किशोर कुमार के 2 सुपरहिट गाने, एक जैसी ट्यून, दोनों में मिला फिल्मफेयर अवॉर्ड, सुनते ही उमड़ता है बेशुमार प्यार

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किशोर कुमार फिल्मफेयर अवॉर्ड विनिंग सॉन्ग : लीजेंड सिंगर किशोर कुमार हिंदी सिनेमा के इतिहास के एक ऐसे सितारे हैं जिन्होंने 8 बार फिल्मफेयर अवॉर्ड जीता है. दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने दो अवॉर्ड तो एक जैसी सुरीली धुन पर बने गाने में जीते. ये फिल्में सिर्फ दो साल के अंतराल में सिनेमाघरों में आई थीं. दोनों ही फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर जमकर धमाल मचाया था. दोनों ही गाने इतने पॉप्युलर हुए कि टूटे दिल आशिकों की पहली पसंद बने. आज भी इन गानों को सुनते ही दिल में महबूब के लिए प्यार उमड़ने लगता है. दिलचस्प ता यह है इन दोनों अवॉर्ड विनिंग सॉन्ग में एक में सुपर स्टार पति तो दूसरी उनकी पत्नी नजर आई थी. ये दोनों सुपरहिट गाने कौन से थे और दोनों फिल्में कौन सी थीं, आइये जानते हैं……….

लीजेंड सिंगर किशोर कुमार की गिनती हिंदी सिनेमा के महान प्लेबैक सिंगर में होती है. किशोर कुमार का वास्तविक नाम किशोर कुमार का असली नाम आभास कुमार गांगुली था. जन्म खंडवा मध्यप्रदेश में हुआ. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अपने भाई अशोर कुमार की तरह बॉम्बे टॉकीज से की थी. 1946 में आई फिल्म शिकारी में पहली बार किशोर कुमार ने एक्टिंग की थी. उन्होंने संगीत की शिक्षा नहीं ली लेकिन आवाज में ऐसा उतार-चढ़ाव लाते थे कि दिग्गज सिंगर भी फीके पड़ जाते थे. किशोर दा को पूरे सिंगिंग करियर में 8 बार फिल्मफेयर अवॉर्ड मिले. उन्हें पहला फिल्मफेयर अवॉर्ड आराधना फिल्म के ‘रूप तेरा मस्ताना’ सॉन्ग के लिए मिला था. एक बार तो उन्हें एक जैसी धुन पर बने गानें में अवॉर्ड मिले. दोनों ही फिल्में सिर्फ दो साल के अंतराल में रिलीज हुई थीं. ये फिल्में थीं : अगर तुम ना होते और सागर. दोनों ही फिल्मों का म्यूजिक आरडी बर्मन ने कंपोज किया था.

किशोर दा ने 1983 में आई फिल्म ‘अगर तुम न होते’ का टाइटल सॉन्ग आया था. आरडी बर्मन के म्यूजिक से सजे गाने के बोल ‘हमें और जीने के चाहत ना होती, अगर तुम ना होते….’ गुलशन बावरा ने लिखे थे. फिल्म में राजेश खन्ना, राज बब्बर, रेखा, मदन पुरी और असरानी जैसे सितारे नजर आए थे. 1984 में आयोजित फिल्मफेयर अवॉर्ड समारोह में किशोर कुमार को इसी गाने के लिए फिल्म फेयर पुरस्कार मिला था. इसी साल राजेश खन्ना की दो और सुपरहिट फिल्में सौतन और अवतार भी आई थीं. इन दोनों फिल्मों को भी दर्शकों ने खूब पसंद किया था.

राज बब्बर को जब यह फिल्म ऑफर हुई तो वह बहुत खुश हुए थे. रेखा के अपोजिट उन्हें काम करने का मौका मिल रहा था. इससे पहले जीवन धारा मूवी में दोनों भाई-बहन के रोल में थे. बब्बर ने दावा किया था कि उनका रोल काट लिया गया. यह सब राजेश खन्ना के चलते किया था. इसी फिल्म का एक गाना ‘कल तो संडे की छुट्टी है, बस इसी बात का रोना है’ रेखा ने गाया था.

