भारत की यह कंपनी बनाएगी 2.5 लाख टन कार्बन ब्‍लैक, घटेगा आयात, बिना इसके नहीं चल सकते वाहनों के टायर

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नई दिल्‍ली. कार्बन ब्‍लैक के बारे में हो सकता है कि आप कम जानते हैं, लेकिन इसका उपयोग और जरूरत हमारी सोच से भी कहीं ज्‍यादा होती है. आप बस यह समझिए कि बिना कार्बन ब्‍लैक के आपकी कार का टायर महज 100-200 किलोमीटर चल सकता है, जबकि कार्बन ब्‍लैक मिलाकर बनाया गया टायर लाखों किलोमीटर तक जा सकता है. अभी तक देश में ज्‍यादातर कार्बन ब्‍लैक आयात किया जाता है, लेकिन अब एक भारतीय कंपनी ने सालाना 70 हजार टन कार्बन ब्‍लैक बनाने का संयंत्र स्‍थापित किया है. इससे देश की आयात पर निर्भरता में कमी आएगी.

स्पेशलिटी केमिकल्स और उन्नत कार्बन सामग्रियों में ग्‍लोबल लेवल पर प्रतिस्‍पर्धा करने वाली कंपनी हिमाद्री स्पेशलिटी केमिकल लिमिटेड (एचएससीएल) ने पश्चिम बंगाल के हुगली जिले में नया विनिर्माण संयंत्र स्‍थापित किया है. कंपनी ने शेयर बाजार को दी सूचना में बताया है कि इस संयंत्र में सालाना 70,000 मीट्रिक टन स्पेशलिटी कार्बन ब्लैक लाइन का उत्‍पादन किया जाएगा. इस ब्राउनफील्ड विस्तार के सफल संचालन के साथ हिमाद्री की कुल कार्बन ब्लैक उत्पादन क्षमता बढ़कर 2,50,000 मीट्रिक टन सालाना हो गई है. कंपनी के महिस्तिकरी संयंत्र में सालाना 1,30,000 टन कार्बन ब्लैक का उत्‍पादन होता है, जो दुनिया के सबसे बड़े संयंत्रों में शामिल है.

कंपनी का पोर्टफोलियो काफी मजबूत
यह उपलब्धि हिमाद्री की रणनीतिक विकास यात्रा में एक महत्वपूर्ण कदम है और वैश्विक विशिष्ट कार्बन ब्लैक बाजार में इसकी अग्रणी स्थिति को और मजबूत करती है. कार्बन ब्‍लैक का उपयोग प्लास्टिक, स्याही, पेंट, कोटिंग्स, टायर और अन्य विशिष्ट क्षेत्रों में किया जाता है. हिमाद्री स्पेशलिटी केमिकल लिमिटेड के सीएमडी और सीईओ अनुराग चौधरी ने बताया कि महिस्तिकरी में हमारी 70,000 एमटीपीए स्पेशलिटी कार्बन ब्लैक लाइन का विस्‍तार हमारी उत्पादन क्षमताओं को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाती है और हमें प्लास्टिक, स्याही, पेंट, कोटिंग्स और अन्य विशिष्ट उद्योगों जैसे प्रीमियम, एप्लिकेशन-विशिष्ट क्षेत्रों में बढ़ती वैश्विक मांग को पूरा करने के लिए मजबूत स्थिति में लाती है.

कार्बन ब्‍लैक का क्‍या उपयोग
कार्बन ब्‍लैक का सबसे ज्‍यादा उपयोग टायर और रबर प्रोडक्‍ट बनाने में किया जाता है, जो कुल उत्‍पादन का 70 फीसदी खपत करता है. यह रबर को मजबूत बनाता है और उसे घिसने से बचाता है. रबर को गर्म होने से बचाने के साथ उसकी लाइफ को भी बढ़ाता है. बिना कार्बन ब्‍लैक के टायर सिर्फ 100 या 200 किलोमीटर ही चल सकते हैं, जबकि इसके सहयोग से लाखों किलोमीटर की लाइफ बढ़ जाती है. इसके अलावा बेल्‍ट, सील, फुटवियर आदि बनाने में भी इसका उपयोग होता है. पेंट और लिथियम ऑयन बैटरी बनाने में भी कार्बन ब्‍लैक का इस्‍तेमाल किया जाता है.

आयात पर कम हो रही निर्भरता
भारत अभी तक कार्बन ब्‍लैक के लिए आयात पर ही निर्भर करता था. वित्‍तवर्ष 2024-25 के आंकड़े देखें तो पता चलता है कि भारत ने करीब 1.5 लाख टन कार्बन ब्‍लैक का आयात किया था, जबकि इससे पहले के वित्‍तवर्ष के मुकाबले ज्‍यादा है. सबसे ज्‍यादा आयात चीन और रूस से किया जाता है. चालू वित्‍तवर्ष के शुरुआती 5 महीनों में भारत ने चीन से करीब 22 हजार टन कार्बन ब्‍लैक का आयात किया है. हालांकि, अब देश में इसका उत्‍पादन लगातार बढ़ता जा रहा है और आने वाले समय में भारत नेट एक्‍सपोर्टर बन जाएगा.

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