दुनिया के 5 क्रिकेटर…जिन्होंने बिना फर्स्ट क्लास क्रिकेट खेले इंटरनेशनल क्रिकेट में किया डेब्यू, 3 खिलाड़ी बने कप्तान
नई दिल्ली. क्रिकेट की दुनिया में एक पुरानी कहावत है कि ‘अनुभव की भट्टी में तपकर ही सोना कुंदन बनता है.’ आमतौर पर एक खिलाड़ी सालों तक घरेलू क्रिकेट और फर्स्ट क्लास (प्रथम श्रेणी) मैचों की धूल फांकता है, तब कहीं जाकर उसे इंटरनेशनल जर्सी नसीब होती है. लेकिन क्रिकेट के इतिहास में कुछ ऐसे ‘कुदरती करिश्मे’ भी हुए, जिन्होंने फर्स्ट क्लास क्रिकेट का एक भी मैच खेले बिना डायरेक्ट इंटरनेशनल मंच पर कदम रखा और दुनिया को हैरान कर दिया. यह कहानी है उन पांच सितारों डेविड वॉर्नर, मशरफे मुर्तज़ा, अकीला धनंजय, राशिद खान और मुजीब उर रहमान की. जिन्होंने साबित किया कि प्रतिभा किसी औपचारिक अनुभव की मोहताज नहीं होती.
इस लिस्ट में सबसे बड़ा और हैरान करने वाला नाम ऑस्ट्रेलिया के डेविड वॉर्नर (David Warner) का है. 1877 के बाद वॉर्नर पहले ऐसे ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी बने, जिन्होंने बिना किसी फर्स्ट क्लास मैच के नेशनल टीम में जगह बनाई. जनवरी 2009 में जब वह दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टी20 डेब्यू के लिए उतरे, तो किसी को अंदाजा नहीं था कि यह ‘पॉकेट डायनामाइट’ आगे चलकर टेस्ट क्रिकेट का भी दिग्गज बनेगा. उन्होंने अपनी पहली ही पारी में 43 गेंदों पर 89 रन ठोककर सनसनी मचा दी. वॉर्नर ने 112 टेस्ट में 8786 रन बनाए जिसमें 26 शतक और 37 अर्धशतक शामिल हैं जबकि 161 वनडे में उनके नाम 22 शतक और 33 अर्धशतकों की मदद से 6932 रन जोड़े. उन्होंने 110 टी20 इंटरनेशनल मैचों में एक शतक और 28 अर्धशतक की मदद से 3277 रन बनाए.बाएं हाथ के पूर्व बल्लेबाज वॉर्नर ने न केवल 18,995 से अधिक इंटरनेशन रन बनाए, बल्कि ऑस्ट्रेलिया की कप्तानी भी की. उनकी कप्तानी का रिकॉर्ड बेमिसाल है, जहां उन्होंने 3 वनडे मैचों में टीम की कमान संभाली और तीनों में जीत दर्ज की, जबकि 9 टी20 मैचों में 8 जीत दिलाई.
मशरफे मुर्तजा: बांग्लादेशी क्रिकेट के ‘मैश’
बांग्लादेश के सबसे सफल कप्तानों में शुमार मशरफे मुर्तज़ा (Mashrafe Mortaza) की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. साल 2001 में जिम्बाब्वे के खिलाफ जब उन्होंने डेब्यू किया, तब उनके पास प्रथम श्रेणी क्रिकेट का शून्य अनुभव था. मुर्तज़ा केवल एक तेज गेंदबाज नहीं थे, बल्कि वे एक मार्गदर्शक बने. उन्होंने बांग्लादेश के लिए 2,961 रन बनाए और अपनी कप्तानी में टीम का चेहरा बदल दिया. 88 वनडे मैचों में कप्तानी करते हुए उन्होंने 50 जीत दर्ज की, जो बांग्लादेशी क्रिकेट इतिहास में एक मील का पत्थर है. मुर्तजा ने बांग्लादेश की ओर से 36 टेस्ट, 220 वनडे और 54 टी20 इंटरनेशनल मैच खेले.उनके नाम टेस्ट में 797 रन और 78 विकेट दर्ज हैं जबकि 220 वनडे में उन्होंने 270 विकेट लेने के साथ साथ 1787 रन बनाए जबकि 54 टी20 इंटरनेशनल में 54 विकेट के साथ 42 विकेट भी लिए
अफगानिस्तान का जादुई उदय: राशिद खान और मुजीब उर रहमान
अफगानिस्तान की क्रिकेट क्रांति के दो सबसे बड़े स्तंभ, राशिद खान (Rashid Khan) और मुजीब उर रहमान. सीधे इंटरनेशनल क्रिकेट की गोद में आए. राशिद खान ने जब 2015 में डेब्यू किया, तब उनके देश में घरेलू ढांचा विकसित हो रहा था.राशिद ने न केवल 2,169 से अधिक रन बनाए और विकेटों की झड़ी लगाई, बल्कि दुनिया के सबसे युवा इंटरनेशनल कप्तान (19 साल) भी बने. वहीं मुजीब उर रहमान 21वीं सदी में पैदा होने वाले पहले ऐसे खिलाड़ी बने जिन्होंने सीधे अंतरराष्ट्रीय मैच खेला. इन दोनों स्पिनरों ने दिखाया कि युद्धग्रस्त देश की गलियों में सीखी गई कला दुनिया के किसी भी फर्स्ट क्लास अनुभव से बड़ी हो सकती है. राशिद खान 6 टेस्ट, 117 वनडे और 115 टी20 इंटरनेशनल मैच खेल चुके हैं. उन्होंने टेस्ट में 54, वनडे में 210 और टी20 इंटरनेशनल में 193 विकेट लिए हैं.
अकीला धनंजय: नेट बॉलर से नेशनल हीरो
श्रीलंका के अकीला धनंजय (Akila Dananjaya) की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं है. उन्हें श्रीलंका के तत्कालीन कप्तान महेला जयवर्धने ने नेट्स पर गेंदबाजी करते देखा और सीधे 2012 के टी20 वर्ल्ड कप की टीम में शामिल करवा दिया. बिना किसी प्रोफेशनल मैच के अनुभव के, उन्होंने सीधे विश्व कप जैसे बड़े मंच पर अपनी मिस्ट्री स्पिन का जलवा बिखेरा.उन्होंने अपने करियर में 523 रन बनाए और कई अहम विकेट चटकाए. अकीला धनंजय ने 6 टेस्ट, 42 वनडे और 33 टी20 इंटरनेशनल मैच खेले हैं. टेस्ट में 33, वनडे में 59 और टी20 में 30 विकेट ले चुके हैं.