Delhi Police exposes 16 lakh fraud in Operation Jaipur: 75 साल की बुजुर्ग महिला से ठगी, 19-20-25 साल के 3 राजस्थानी छोरे को उठाकर ले आई दिल्ली पुलिस

Share to your loved once


Last Updated:

Delhi Cyber Fraud: दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने जयपुर से संचालित हो रहे एक खतरनाक डिजिटल अरेस्ट गिरोह का भंडाफोड़ किया है. 75 साल की बुजुर्ग महिला को ‘CBI इंस्पेक्टर’ बनकर डराने और 16 लाख रुपये ठगने वाले तीन जालसाजों को पुलिस ने धर दबोचा है. इनके तार कंबोडिया के ठगों से जुड़े हैं.

ख़बरें फटाफट

19-20-25 साल के 3 राजस्थानी छोरे को जयपुर से उठाकर ले आई दिल्ली पुलिसZoom

नई दिल्ली. देश की राजधानी में साइबर अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्होंने एक 75 वर्षीय बुजुर्ग महिला को दो दिनों तक उनके ही घर में डिजिटल अरेस्ट बनाकर रखा. लेकिन दिल्ली पुलिस की साउथ-वेस्ट डिस्ट्रिक्ट साइबर सेल ने एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए इस गिरोह की कमर तोड़ दी है. यह गिरोह राजस्थान के जयपुर और कोटपूतली से संचालित हो रहा था, जिसके तार कंबोडिया में बैठे अंतरराष्ट्रीय ठगों से जुड़े हुए हैं. खास बात यह है कि इस गिरोह में 19, 20 और 25 साल का लड़का चला रहा था.

दिल्ली पुलिस को 7 दिसंबर 2025 को एक शिकायत दर्ज कराई गई. इस एफआईआर के मुताबिक एक बुजुर्ग महिला को व्हाट्सएप कॉल आया. फोन करने वाले ने खुद को सीबीआई इंस्पेक्टर बताया और महिला से कहा कि उसका बेटा एक गंभीर आपराधिक मामले में फंस गया है. डराने के लिए ठगों ने महिला को वीडियो कॉल पर लगातार निगरानी में रखा, जिसे ‘डिजिटल अरेस्ट’ कहा जाता है. मनोवैज्ञानिक दबाव और डर के चलते महिला ने ठगों द्वारा बताए गए खातों में 16 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए.

दिल्ली पुलिस का ‘ऑपरेशन जयपुर’

इस शिकायत मिलने के बाद एसीपी विजय कुमार और इंस्पेक्टर प्रवेश कौशिक के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई. पुलिस ने डिजिटल फुटप्रिंट और सिम ट्रैकिंग का सहारा लिया, जिससे पता चला कि पैसा राजस्थान के कोटपूतली और जयपुर के ‘म्यूल अकाउंट्स’ में जा रहा है.

दिल्ली पुलिस ने सबसे पहले कोटपूतली से योगेंद्र गुर्जर को पकड़ा, जो अनपढ़ लोगों को बरगलाकर उनके बैंक खाते गिरोह को मुहैया कराता था. फिर योगेंद्र की निशानदेही पर जयपुर के सांगानेर में छापेमारी की गई, जहां से मुख्य सरगना राकेश मीणा और उसके साथी छोटू लाल मीणा को गिरफ्तार किया गया.

कंबोडिया कनेक्शन कैसे काम करता था सिंडिकेट?

जांच में खुलासा हुआ कि यह गिरोह भारत में सिर्फ फर्जी खाते का इंतजाम करता था. इन खातों की जानकारी कंबोडिया में बैठे ठगों को टेलीग्राम और इंस्टाग्राम के जरिए दी जाती थी. जैसे ही ठगी की रकम खाते में आती, उसे तुरंत एटीएम या चेक के जरिए निकाल लिया जाता. निकाली गई रकम को अलग-अलग परतों में बांटकर अंतरराष्ट्रीय हैंडलर्स तक पहुंचाया जाता था.

आरोपियों के पास से 1 लाख रुपये कैश, 9 मोबाइल फोन और 10 पासबुक और चेकबुक बरामद हुई हैं. गिरफ्तार आरोपियों का में 25 साल का राकेश मीणा मुख्य मास्टरमाइंड है. 20 साल का हैंडलर छोटू लाल मीणा औऱ 19 साल योगेंद्र गुर्जर एजेंट का काम करता था. यदि आपके पास ऐसा कोई कॉल आता है तो तुरंत 1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें.

About the Author

रविशंकर सिंहचीफ रिपोर्टर

भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाले रविशंकर सिंह सहारा समय न्यूज चैनल, तहलका, पी-7 और लाइव इंडिया न्यूज चैनल के अलावा फर्स्टपोस्ट हिंदी डिजिटल साइट में भी काम कर चुके हैं. राजनीतिक खबरों के अलावा…और पढ़ें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

GET YOUR LOCAL NEWS ON NEWS SPHERE 24      TO GET PUBLISH YOUR OWN NEWS   CONTACT US ON EMAIL OR WHATSAPP