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1985 में म्यूजिकल रोमांटिक ड्रामा फिल्म ‘सागर’ का म्यूजिक भी आरडी बर्मन ने कंपोज किया था. रमेश सिप्पी के डायरेक्शन में बनी इस फिल्म में ऋषि कपूर, कमल हसन, डिंपल कपाड़िया नजर आए थे. स्टोरी, गाने, स्क्रीनप्ले जावेद अख्तर ने लिखा था. इस फिल्म का एक गाना ‘सागर किनारे दिल ये पुकारे, तू जो नहीं तो मेरा कोई नहीं है’ जावेद अख्तर ने लिखा था. इस गाने की धुन ‘अगर तुम ना होते’ से ही इंस्पायर्ड थी. आरडी बर्मन ने अपने एक पुराने इंटरव्यू में खुद इसका खुलासा किया था. ‘सागर किनारे दिल ये पुकारे, तू जो नहीं तो मेरा कोई नहीं है’ गाने के लिए किशोर कुमार को 1986 में फिल्म फेयर अवॉर्ड मिला था.

सागर फिल्म के लिए डिंपल कपाड़िया ने ‘सदमा’ मूवी छोड़ दी थी. फिल्म में ऋषि कपूर अपने रोल से खुश नहीं थे. उन्हें फिल्म में डिपंल के साथ ‘बॉबी’ जैसी केमिस्ट्री की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. फिल्म में डिंपल कपाड़िया का एक टॉपलेस सीन भी था जिसको लेकर खूब कंट्रोवर्सी हुई थी. यह भी दिलचस्प है कि किशोर दा को जिन दो फिल्मों में दो साल के अंतराल में फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला, वो फिल्में बॉलीवुड कपल राजेश खन्ना और उनकी पत्नी डिंपल कपाड़िया की थीं. ‘अगर तुम ना होते’ में राजेश खन्ना लीड रोल में थे तो ‘सागर’ में डिंपल कपाड़िया अहम भूमिका में थीं.

दिलचस्प बात यह है कि ‘अगर तुम ना होते’ और ‘सागर किनारे, दिल ये पुकारे’ सॉन्ग की धुन बॉलीवुड के 10 से ज्यादा गानों में सुनाई दे चुकी है. संगीतकार एसडी बर्मन ने सबसे पहले 1951 में आई फिल्म ‘नौजवान’ में इस धुन पर एक गाना बनाया था. इस गाने के बोल थे : ‘ठंडी हवाएं, लहराके आएं..’. गाना लता मंगेशकर ने गाया था. गीतकार साहिर लुधियानवी थे. इस धुन से प्रेरित होकर संगीतकार रोशन या राम लक्ष्मण, मदन मोहन और एसडी बर्मन के बेटे आरडी बर्मन ने गाने बनाए. आरडी बर्मन ने तो इस धुन का इस्तेमाल चार फिल्मों में किया.

1954 में ‘चांदनी चौक’ फिल्म का गाना ‘तेरा दिल कहां है, सब कुछ यहां है…’ 1951 की फिल्म नौजवान के ‘ठंडी हवाएं, लहराके आएं…’ से ही प्रेरित थी. एसडी बर्मन की धुन में थोड़ा सा फेरबदल करके म्यूजिक कंपोज किया था. फिर 1964 में ‘आपकी परछाइयां’ में एक गाना ‘यही है तमन्ना, तेरे घर के सामने, मेरी जान जाए, मेरी जान जाए….’ गाना आया था. मोहम्मद रफी की आवाज में यह गाना नौजवान मूवी के सॉन्ग से ही प्रेरित था.

1966 में संगीतकार रोशन ने फिल्म ‘ममता’ में ‘रहें ना रहें हम, महका करेंगे, बनके कली…’ इसी धुन का इस्तेमाल किया. यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बहुत सफल रही थी. फिर 1976 में फिल्म ‘बंडलबाज’ में ‘नगमा हमारा गाएगा ये जमाना’ सॉन्ग भी आरडी बर्मन ने कंपोज किया था. आरडी बर्मन ने अपने पिता की धुन में थोड़ा बहुत बदलाव करके नया गाना बना दिया. आरडी बर्मन ने 1981 में आई फिल्म ‘नरम गरम’ में एक बार फिर से इसी धुन पर एक गाना बना दिया. यह सॉन्ग था : ‘हमें रास्तों की जरूरत नहीं है…’.

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