POJK संकल्प दिवस: भारत की अखंडता पर अटूट विश्वास की घोषणा; सीमाएं अटल हैं | – News in Hindi

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22 फरवरी भारत के इतिहास में एक अटूट संकल्प की तिथि है, जिसे POJK संकल्प दिवस के रूप में मनाया जाता है. वर्ष 1994 में इसी दिन भारतीय संसद ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया, जिसमें स्पष्ट रूप से घोषणा की गई कि जम्मू-कश्मीर भारत का अविभाज्य अंग है, रहा है और रहेगा. पाकिस्तान द्वारा अवैध रूप से कब्जा किए गए क्षेत्रों को तत्काल खाली करने की मांग की गई तथा किसी भी अलगाववादी या पृथकतावादी प्रयास का सभी आवश्यक साधनों से विरोध करने की दृढ़ प्रतिबद्धता जताई गई. यह संकल्प केवल एक राजनीतिक दस्तावेज नहीं, बल्कि राष्ट्र की एकता, प्रभुसत्ता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा का जीवंत प्रतीक है. यह दिन हमें याद दिलाता है कि भारत की सीमाएँ अटल हैं और कोई भी बाहरी शक्ति उन्हें तोड़ नहीं सकती.

1947 का आक्रमण और अधिमिलन की पृष्ठभूमि

1947 में जम्मू-कश्मीर रियासत के भारत में अधिमिलन के तुरंत बाद पाकिस्तानी सेना ने अक्टूबर माह में बड़े पैमाने पर सशस्त्र आक्रमण किया. महाराजा हरि सिंह ने 26 अक्टूबर को भारत के साथ अधिमिलन पत्र पर हस्ताक्षर किए, जिसके बाद भारतीय सेना ने श्रीनगर घाटी सहित महत्वपूर्ण क्षेत्रों को मुक्त कराया. लेकिन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के युद्धविराम प्रस्ताव के कारण भारतीय सेना की आगे की कार्रवाई रुक गई. परिणामस्वरूप, जम्मू संभाग के मीरपुर और पुंछ, कश्मीर संभाग के मुजफ्फराबाद तथा गिलगित-बाल्टिस्तान जैसे विशाल क्षेत्र पाकिस्तान के अवैध कब्जे में चले गए. यह कब्जा आज तक जारी है और यह भारत की क्षेत्रीय अखंडता पर सबसे बड़ा घाव बना हुआ है.

अधिक्रांत क्षेत्रों की वर्तमान वर्गीकरण और भौगोलिक स्थिति

आज इन अवैध कब्जे वाले क्षेत्रों को आधिकारिक रूप से तीन प्रमुख भागों में वर्गीकृत किया जाता है:

1. पाकिस्तान अधिक्रांत जम्मू-कश्मीर (POJK) – मुख्यतः मीरपुर और मुजफ्फराबाद क्षेत्र, कुल क्षेत्रफल लगभग 13,297 वर्ग किमी.

2. पाकिस्तान अधिक्रांत लद्दाख (POTL) – गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र, लगभग 67,791 वर्ग किमी.

3. चीन अधिक्रांत लद्दाख (COTL) – अक्साईचिन, शक्सगाम घाटी और अन्य हिस्से, कुल 42,735 वर्ग किमी.

जम्मू-कश्मीर रियासत के मूल क्षेत्रफल 2,22,236 वर्ग किमी में से लगभग 54.4 प्रतिशत (1,21,000 वर्ग किमी) भूमि आज भी पाकिस्तान और चीन के अवैध नियंत्रण में है.

31 अक्टूबर 2019 को भारत सरकार द्वारा जारी नए आधिकारिक मानचित्र में इन क्षेत्रों को स्पष्ट रूप से भारत का अभिन्न अंग दिखाया गया, जो पहले की अस्पष्ट रेखाओं से एक क्रांतिकारी बदलाव था. अब केंद्र सरकार आधिकारिक तौर पर ‘पाकिस्तान अधिक्रांत जम्मू-कश्मीर’ (POJK) शब्दावली का प्रयोग करती है, जो क्षेत्रीय पहचान को मजबूत करती है.

