CDS Anil Chauhan On India Defence | परमाणु हथियारों के बिना भी दुश्मन होगा ढेर! CDS अनिल चौहान ने बताया भविष्य की जंग के लिए भारत का ‘मास्टरप्लान’
Last Updated:
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने भविष्य के युद्धों के लिए ‘इंटेलिजेंट वारफेयर’ और ‘गैर-परमाणु रणनीतिक प्रतिरोधक क्षमता’ विकसित करने पर जोर दिया है. उन्होंने कहा कि अब युद्ध केवल जमीन या आसमान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि डिजिटल और कॉग्निटिव क्षेत्रों तक फैल चुके हैं. भारतीय सेना को अब पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर ‘ऑल रियल्म ऑल डोमेन ऑपरेशंस’ (ARADO) की दिशा में खुद को तैयार करना होगा.

क्या बदलने वाला है जंग का मैदान? सीडीएस अनिल चौहान का बड़ा बयान- ‘सिर्फ ताकत नहीं, तकनीक से हारेगा दुश्मन’.
नई दिल्ली: भारतीय सशस्त्र बलों के मुखिया यानी चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने देश की सुरक्षा रणनीति को लेकर एक बहुत ही अहम और दूरगामी बयान दिया है. उन्होंने साफ किया है कि आज के बदलते दौर में युद्धों का स्वरूप पूरी तरह बदल चुका है. अब लड़ाई केवल सरहदों, समंदर की लहरों या आसमान की ऊंचाइयों तक सीमित नहीं रह गई है. भविष्य के युद्ध ‘सिंथेटिक’ और ‘कॉग्निटिव’ यानी डिजिटल और मनोवैज्ञानिक क्षेत्रों में लड़े जाएंगे. बुधवार को सिकंदराबाद में आयोजित एक रक्षा संगोष्ठी के दौरान उन्होंने बताया कि भारत को अब परमाणु हथियारों के अलावा ‘गैर-परमाणु रणनीतिक प्रतिरोधक क्षमता’ को और ज्यादा मजबूत करना होगा. इसका सीधा मतलब यह है कि हम अपनी तकनीक और बुद्धिमत्ता के दम पर किसी भी आक्रामक स्थिति को काबू करने और जीत सुनिश्चित करने की तैयारी कर रहे हैं.
क्या है ‘इंटेलिजेंट वारफेयर’ और यह क्यों है जरूरी?
जनरल अनिल चौहान ने कॉलेज ऑफ डिफेंस मैनेजमेंट (CDM) में आयोजित वार्षिक संगोष्ठी ‘मित्र’ (MITRA) के दौरान सेना के नए विजन को साझा किया. उन्होंने कहा कि भारतीय सेना को अब केवल ‘मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस’ तक नहीं रुकना चाहिए. हमें ‘ऑल रियल्म ऑल डोमेन ऑपरेशंस’ (ARADO) की तरफ कदम बढ़ाने होंगे. इंटेलिजेंट वारफेयर का मतलब है ऐसी युद्ध कला, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर क्षमता और तकनीकी श्रेष्ठता का इस्तेमाल करके दुश्मन को पस्त किया जाए. यह सैन्य मामलों में एक तीसरी बड़ी क्रांति की तरह है, जिसे ‘कन्वर्जेंस वारफेयर’ कहा जा रहा है. इसमें पुराने और नए, घातक और बिना संपर्क वाले सभी प्रकार के युद्ध क्षेत्रों का तालमेल होगा.
परमाणु हथियारों के बिना कैसे रुकेगा दुश्मन?
सीडीएस ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण बिंदु पर जोर दिया कि भारत को परमाणु हथियारों से अलग अपनी रणनीतिक ताकत बढ़ानी होगी. अक्सर बड़े युद्धों में परमाणु हथियारों का इस्तेमाल आखिरी विकल्प होता है, लेकिन उससे पहले की जो आक्रामक स्थितियां होती हैं, वहां जीत हासिल करने के लिए पारंपरिक हथियारों के साथ-साथ उन्नत तकनीक की जरूरत होती है. इस गैर-परमाणु क्षमता का विकास हमें वैश्विक स्तर पर एक ऐसी शक्ति के रूप में स्थापित करेगा, जो बिना विनाशकारी हथियारों के भी दुश्मन के मंसूबों को नाकाम कर सकती है. ‘मित्र’ संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य भी यही था कि भारतीय सेना को तकनीक-सशक्त और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार किया जाए.
कैसी होगी भारत की भविष्य की सेना?
इस संगोष्ठी में देश के कई वरिष्ठ रक्षा अधिकारी, शिक्षाविद और रणनीतिक विशेषज्ञ शामिल हुए. चर्चा का मुख्य केंद्र रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और संरचनात्मक सुधारों को बढ़ावा देना था. साल 1970 में स्थापित कॉलेज ऑफ डिफेंस मैनेजमेंट हमेशा से सैन्य नेतृत्व को आधुनिक प्रबंधन सिखाता आया है. लेकिन इस बार का संदेश बिल्कुल साफ था कि भारतीय सशस्त्र बल आने वाले समय में केवल शारीरिक ताकत के भरोसे नहीं रहेंगे. आने वाली चुनौतियां अधिक जटिल होंगी, जिनके लिए हमें अपनी समग्र राष्ट्रीय शक्ति को विकसित करना होगा. अब जीत उसी की होगी जिसकी रणनीति और तकनीक सबसे अधिक उन्नत और एकीकृत होगी.
About the Author
दीपक वर्मा (Deepak Verma) एक पत्रकार हैं जो मुख्य रूप से विज्ञान, राजनीति, भारत के आंतरिक घटनाक्रमों और समसामयिक विषयों से जुडी विस्तृत रिपोर्ट्स लिखते हैं. वह News18 हिंदी के डिजिटल न्यूजरूम में डिप्टी न्यूज़…और पढ़ें