जयललिता की खास रहीं शशिकला ने बनाई नई पार्टी, चुनाव से पहले ऐलान, क्या चलेगा दांव?

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चेन्नई/रामनाथपुरम. तमिलनाडु की राजनीति में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले खेला हो गया. पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता की सबसे करीबी और कभी राज्य की सत्ता का रिमोट कंट्रोल कहलाने वाली वीके शशिकला ने अपनी नई राजनीतिक पार्टी का ऐलान कर दिया है. लंबे समय तक शांत रहने के बाद, शशिकला ने जयललिता की 78वीं जयंती के मौके पर रामनाथपुरम में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए इस नई ‘द्रविड़ियन पार्टी’ की घोषणा की. ‘चिन्नम्मा’ के नाम से मशहूर शशिकला का यह कदम AIADMK के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती माना जा रहा है.

अपने समर्थकों के बीच पार्टी का ऐलान करते हुए शश‍िकला ने कहा, हम जयलल‍िता के सपनों को पूरा करेंगे. उन्‍होंने मंच से ही अपनी नई पार्टी का झंडा लॉन्च किया. इस झंडे में मुख्य रूप से तीन रंग हैं, काला, सफेद और लाल. झंडे के बीच में द्रविड़ राजनीति के तीन सबसे बड़े दिग्गजों पेरियार अन्ना, एमजी रामचंद्रन और जयललिता की तस्वीरें छपी हैं.

पार्टी का नाम क्‍या होगा
शशिकला ने अभी पार्टी के नाम का खुलासा नहीं किया है, लेकिन उन्होंने साफ कर दिया है कि वह जल्द ही नाम की घोषणा करेंगी और अब उनके फैसले में कोई बदलाव नहीं होगा.

क्या बताया एजेंडा
शशिकला ने भारी भीड़ के सामने कहा, अगर मैं पिछले 9 सालों की तरह अब भी चुप रही, तो यह तमिलनाडु की जनता के साथ धोखा होगा. हमारी पार्टी गरीबों और आम लोगों के लिए काम करेगी. हम दुश्मनों और गद्दारों को जड़ से उखाड़ फेंकेंगे.

‘मैंने जिसे CM बनाया, उसी ने पीठ में खंजर घोंपा’
शशिकला के निशाने पर सबसे ज्यादा उनकी पुरानी पार्टी AIADMK और उसके वर्तमान महासचिव ई.के. पलानीस्वामी रहे. उन्होंने बिना नाम लिए पलानीस्वामी पर गद्दारी के बेहद गंभीर आरोप लगाए. शशिकला ने कहा, हमने जल्दबाजी में उसे (पलानीस्वामी) मुख्यमंत्री चुना था. मैं उसका नाम तक अपनी जुबान पर नहीं लाना चाहती. अगर वह अच्छा इंसान होता, तो मैं नाम लेती. मैंने ही उसे मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बिठाया था, लेकिन मुझे क्या पता था कि वह ऐसा निकलेगा? जिस इंसान को मैंने सीएम बनाया, उसी ने मुझे पार्टी से निकालने का प्रस्ताव पास कर दिया.

जेल और पैरोल की साजिश
आय से अधिक संपत्ति मामले में जेल की सजा काट चुकीं शशिकला ने आरोप लगाया कि जब वे जेल में थीं, तब पलानीस्वामी के इशारे पर ही उन्हें परेशान किया गया. मुझे जेल अधिकारियों ने 15 दिन की पैरोल दी थी, लेकिन चेन्नई कमिश्नर ने जेल एसपी को फोन करके सीएम का आदेश सुनाया कि मुझे 5 दिन से ज्यादा पैरोल न दी जाए. यहां तक कि जब मेरे पति का निधन हुआ, तब भी 15 दिन की मंजूरी को घटाकर 10 दिन कर दिया गया. उन लोगों ने हमारे आगे और पीछे, हर तरफ से भाले की तरह खंजर घोंपे हैं.

AIADMK की लगातार 10 हार पर कसा तंज
शशिकला, जो कभी AIADMK की कार्यवाहक महासचिव हुआ करती थीं, उन्होंने पलानीस्वामी के नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि मौजूदा लीडरशिप में पार्टी पूरी तरह से पतन की ओर जा रही है.
उन्होंने तंज कसते हुए कहा, अब तक AIADMK को 10 बार हार का सामना करना पड़ा है. वे एक भी चुनाव नहीं जीत पाए हैं और बतौर विपक्ष उनका कामकाज बेहद घटिया रहा है. अपनी स्थिति की तुलना पार्टी संस्थापक एमजीआर से करते हुए शशिकला ने याद दिलाया कि कैसे एम. करुणानिधि को सीएम बनाने में मदद करने के बाद एमजीआर को ही डीएमके से निकाल दिया गया था.

2016 की वह रात… जब जयललिता का निधन हुआ
अपने संबोधन में शशिकला ने 2016 की उन घटनाओं का भी जिक्र किया, जब अपोलो अस्पताल में जयललिता का निधन हुआ था. उन्होंने दावा किया कि उस रात क्या हुआ था.

“जयललिता के निधन वाली रात सभी मंत्री और विधायक मेरे पास आए थे. उन सभी ने अस्पताल के अंदर ही मुझसे कहा, ‘चिन्नम्मा, आपको मुख्यमंत्री बनना चाहिए.’ लेकिन मैंने साफ मना कर दिया. मैंने उनसे कहा कि मेरी बहन (जयललिता) इस हालत में है, मैं अभी सीएम का पद नहीं संभाल सकती. हमारी परंपराओं के अनुसार मुझे घर पर उनके अंतिम संस्कार के काम पूरे करने हैं. मैंने ही पन्नीरसेल्वम को पहले की तरह सीएम बने रहने को कहा था.

क्या चलेगा शशिकला का दांव?
तमिलनाडु में अगले कुछ महीनों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. शशिकला की यह नई एंट्री राज्य की राजनीति में एक दिलचस्प मल्टी-कॉर्नर फाइट तय कर रही है. शशिकला को अब एक साथ कई मोर्चों पर लड़ना होगा. मुख्यमंत्री एमके स्टालिन अपने मजबूत ‘द्रविड़ियन मॉडल 2.0’ के साथ मैदान में हैं. शशिकला को सीधे तौर पर पलानीस्वामी की AIADMK से टकराना होगा, जो हाल ही में बीजेपी के साथ फिर से गठबंधन में आई है. इसके अलावा तमिल सिनेमा के सुपरस्टार विजय ने भी अपनी पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) बनाकर युवाओं के बीच जबरदस्त पैठ बना ली है. शशिकला का असली मकसद एआईएडीएमके के उस पारंपरिक वोट बैंक और ‘अम्मा’ के वफादार कैडर को वापस अपने पाले में लाना है, जो पलानीस्वामी की लगातार हार से निराश है.

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