West Bengal SIR: पश्चिम बंगाल वोटर लिस्ट में 50 लाख दस्तावेजों की जांच शुरू
Last Updated:
Bengal SIR: पश्चिम बंगाल में SIR के तहत 50 लाख मतदाताओं के दस्तावेजों की न्यायिक कमेटी द्वारा जांच शुरू कर दी गई है. इस सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर इस काम में जुटे न्यायिक अधिकारियों ने विशेष सुरक्षा की मांग की है.

कोलकाता के एक एसआईआर केंद्र की तस्वीर. फोटो- पीटीआई
Bengal SIR: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) के तहत तार्किक असंगति श्रेणी में चिह्नित लगभग 50 लाख मतदाताओं के दस्तावेजों की न्यायिक जांच की प्रक्रिया सोमवार को शुरू हो गई. सुप्रीम कोर्ट के पिछले सप्ताह दिए निर्देशों के अनुसार यह प्रक्रिया चल रही है. हालांकि, भारत-बांग्लादेश सीमा से सटे चार जिलों- मालदा, मुर्शिदाबाद, उत्तर 24 परगना और दक्षिण 24 परगना के न्यायिक अधिकारियों ने सुरक्षा उल्लंघनों का सामना करने के बाद विशेष सुरक्षा की मांग की है.
मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO), पश्चिम बंगाल के कार्यालय के सूत्रों के अनुसार चुनाव आयोग ने इन न्यायिक अधिकारियों की चिंताओं पर गंभीरता से ध्यान दिया है और राज्य पुलिस प्रशासन को उनके लिए पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं. ये चारों जिले बांग्लादेश से अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करते हैं, जबकि दक्षिण 24 परगना में अधिकांश हिस्सा तटीय सीमा वाला है. तार्किक असंगति श्रेणी में चिह्नित कुल 50 लाख मतदाताओं के दस्तावेजों में से सबसे अधिक संख्या मुर्शिदाबाद जिले में है, हालांकि आयोग ने अभी सटीक आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया है. न्यायिक अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि प्रत्येक मामले में दस्तावेजों को स्वीकार या अस्वीकार करने का स्पष्ट कारण दर्ज करें. साथ ही, वे कलकत्ता हाईकोर्ट को प्रक्रिया की दैनिक प्रगति रिपोर्ट सौंपेंगे.
अंतिम मतदाता सूची 28 फरवरी को प्रकाशित की जानी है
वर्तमान कार्यक्रम के अनुसार पश्चिम बंगाल की अंतिम मतदाता सूची 28 फरवरी को प्रकाशित की जानी है, लेकिन न्यायिक जांच के लिए भेजे गए मामलों को इसमें शामिल नहीं किया जाएगा. इन मामलों की जांच पूरी होने के बाद योग्य मतदाताओं को शामिल करते हुए पूरक मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी. अधिकारियों ने बताया कि मुख्य चिंता यह है कि क्या इतनी बड़ी संख्या में दस्तावेजों की जांच 28 फरवरी की समय सीमा से पहले पूरी हो पाएगी. सुप्रीम कोर्ट ने पिछले सप्ताह असंगतियों वाले मतदाताओं के पहचान दस्तावेजों की जांच में न्यायिक निगरानी अनिवार्य की थी, जिसके बाद कलकत्ता हाईकोर्ट इस प्रक्रिया की सक्रिय निगरानी कर रहा है.
यह प्रक्रिया पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची को शुद्ध और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से चल रही है. SIR अभियान के दौरान तार्किक असंगति में मुख्य रूप से ऐसे मामले शामिल हैं जहां वंशावली मैपिंग में असंगतियां पाई गईं, जैसे माता-पिता के नाम में गड़बड़ी, उम्र का अंतर 15 वर्ष से कम या 50 वर्ष से अधिक होना आदि. सुप्रीम कोर्ट ने भरोसे में कमी का हवाला देते हुए असाधारण परिस्थितियों में न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति का फैसला किया था, ताकि दस्तावेजों की सत्यता की निष्पक्ष जांच हो सके.
About the Author
न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स…और पढ़ें