PM Modi Israel Visit Update | India Israel Defense Deal | Iron Dome technology India :एम मोदी के इजरायल दौरे से ‘हेक्सागन ऑफ अलायंस’ से उठेगा पर्दा, ड‍िफेंस पर होगी बड़ी डील

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ईरान पर हमले की आशंकाओं के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज इजरायल जा रहे हैं. यह दौरान न सिर्फ भारत-इजरायल संबंधों के ल‍िहाज से ऐत‍िहास‍िक है, बल्‍क‍ि इसके रणनीत‍िक संदेश भी गहरे हैं. इस दौरे के केंद्र में इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का वह मास्टरप्लान भी है, जिसे दुनिया ‘हेक्सागन ऑफ अलायंस’ के नाम से जान रही है. आखिर क्या है यह ‘हेक्सागन ऑफ अलायंस’? नेतन्याहू इस गठबंधन से क्या हासिल करना चाहते हैं? और सबसे बड़ा सवाल, इस पूरी बिसात में भारत की भूमिका क्या होगी, यह तय होना है. इतना ही नहीं बड़ी ड‍िफेंस डील का ऐलान भी हो सकता है. न्‍यूज18इंडिया के साथ एक्‍सक्‍लूस‍िव बातचीत में इजरायल के राजदूत रुव‍िन अजार ने इसकी पुष्टि भी की है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इजरायल पहुंचने से ठीक पहले नेतन्याहू ने यह कहकर हलचल मचा दी है क‍ि यह यात्रा उन समान विचारधारा वाले देशों के बीच स्‍ट्रेटज‍िक अलायंस को आकार देगी, जो कट्टरपंथी विरोधियों का डटकर सामना करना चाहते हैं. इसी पार्टनरश‍िप को नेतन्याहू ने ‘हेक्सागन ऑफ अलायंस’ का नाम दिया है. इसमें इजरायल, भारत, ग्रीस, साइप्रस और यूएई समेत कई अफ्रीकी देश होंगे.

‘हेक्सागन ऑफ अलायंस’ मकसद क्‍या है?

  • ‘हेक्सागन ऑफ अलायंस’ का मकसद रणनीतिक खतरों से न‍िपटना है. नेतन्याहू कहते हैं क‍ि वे मिड‍िल ईस्‍ट और उसके आसपास के क्षेत्रों में एक ऐसा स्‍ट्रक्‍चर खड़ा करना चाहते हैं जो हर चुनौती का मुकाबला कर सके. कट्टर शिया और उभरते कट्टर सुन्नी धड़े को कंट्रोल कर सके. हालांक‍ि, भारत की सोच क्‍या है, यह पीएम मोदी के दौरे में साफ हो पाएगी.

इजरायली राजदूत ने समझाया ‘हेक्सागन’ का असली मतलब

  1. न्यूज18 इंडिया से एक्‍सक्‍लूस‍िव बातचीत में भारत में इजरायल के राजदूत रूविन अजार ने Hexagon of alliances के असल मायने बताए. जब उनसे पूछा गया क‍ि इजरायल इसमें भारत और अन्य देशों को क्यों शामिल करना चाहता है, तो उस पर रुविन अजार ने बेहद सधी हुई प्रतिक्रिया दी.
  2. इजरायली राजदूत ने कहा, कुछ देश बहुत एक्‍ट‍िव हैं और निजी क्षेत्र को लगातार बढ़ावा दे रहे हैं. ये देश अपने डिफेंस का मजबूती से निर्माण कर रहे हैं और एक समृद्ध भविष्य के लिए एक साथ मिलकर काम कर रहे हैं. सबसे अहम बात यह है कि ये देश अलगाववाद और आतंकवाद को पूरी तरह से खारिज करते हैं.
  3. अजार ने कहा- भारत, यूएई, ग्रीस, इजरायल और अफ्रीका तथा मध्य एशिया के देश आज स्थिर हैं. वे पूरी तरह से अपनी समृद्धि पर फोकस कर रहे हैं और सुरक्षित हैं. इसलिए हम लोग एक-दूसरे के लिए आदर्श साझेदार हैं.
  4. राजदूत अजार का यह बयान इस बात की पुष्टि करता है कि ‘हेक्सागन ऑफ अलायंस’ का आधार केवल सैन्य नहीं, बल्कि साझा आर्थिक विकास, निजी क्षेत्र की भागीदारी और आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर टिका है.

