झांसी के बच्चों के सपनों को मिल रही है नई उड़ान, विपिन बिहारी इंटर कॉलेज में क्रिकेट कोचिंग कैंप हुआ शुरू
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विपिन बिहारी इंटर कॉलेज का मैदान इन दिनों क्रिकेट प्रेमियों के लिए एक विशेष स्थल बन चुका है, जहां बच्चे अपनी मेहनत और जोश के साथ क्रिकेट की बारीकियां सीख रहे हैं. यहां का प्राइवेट क्रिकेट कोचिंग कैंप झांसी और आसपास के गांवों से बच्चों को आकर्षित कर रहा है. कोचिंग कैंप में हर बच्चा अपनी क्षमता को निखारने और भारत की टीम में खेलने का सपना देख रहा है. कठिन अभ्यास, सही मार्गदर्शन और साथी खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन बच्चों को अपनी सीमाओं को पार करने के लिए प्रेरित करता है.
झांसी के बीचों बीच स्थित विपिन बिहारी इंटर कॉलेज इन दिनों खेल प्रेमियों के लिए खास जगह बन गया है. इस कॉलेज के बड़े मैदान में प्राइवेट क्रिकेट कोचिंग कैंप चल रहा है. सुबह सूरज निकलते ही मैदान में बैट और बाल की आवाज गूंजने लगती है. सफेद ड्रेस पहने छोटे छोटे खिलाड़ी बैट और बॉल लेकर अभ्यास के लिए पहुंचते हैं. हर तरफ जोश और बड़ा खिलाड़ी बनने का सपना दिखाई देता है. हर बच्चा चाहता है कि वह अच्छा खेले और अपने माता पिता का नाम रोशन करे.
इस कैंप में झांसी ही नहीं बल्कि आसपास के गांव और कस्बों से भी बच्चे आ रहे हैं. कुछ बच्चे बहुत दूर से बस और साइकिल से रोज पहुंचते हैं. बच्चे चेहरे पर थकान कम और उत्साह ज्यादा होता है. कोच सबसे पहले खिलाड़ियों को वार्मअप कराते हैं. फिर दौड़ लगवाई जाती है, इसके बाद बैटिंग बॉलिंग और फील्डिंग का अभ्यास होता है. कोच हर बच्चे को अलग अलग समझाते हैं कि सही तरह से बैट कैसे पकड़ना है गेंद कैसे फेंकनी है और कैच कैसे लेना है. बच्चे ध्यान से सुनते हैं और बार बार कोशिश करते हैं.
इस अकादमी की खास बात यह है कि यहां हर बच्चे को मौका मिलता है. चाहे वह नया हो या पहले से खेल रहा हो. कोच कहते हैं कि मेहनत ही असली रास्ता है इसलिए रोज पसीना बहाना जरूरी है. बच्चे नेट में घंटों तक अभ्यास करते हैं. कुछ बच्चे तेज गेंदबाजी सीख रहे हैं, तो कुछ अच्छे शॉट लगाना सीख रहे हैं. जब कोई बच्चा अच्छा खेलता है तो बाकी बच्चे ताली बजाकर उसका हौसला बढ़ाते हैं. इससे मैदान में एक परिवार जैसा माहौल बन जाता है.
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कई बच्चों का सपना है कि वे एक दिन भारत की टीम के लिए खेलें. टीवी पर मैच देखते हैं और अपने पसंदीदा खिलाड़ियों जैसा बनना चाहते हैं. कोच खिलाड़ियों को बताते हैं कि बड़े खिलाड़ी भी कभी छोटे थे. बड़े खिलाड़ियों ने भी ऐसे ही मैदान से शुरुआत की थी. यह बात सुनकर बच्चों का भरोसा और बढ़ जाता है. बच्चे गिरते हैं फिर उठते हैं और फिर से कोशिश करते हैं. धीरे धीरे उनके खेल में सुधार दिखने लगता है. माता पिता भी शाम को आकर अपने बच्चों को खेलते देखते हैं और गर्व महसूस करते हैं.
विपिन बिहारी इंटर कॉलेज का यह मैदान अब केवल पढ़ाई की जगह नहीं रहा. बल्कि खिलाड़ियों के लिए सपनों का मैदान बन गया है. यहां हर दिन बच्चे सीख रहे हैं कि खेल केवल जीत हार नहीं बल्कि मेहनत और हिम्मत का नाम है. अगर इसी तरह अभ्यास चलता रहा तो आने वाले समय में यहीं से कई अच्छे खिलाड़ी निकल सकते हैं. जो देश का नाम ऊंचा करेंगे.झांसी के लोग भी चाहते हैं कि उनके शहर से क्रिकेट का नया सितारा निकले और यह कोचिंग कैंप उसी दिशा में एक मजबूत कदम बन रहा है.