hanamkonda Thousand Pillar Temple telangana know History and significance of hazaar khambon wala mandir | 1000 स्तंभों पर टिका है यह मंदिर, नहीं है कोई दीवार, यहां भगवान विष्णु और शिव के साथ सूर्यदेव की होती है पूजा
Last Updated:
Thousand Pillar Temple: आपने कई देवी-देवताओं के मंदिरों के दर्शन किए होंगे. भारत के ज्यादातर मंदिर अपने चमत्कार और इतिहास की वजह से प्रसिद्ध है. लेकिन तेलंगाना राज्य के हनमकोंडा में एक ऐसा मंदिर है, जो 1000 स्तंभों पर टिका है. इस मंदिर में कोई भी दीवार नहीं है और यह पहला ऐसा मंदिर है, जहां भगवान विष्णु और शिवजी के साथ सूर्यदेव की पूजा अर्चना की जाती है.

Thousand Pillar Temple: देश के अलग-अलग राज्यों में रहस्य और भक्ति से भरे कई मंदिर हैं, जहां भक्त अपने आराध्य के लिए मीलों चलकर आते हैं और उनकी पूजा-अर्चना करते हैं. भगवान शिव और भगवान विष्णु को दक्षिण भारत में सबसे ज्यादा पूजा जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक मंदिर ऐसा है, जहां भगवान शिव और भगवान विष्णु के साथ एक ही गर्भगृह में भगवान सूर्य भी विराजमान हैं? मंदिर के प्रांगण में मौजूद हाथी और विशाल नंदी महाराज की प्रतिमा को विशाल बेसाल्ट पत्थर से जाकर बनाया गया है. आइए जानते हैं 1000 स्तंभों पर टिके इस मंदिर के बारे में खास बातें…
रुद्रेश्वर स्वामी मंदिर
तेलंगाना राज्य के हनमकोंडा में हजार स्तंभों वाला मंदिर मौजूद है, जिसे रुद्रेश्वर स्वामी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है. मंदिर को हजार स्तभों वाला मंदिर इसलिए कहा जाता है क्योंकि मंदिर स्तभों पर ही टिका है और मंदिर को सपोर्ट देने के लिए कोई दीवार नहीं है. मंदिर की बनावट ऐसी है कि कुछ स्तभों को सीधे तौर पर देखा जा सकता है, लेकिन कुछ स्तंभ एक दूसरे से इस कदर चिपके हुए हैं कि उन्होंने लंबी दीवार का रूप ले लिया है. मंदिर की हालत बहुत जर्जर थी, लेकिन सरकार के अधीन आते ही मंदिर की मरम्मत का काम जारी है और अब मंदिर को भक्तों के लिए खोल दिया गया है.
हजार स्तंभ मंदिर एक लोकप्रिय तीर्थस्थल
स्टार शेप की वास्तुकला में निर्मित, हजार स्तंभ मंदिर एक लोकप्रिय तीर्थस्थल है जहां लगभग हर दिन 1000 से अधिक श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं. मंदिर में काले बेसाल्ट पत्थर से बनी एक विशाल नंदी प्रतिमा भी है. मंदिर में स्थित तीनों गर्भगृहों को सामूहिक रूप से त्रिकूटलयम के नाम से जाना जाता है. गर्भगृह में भगवान शिव और भगवान विष्णु के साथ भगवान सूर्य भी विराजमान हैं. ये देश का पहला मंदिर है, जहां ब्रह्मांड को चलाने वाली तीन बड़ी शक्तियों को एक ही छत के नीचे देखा गया है.
धूमधाम से मनाए जाते हैं ये त्योहार
भगवान सूर्य की प्रतिमा होने की वजह से मकर संक्रांति (पोंगल) पर भक्त सूर्य देव का आशीर्वाद लेने आते हैं. मंदिर में मकर संक्रांति (पोंगल) के अलावा, महाशिवरात्रि, कुंकुमा पूजा, कार्तिक पूर्णिमा, उगादी, नागुला चविती, गणेश चतुर्थी, बोनालु महोत्सव और बथुकम्मा महोत्सव भी धूमधाम से सेलिब्रेट किए जाते हैं.
12वीं शताब्दी में किया था निर्माण
12वीं शताब्दी में मंदिर का निर्माण रुद्र देव ने किया था. मंदिर में रुद्र देव के गृह देवता की प्रतिमा भी मौजूद है, जिसकी वजह से मंदिर को रुद्रेश्वर स्वामी मंदिर के नाम से जाना जाता है. यह मंदिर चालुक्य मंदिरों की स्थापत्य शैली में निर्मित है. मंदिर के प्रांगण में मौजूद हाथी और विशाल नंदी महाराज की प्रतिमा को विशाल बेसाल्ट पत्थर से जाकर बनाया गया है. प्रतिमा पर बारीक नक्काशी भी देखने को मिलती है, जो नंदी महाराज की शोभा को बढ़ाती है.
About the Author
पराग शर्मा एक अनुभवी धर्म एवं ज्योतिष पत्रकार हैं, जिन्हें भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेदनी ज्योतिष, वैदिक शास्त्रों और ज्योतिषीय विज्ञान पर गहन अध्ययन और लेखन का 12+ वर्षों का व्यावहारिक अनुभव ह…और पढ़ें