राह इतनी आसान नहीं

‘हेक्सागन ऑफ अलायंस’ का विचार रणनीतिक रूप से बेहद मजबूत नजर आता है, लेकिन जमीनी हकीकत में इसके सामने कई बड़ी कूटनीतिक अड़चनें मौजूद हैं. अब तक किसी भी देश की सरकार ने इस गठबंधन या उसके संदर्भ का आधिकारिक तौर पर समर्थन नहीं किया है. सबसे बड़ी पेचीदगी उन देशों को लेकर है, जिन्हें इजरायल इस गठबंधन का हिस्सा बनाना चाहता है. रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित ढांचे में शामिल ग्रीस और साइप्रस इंटरनेशनल क्र‍िमिनल ट्र‍िब्‍यूनल (ICC) के सदस्य हैं. इसी अदालत ने गाजा युद्ध में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर इजरायली पीएम नेतन्याहू के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर रखा है. ऐसे में क्‍या वे साथ आएंगे?

‘अल जजीरा’ की रिपोर्ट के मुताबिक, आईसीसी का वारंट होने के कारण एक अजीबोगरीब कूटनीतिक संकट पैदा हो गया है. यदि नेतन्याहू भविष्य में ग्रीस या साइप्रस जैसे आईसीसी सदस्य देशों की यात्रा करते हैं, तो उन्हें कानूनी रूप से हिरासत में लिया जा सकता है.ऐसे में ‘हेक्सागन ऑफ अलायंस’ नाटो जैसा बनाना आसान नहीं होगा.

फिर भी, रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस अनिश्चितता के बावजूद, पीएम मोदी की इज़राइल यात्रा को इस प्रस्तावित ढांचे को साकार करने की दिशा में एक बहुत बड़ा और संभावित कूटनीतिक कदम माना जा रहा है.

34 साल का इतिहास

  • मध्य एशिया में अनिश्चितता के बीच पीएम मोदी का यह इजराइल दौरा अपने आप में ऐतिहासिक है. 7 अक्टूबर, 2023 की घटना के बाद मिड‍िल ईस्‍ट में जो तनाव पसरा है, उसके बाद पीएम मोदी पहली बार जा रहे हैं. लेकिन इससे भी बड़ी बात यह है कि कूटनीतिक संबंधों के 34 साल के इतिहास में नरेंद्र मोदी भारत के एकमात्र ऐसे प्रधानमंत्री हैं जो एक बार नहीं, बल्कि दूसरी बार इज़राइल के दौरे पर जा रहे हैं.
  • साल 2014 में सत्ता में आने के बाद से पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत की पश्चिम एशिया नीति में एक ‘पैराडाइम शिफ्ट’ देखने को मिला है. आज भारत और इजरायल के मजबूत होते संबंधों के बीच फिलिस्तीन का मुद्दा आड़े नहीं आता. कूटनीतिक भाषा में इसे ‘डी-हाइफ़नेशन’ नीति कहा जाता है. यानी इजरायल और फिलिस्तीन के साथ भारत के संबंधों को अलग-अलग चश्मे से देखना और दोनों को एक-दूसरे से न जोड़ना.
  • इस डी-हाइफ़नेशन का पूरा श्रेय प्रधानमंत्री मोदी की दूरदर्शी विदेश नीति को जाता है. यही कारण है कि पीएम मोदी के इस दौरे को लेकर इजरायल में जबरदस्त उत्साह का माहौल है. इजरायल सरकार इस दौरे को कितना महत्व दे रही है, इसका अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पीएम मोदी अपनी इस दूसरी यात्रा के दौरान इजरायली संसद नेसेट को भी संबोधित करेंगे.
  • यह ध्यान रखना भी बेहद महत्वपूर्ण है कि हमास हमले के बाद वैश्विक कूटनीति में ‘ग्लोबल साउथ’ का नेतृत्व कर रहे देशों में पीएम मोदी सबसे बड़े और कद्दावर नेता हैं, जो इजरायल की धरती पर कदम रखेंगे. भारत में इजरायल के राजदूत रूविन अजार और इजरायल में भारत के राजदूत जेपी सिंह ने भी वैश्विक स्तर पर पीएम मोदी की इस अहमियत और उनके नेतृत्व क्षमता को खुले तौर पर सराहा है.
आयरन डोम- ज‍िससे ईरान के हमलों से इजरायल ने खुद को ड‍िफेंड क‍िया था. अब भारत भी इसे खरीद रहा है.

