20 फीट से अचानक गिर गया था सीएम का हेलिकॉप्टर, 2012 में बच गए थे अर्जुन मुंडा, तब हुआ था चमत्कार पर इस बार नहीं बच पाईं जिंदगियां
रांची. दो अलग घटनाएं और दो अलग नतीजे. एक में चमत्कार था तो दूसरे में मातम. पहले बात चतरा की घटना की करते हैं. 23 फरवरी को झारखंड के चतरा जिले के सिमरिया प्रखंड के कासीयातु गांव के घने जंगल में जो मंजर दिखा, उसने पूरे राज्य को झकझोर दिया. रांची से दिल्ली जा रही एक एयर एम्बुलेंस अचानक क्रैश हो गई. विमान में सवार मरीज सहित सात लोगों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई. जैसे ही हादसे की खबर फैली, जिला प्रशासन हरकत में आ गया. उपायुक्त और वरीय अधिकारी रात भर घटनास्थल पर डटे रहे. राहत और बचाव दल जब जंगल के भीतर पहुंचे तो विमान का मलबा दूर दूर तक बिखरा था. डॉक्टरों ने जांच के बाद सभी सात लोगों को मृत घोषित कर दिया. शवों को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल चतरा भेजा गया. स्थानीय लोगों के मुताबिक चतरा में इस तरह का विमान हादसा पहली बार हुआ है. गांव में सन्नाटा पसरा है और हर कोई यही पूछ रहा है कि आखिर यह हादसा कैसे हुआ? इसके साथ ही चर्चा 2012 की घटना की भी होने लगी है जब तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा का हेलीकॉप्टर हादसे का शिकार हो गया था.
अधूरा रह गया सफर
2012 की घटना फिर चर्चा में
9 मई 2012 को झारखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा भी हैलिकॉप्टर लैंडिंग के दौरान एक हादसे में बाल-बाल बच गए थे.
अगुस्ता हेलिकॉप्टर और वह क्षण
दो हादसों की अलग तस्वीर
2012 का हादसा डरावना जरूर था, लेकिन उसका अंत राहत भरा था. वहीं चतरा की यह घटना पूरी तरह त्रासदी में बदल गई. एक ओर जहां पहले हादसे में जिंदगी जीत गई थी, वहीं इस बार सात परिवारों की दुनिया उजड़ गई. इन दोनों घटनाओं ने झारखंड में हवाई सुरक्षा को लेकर बहस फिर तेज कर दी है. छोटे विमानों और हेलिकॉप्टर संचालन में सुरक्षा मानकों की समीक्षा की जरूरत महसूस की जा रही है.
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सुरक्षा पर बड़ा सवाल
जानकार मानते हैं कि एयर एम्बुलेंस संचालन बेहद संवेदनशील होता है. मौसम की सटीक जानकारी, तकनीकी जांच और पायलट की तैयारी बेहद अहम होती है. जरा सी चूक भी बड़ी दुर्घटना में बदल सकती है. चतरा का यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि चेतावनी भी है. 2012 में किस्मत ने साथ दिया था. लेकिन इस बार किस्मत साथ नहीं थी. सात जिंदगियां चली गईं और पीछे रह गया है दर्द, सवाल और जवाब का इंतजार.