दिल्ली में गाड़ियों को मिलेगा ग्रीन टैक्स से छुटकारा? क्या है नितिन गडकरी का प्लान
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केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने दिल्ली सरकार से ग्रीन टैक्स हटाने की अपील की है. उन्होंने कहा कि यह टैक्स लोगों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डाल रहा है और सरकार को इसे बंद करना चाहिए. गडकरी ने सुझाव दिया कि दिल्ली सरकार निगम को बजट से 700 से 800 करोड़ रुपये का अनुदान दे और इस टैक्स को खत्म करे. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पुनर्विचार के लिए मंत्रालय के वकीलों को हस्तक्षेप करने के निर्देश भी दिए हैं.

नई दिल्ली. दिल्ली में लागू ग्रीन टैक्स को लेकर केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार के बीच नई बहस शुरू हो गई है. केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने दिल्ली सरकार से इस टैक्स को तुरंत हटाने की मांग की है. उनका कहना है कि यह टैक्स आम लोगों और वाहन मालिकों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डाल रहा है, जिसे कम किया जाना चाहिए. यह ग्रीन टैक्स सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद लागू किया गया था, ताकि राजधानी में बढ़ते वायु प्रदूषण पर काबू पाया जा सके.
यह टैक्स खास तौर पर कमर्शियल वाहनों और पुराने पेट्रोल वाहनों पर लागू होता है, जो दिल्ली में प्रवेश करते हैं. इसका मकसद दिल्ली में ट्रांजिट ट्रैफिक और प्रदूषण को कम करना है. ग्रीन टैक्स या एनवायरनमेंट कॉम्पनसेशन चार्ज खासतौर पर कमर्शियल वाहनों और ट्रांजिट ट्रकों पर लगाया जाता है, ताकि प्रदूषण फैलाने वाले पुराने और भारी वाहनों को दिल्ली में प्रवेश करने से रोका जा सके. बड़े ट्रकों से प्रति एंट्री 1300 रुपये और छोटे कमर्शियल वाहनों से 700 रुपये वसूले जाते हैं.
ग्रीन टैक्स हटाने का सुझाव
इंडिया टुडे के एक कार्यक्रम में बोलते हुए गडकरी ने दिल्ली के मुख्यमंत्री से ग्रीन टैक्स को तुरंत बंद करने का अनुरोध किया. उन्होंने सुझाव दिया कि दिल्ली सरकार इस राजस्व स्रोत को बंद कर दे और इसके बदले नगर निगम को हर साल 700 से 800 करोड़ रुपये का बजट समर्थन दे. उनका मानना है कि इससे लोगों पर टैक्स का बोझ कम होगा और निगम को भी फंड की कमी नहीं होगी.
सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार की तैयारी
नितिन गडकरी ने यह भी कहा कि उनके मंत्रालय ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के सामने हस्तक्षेप करने के लिए अपने वकीलों से कहा है. इसका मकसद मूल आदेश पर पुनर्विचार कराना है ताकि वाहन मालिकों पर पड़ने वाला आर्थिक दबाव कम किया जा सके.
ECC चार्ज और मौजूदा व्यवस्था
एनवायरनमेंट कंपेन्सेशन चार्ज यानी ईसीसी के तहत बड़े ट्रकों को दिल्ली में हर एंट्री पर 1300 रुपये और छोटे कमर्शियल वाहनों को 700 रुपये देने होते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने यह चार्ज उन ट्रकों को हतोत्साहित करने के लिए लागू किया था जो सिर्फ ट्रांजिट के लिए दिल्ली से गुजरते हैं और शहर में प्रदूषण बढ़ाते हैं.
टैक्स का उपयोग और निगरानी
दिल्ली नगर निगम ईसीसी चार्ज वसूलकर हर शुक्रवार दिल्ली सरकार को ट्रांसफर करता है. सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया है कि इस फंड का इस्तेमाल सड़क सुधार, खासकर साइकिल चालकों और पैदल यात्रियों के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर करने में किया जाए और कोर्ट को नियमित रूप से खर्च की जानकारी दी जाए.
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जय ठाकुर 2018 से खबरों की दुनिया से जुड़े हुए हैं. 2022 से News18Hindi में सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं और बिजनेस टीम का हिस्सा हैं. बिजनेस, विशेषकर शेयर बाजार से जुड़ी खबरों में रुचि है. इसके अलावा दे…और पढ़ें