1947-48 के नरसंहार: हिंदू-सिख समुदाय पर अत्याचार

आक्रमण के दौरान POJK क्षेत्रों में हिंदू और सिख समुदाय पर अभूतपूर्व अत्याचार हुए. मुजफ्फराबाद नरसंहार में हजारों निर्दोषों की हत्या की गई और 1,600 से अधिक महिलाओं-लड़कियों का अपहरण हुआ. मीरपुर में 20,000 से अधिक हिंदू-सिख मारे गए तथा हजारों महिलाओं को पाकिस्तान, अफगानिस्तान और अरब बाजारों में बेच दिया गया. बारामूला, कोटली, राजौरी, भिंबर और अलीबेग गुरुद्वारा कैंप में भी क्रूर नरसंहार हुए. राजौरी में दीवाली के दिन महिलाओं और बच्चों ने जौहर जैसा बलिदान दिया ताकि दुश्मनों के हाथ न पड़ें. इन घटनाओं से लाखों लोग विस्थापित हुए, जिनमें आज 12 लाख से अधिक पीड़ित हैं – अधिकांश जम्मू में बसाए गए हैं और बाकी देश के 70 से अधिक शहरों में फैले हैं. ये विस्थापित भारत के सबसे पहले स्टेकहोल्डर हैं, जो विभाजन के दर्द को दोहरा रहे हैं. दिल्ली स्थित मीरपुर बलिदान भवन इन त्रासदियों का जीवंत स्मारक है.

सांस्कृतिक धरोहर का विनाश

POJK में हमारे सांस्कृतिक और आस्था केंद्रों पर भी हमला हुआ. शारदापीठ (ज्ञान की देवी का पीठ), रघुनाथ मंदिर (मीरपुर), देवीगली (पुंछ), मंढोल सूर्यमंदिर और कीर्तनगढ़ गुरुद्वारा (अलीबेग) जैसे पवित्र स्थल आज खंडहर बन चुके हैं. ये हमारी सभ्यता की जड़ों पर सीधा प्रहार हैं और भारत की सांस्कृतिक विरासत को मिटाने की कोशिश का प्रमाण हैं.

POJK में पाकिस्तान की वर्तमान गतिविधियां और शोषण

आज POJK में पाकिस्तान आतंकवादी शिविर संचालित कर रहा है, स्थानीय संसाधनों जैसे विश्व-प्रसिद्ध संगमरमर, सोना, लौह अयस्क और यूरेनियम का खुलेआम दोहन कर रहा है. गिलगित-बाल्टिस्तान को उपनिवेश की तरह नियंत्रित किया जा रहा है, जहाँ स्थानीय लोगों के मानवाधिकारों का हनन आम बात है. हाल के वर्षों में (2025-26) PoJK और गिलगित-बाल्टिस्तान में राजनीतिक दमन, प्रदर्शनों पर रोक, अपहरण, हत्याएं और बुनियादी सुविधाओं की कमी बढ़ी है. शिक्षा संकट गहरा रहा है और पाकिस्तान की नीतियाँ क्षेत्र को आर्थिक रूप से कमजोर बनाए रख रही हैं.

संकल्प दिवस का संदेश: अखंड भारत का सपना

22 फरवरी 1994 का संकल्प इन सबके खिलाफ भारत की सामूहिक इच्छाशक्ति है. यह दिन हमें याद दिलाता है कि जम्मू-कश्मीर की पूर्ण मुक्ति और अखंड भारत का सपना अभी अधूरा है. POJK विस्थापितों की पीड़ा, शहीदों का बलिदान और संसद का संकल्प – ये सब मिलकर हमें दृढ़ता से कहते हैं: ‘पाकिस्तान अधिक्रांत क्षेत्र खाली करो, भारत अविभाज्य रहेगा.’

यह संकल्प हमें प्रेरित करता है कि जनजागरण और दृढ़ नीति से वह दिन अवश्य आएगा जब POJK भारत की मुख्यधारा में पूरी तरह शामिल होगा.

ब्लॉगर के बारे में

आशीष कुमार अंशु

आशीष कुमार अंशु एक पत्रकार, लेखक व सामाजिक कार्यकर्ता हैं। आम आदमी के सामाजिक सरोकार से जुड़े मुद्दों तथा भारत के दूरदराज में बसे नागरिकों की समस्याओं पर अंशु ने लम्बे समय तक लेखन व पत्रकारिता की है। अंशु मीडिया स्कैन ट्रस्ट के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं।

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