रक्षा, सुरक्षा पर बड़ी साझेदारी की तैयारी

  1. पीएम मोदी के इस दौरे में सिर्फ ‘हेक्सागन ऑफ अलायंस’ जैसी कूटनीतिक चर्चाएं ही नहीं होंगी, बल्कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को जमीनी स्तर पर विस्तार देने और मजबूत करने पर सबसे ज्यादा जोर रहेगा.
  2. इस यात्रा के दौरान कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर होने की पूरी उम्मीद है. इसके साथ ही, पीएम मोदी इजरायल में रह रहे भारतीय समुदाय के लोगों से भी गर्मजोशी से मुलाकात करेंगे, जो दोनों देशों के बीच मजबूत सांस्कृतिक सेतु का काम करते हैं.
  3. लेकिन इस दौरे का जो सबसे बड़ा ‘टेकअवे’ माना जा रहा है, वह है रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व सहयोग. भारत और इजरायल के बीच रक्षा सहयोग पिछले कुछ वर्षों में लगातार और तेजी से बढ़ रहा है. दोनों ही देश अपने-अपने पड़ोस में आतंकवाद और सीमा सुरक्षा जैसी समान चुनौतियों का डटकर सामना कर रहे हैं.
  4. इजरायल के उच्चाधिकारियों की तरफ से पहले ही स्पष्ट किया जा चुका है कि इस दौरे के दौरान कई अहम रक्षा परियोजनाओं पर बात होगी. विशेष रूप से भारत में रक्षा उपकरणों के निर्माण, ज्‍वाइंट ड‍िफेंस इनोवेशन और इजरायल का एयर ड‍िफेंस स‍िस्‍टम ‘आयरन डोम’ जैसे हाइटेक सिस्टम्स में साझेदारी पर खास ध्यान केंद्रित किया जाएगा.

भारत और इजरायल के बीच बड़ी डील होगी

न्यूज 18 से एक्सक्लूसिव बातचीत में इजरायल के राजदूत रूविन अजार ने इस बात की पुष्टि की है क‍ि भारत और इजरायल के बीच बड़ी डील होने जा रही है. उन्होंने स्पष्ट किया कि रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र में यह सहयोग केवल इजरायल के लिए ही फायदेमंद नहीं है, बल्कि इससे भारत सरकार की महत्वाकांक्षी ‘मेक इन इंडिया’ और ‘मेड इन इंडिया’ को भी जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा. इजरायली तकनीक और भारत की निर्माण क्षमता मिलकर रक्षा क्षेत्र में एक नई क्रांति ला सकते हैं.

प्रधानमंत्री की इजरायल यात्रा का पूरा कार्यक्रम

25 फरवरी

09:00 AM – तेल अवीव के लिए प्रस्थान (AFS पालम)

04:15 PM – बेन गुरियन अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे, तेल अवीव पर आगमन

04:40–05:15 PM – बेंजामिन नेतन्याहू के साथ द्विपक्षीय वार्ता

05:55–06:10 PM – होटल किंग डेविड में आगमन

08:00–09:30 PM – नेसेट (Knesset – इज़राइली संसद) में संबोधन

09:55–10:25 PM – इजरायल की तकनीकी व नवाचार प्रदर्शनी का अवलोकन

11:20 PM – 12:30 AM – निजी रात्रिभोज

26 फरवरी

12:15–01:00 PM – याद वाशेम (Yad Vashem) का भ्रमण

01:00–02:10 PM – इसहाक हर्ज़ोग के साथ मुलाक़ात

02:40–03:20 PM – प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता (प्रधानमंत्री नेतन्याहू के साथ)

03:25–03:55 PM – MoU का आदान-प्रदान और प्रेस वक्तव्य (स्थान: होटल किंग डेविड)

04:00–04:10 PM – भारतीय-यहूदी समुदाय के प्रमुख सदस्यों से मुलाक़ात

05:50 PM – दिल्ली के लिए प्रस्थान

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