महिला शिक्षिका को जान से मारने और बलात्कार की धमकी… फिर कटघरे में शिक्षा विभाग, बहस तेज
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Barmer News : बाड़मेर में शिक्षा विभाग पर नूतनपुरी गोस्वामी की धमकी और एक प्रिंसिपल पर कुकर्म के आरोप से सवाल उठे हैं. कार्रवाई में देरी और तबादले पर नाराजगी बढ़ी है. पहला मामला शिक्षक नूतनपुरी गोस्वामी से जुड़ा है. आरोप है कि उन्होंने एक महिला शिक्षिका को जान से मारने और बलात्कार की धमकी दी.

बाड़मेर. जिले में शिक्षा विभाग एक बार फिर सवालों के घेरे में है. दो अलग अलग मामलों ने विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. एक तरफ महिला शिक्षिका को जान से मारने और बलात्कार की धमकी देने का मामला सामने आया. दूसरी ओर एक प्रिंसिपल पर बच्चों के साथ कुकर्म के आरोप की चर्चा ने माहौल गरमा दिया.
पहला मामला शिक्षक नूतनपुरी गोस्वामी से जुड़ा है. आरोप है कि उन्होंने एक महिला शिक्षिका को जान से मारने और बलात्कार की धमकी दी. बताया जा रहा है कि PEEO ग्रुप में महिला शिक्षिकाओं के खिलाफ धमकी भरे मैसेज डाले गए थे. हैरानी की बात यह रही कि ग्रुप में मैसेज आने के बाद भी इसे गंभीरता से नहीं लिया गया.
इसके बाद महिला शिक्षिकाओं ने बाड़मेर जिला कलेक्टर और एसपी से मिलकर कार्रवाई की गुहार लगाई. मामला बढ़ने और प्रशासन की फटकार के बाद शिक्षा विभाग हरकत में आया. जिला शिक्षा अधिकारी कृष्ण सिंह महेचा ने नूतनपुरी गोस्वामी को निलंबित कर दिया. निलंबन के बाद उन्हें सेड़वा मुख्यालय कर दिया गया. अब बड़ा सवाल यह है कि जब PEEO ग्रुप में खुलेआम धमकी भरे मैसेज आए तो जिम्मेदार अधिकारियों ने उसे नजरअंदाज क्यों किया. अगर समय रहते कार्रवाई होती तो मामला इतना न बढ़ता. महिला शिक्षिकाओं में इसको लेकर नाराजगी भी बताई जा रही है.
प्रिंसिपल पर कुकर्म के आरोप की चर्चा
दूसरा मामला और भी गंभीर बताया जा रहा है. एक प्रिंसिपल पर बच्चों के साथ कुकर्म के आरोप की बात सामने आई. हालांकि इस तरह की कोई शिकायत आधिकारिक तौर पर दर्ज नहीं हुई. बताया जा रहा है कि बच्चों ने अपने परिजनों को शिकायत की थी, लेकिन लोकलाज के चलते पुलिस में मामला दर्ज नहीं कराया गया. इसी बीच एक भाजपा नेता के दखल के बाद शिक्षा विभाग ने प्रिंसिपल को हटा दिया. उन्हें हटाकर DEO माध्यमिक बोर्ड ड्यूटी में लगा दिया गया. इस पूरे मामले पर DEO माध्यमिक का कहना है कि उनके पास ऐसी कोई लिखित शिकायत नहीं आई है. उनका बयान है कि सोशल मीडिया पर पोस्ट जरूर वायरल हो रही हैं, लेकिन विभाग के पास आधिकारिक शिकायत नहीं है. जानकारी के मुताबिक 17 जनवरी को विभाग ने उन्हें DEO कार्यालय में लगा दिया था.
उठते सवाल, जवाब का इंतजार
दोनों मामलों ने शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं. पहले मामले में धमकी के बावजूद देरी से कार्रवाई और दूसरे मामले में बिना लिखित शिकायत के तबादला. लोग पूछ रहे हैं कि आखिर विभाग कब सुधरेगा. फिलहाल इन घटनाओं को लेकर चर्चा तेज है और लोग साफ जवाब चाहते हैं.
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नाम है आनंद पाण्डेय. सिद्धार्थनगर की मिट्टी में पले-बढ़े. पढ़ाई-लिखाई की नींव जवाहर नवोदय विद्यालय में रखी, फिर लखनऊ में आकर हिंदी और पॉलीटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया. लेकिन ज्ञान की भूख यहीं शांत नहीं हुई. कल…और पढ़ें