पैगंबर की सुन्नत से लेकर वैज्ञानिक फायदों तक, रोज़ा खोलने में खजूर क्यों है सबसे बेहतर विकल्प
अलीगढ़ : रमजान का मुबारक महीना चल रहा है और हर ओर इबादत, रोज़ा और रहमत का माहौल है. इस पाक महीने में रोज़ेदार सुबह से शाम तक भूखे-प्यासे रहकर सब्र और अनुशासन का परिचय देते हैं. जब शाम को इफ्तार का वक्त होता है तो अधिकतर मुसलमान खजूर से रोज़ा खोलते हैं. सदियों पुरानी यह परंपरा आज भी पूरी आस्था और विश्वास के साथ निभाई जा रही है.
हदीसों में मिलता है उल्लेख
इस परंपरा के पीछे सबसे पहला कारण सुन्नत है. इस्लाम में पैगंबर मुहम्मद के जीवन को आदर्श माना गया है. हदीसों में उल्लेख मिलता है कि वे रोज़ा खोलते समय पहले खजूर खाते थे और यदि खजूर उपलब्ध न हो तो पानी से इफ्तार करते थे. यही वजह है कि मुसलमान खजूर से रोज़ा खोलकर सुन्नत पर अमल करने की कोशिश करते हैं.
धार्मिक दृष्टि से खजूर की अहमियत
अलीगढ़ के मदनी हॉस्पिटल के डॉ. अरशद मदनी बताते हैं कि धार्मिक दृष्टि से खजूर को बरकत वाला फल माना गया है. कुरआन शरीफ में भी खजूर का कई स्थानों पर उल्लेख मिलता है, जिससे इसकी अहमियत और बढ़ जाती है. इस्लामी परंपरा में इसे पवित्र, पौष्टिक और ऊर्जा देने वाला फल माना गया है.
वैज्ञानिक कारण भी हैं महत्वपूर्ण
डॉ. मदनी के अनुसार वैज्ञानिक रूप से भी खजूर रोज़ा खोलने के लिए सबसे उपयुक्त आहार है. पूरे दिन भूखे और प्यासे रहने के बाद शरीर में ग्लूकोज़ का स्तर कम हो जाता है. खजूर में प्राकृतिक रूप से ग्लूकोज़ और फ्रक्टोज़ प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर को तुरंत ऊर्जा प्रदान करते हैं. इससे कमजोरी, चक्कर या थकान की समस्या जल्दी दूर हो जाती है.
पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद
इसके अलावा खजूर में फाइबर, पोटैशियम, मैग्नीशियम और आयरन जैसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व मौजूद होते हैं. ये तत्व शरीर के संतुलन को बनाए रखने में सहायक होते हैं. रोज़ा खोलते समय यदि तुरंत भारी या तली-भुनी चीजें खा ली जाएं तो पेट पर अचानक दबाव पड़ सकता है, जिससे पाचन संबंधी दिक्कतें हो सकती हैं. जबकि खजूर हल्की होने के कारण पेट को धीरे-धीरे भोजन के लिए तैयार करती है.
आसान उपलब्धता और पारंपरिक महत्व
एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू इसकी उपलब्धता है. खजूर लंबे समय तक सुरक्षित रहने वाला प्राकृतिक फल है. पुराने समय में अरब क्षेत्र में यह सबसे सामान्य और आसानी से मिलने वाला पौष्टिक आहार था. इसलिए भी इफ्तार की शुरुआत खजूर से करने की परंपरा प्रचलित हुई, जो आज वैश्विक स्तर पर अपनाई जा रही है.
आस्था के साथ संतुलित जीवनशैली का संदेश
डॉ. मदनी का कहना है कि खजूर से रोज़ा खोलना केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि एक संतुलित और स्वास्थ्यवर्धक जीवनशैली का भी संदेश देता है. यही कारण है कि आज भी दुनिया भर के रोज़ेदार इफ्तार की शुरुआत खजूर से करना पसंद करते हैं और इस परंपरा को पूरी श्रद्धा के साथ निभाते हैं.