारत उन देशों में शामिल है, जहां से छात्रों ने एडमिशन की फीस जमा की, लेकिन वीजा में देरी या अस्वीकृति के कारण वे एडमिशन नहीं ले पाए. अमेरिका में पढ़ाई की इच्छा रखने वाले गैर-अमेरिकी छात्रों की संख्या 2019 में 57% थी, जो 2025 में घटकर 42% रह गई. इसके विपरीत, पश्चिमी यूरोप की लोकप्रियता 63% पर स्थिर रही.

भारत अब खुद बन रहा है स्टडी डेस्टिनेशन

भारत की स्थिति इस समय दोहरी है. एक ओर भारत अब भी अमेरिका को छात्र भेजने वाला बड़ा देश है. दूसरी ओर, भारत के मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट्स में विदेशी छात्रों के आवेदन 25% बढ़ना इस बात का संकेत है कि भारत अब खुद एक पढ़ाई का केंद्र बन रहा है.

कनाडा, यूके और ऑस्ट्रेलिया में भी असर

कनाडा ने 2024 में अंतर्राष्ट्रीय स्टडी परमिट पर सीमा तय की, जिससे आवेदन और एडमिशमन दोनों कम हुए. वहीं, यूके में आश्रितों (डिपेंडेंट्स) पर सख्ती और पढ़ाई के बाद काम करने की अवधि घटाने से 2024 में छात्र वीजा 12% कम हुए. इसके अलावा, ऑस्ट्रेलिया में नेशनल प्लानिंग लेवल लागू होने से 2025 की पहली छमाही में दाखिले 16% तक घटे.

अब रैंकिंग नहीं, खर्च और वीजा अहम

GMAC की रिपोर्ट के अनुसार अब छात्र केवल कॉलेज की रैंकिंग नहीं, बल्कि पढ़ाई का खर्च, वीजा की स्थिति और पढ़ाई के बाद नौकरी के अवसर को ज्यादा महत्व दे रहे हैं. सितंबर 2025 में भारतीय रुपये के कमजोर होने से विदेश में पढ़ाई और महंगी हो गई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि 2026 में ग्लोबल मैनेजमेंट एजुकेशन का रुख इस बात पर निर्भर करेगा कि किस देश में वीजा नियम स्पष्ट हैं, पढ़ाई के बाद नौकरी के मौके बेहतर हैं और कुल खर्च किफायती है.

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