Kerala High Court Stays Demolition of Kasaragod Cricket Ground | Scientific Survey Ordered in Badiyadka Stadium Case
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केरल क्रिकेट एसोसिएशन (KCA) के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है. केरल हाई कोर्ट ने कासरगोड के बडियाडका में स्थित क्रिकेट ग्राउंड को ढहाने की प्रस्तावित योजना पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है. कोर्ट के इस फैसले से खेल प्रेमियों और स्थानीय जनता में खुशी की लहर दौड़ गई है.

क्रिकेट हाईकोर्ट ने क्रिकेट ग्राउंड पर बुलडोजर एक्शन पर रोक लगाई. (फाइल फोटो)
केरल हाई कोर्ट ने केरल क्रिकेट एसोसिएशन के पक्ष में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कासरगोड के बडियाडका में बने क्रिकेट ग्राउंड को तोड़ने की कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी है. न्यायमूर्ति वीजू अब्राहम ने केसीए की याचिका पर सुनवाई करते हुए इस मैदान को ‘जनता की जरूरत’ करार दिया और राज्य सरकार को निर्देश दिया कि इस मामले को पूरी गंभीरता के साथ देखा जाए.
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान जिला कलेक्टर की उस पुरानी रिपोर्ट को खारिज कर दिया, जिसमें केसीए पर 1.09 एकड़ सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करने का आरोप लगाया गया था. अदालत ने कहा कि कलेक्टर की वह रिपोर्ट किसी वैज्ञानिक सर्वे पर आधारित नहीं थी. केसीए की मांग को स्वीकार करते हुए न्यायमूर्ति ने उन्हें एक नए और वैज्ञानिक सर्वे के लिए आवेदन करने की अनुमति दी है. कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि संबंधित अधिकारी सटीक सर्वे करें और उसकी रिपोर्ट व नक्शे सरकार द्वारा सत्यापित किए जाएं.
नहर की जमीन और पर्यावरण पर असर
इस विवाद का एक मुख्य हिस्सा 40 सेंट नहर की जमीन से जुड़ा है. केसीए ने अदालत को बताया कि जब उन्होंने यह जमीन खरीदी थी, तब वहां किसी जल निकाय या पानी होने के कोई स्पष्ट संकेत नहीं थे. दिलचस्प बात यह है कि जिला कलेक्टर की एक अन्य रिपोर्ट में भी यह माना गया है कि पानी के बहाव में आए बदलाव से स्थानीय पर्यावरण पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा है.
लीज या जमीन का आदान-प्रदान
विवाद को हमेशा के लिए सुलझाने के लिए केसीए ने दो बड़े प्रस्ताव रखे हैं:
- केसीए बडियाडका पंचायत को उतनी ही बराबर जमीन कहीं और दे सकता है.
- या फिर विवादित जमीन को लंबे समय के लिए लीज पर लिया जा सकता है.
चार महीने महीने निर्णय के आदेश
बडियाडका पंचायत और पंचायत निदेशक पहले ही इन प्रस्तावों पर अपनी सहमति जता चुके हैं, इसलिए हाई कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया है कि अंतिम निर्णय लेते समय इन व्यावहारिक विकल्पों पर विचार किया जाए. कोर्ट ने स्थानीय स्वशासन और राजस्व विभाग को चार महीने के भीतर इस मामले में अंतिम प्रशासनिक निर्णय लेने का आदेश दिया है. इस मामले में केसीए की ओर से अधिवक्ता केएन अभिलाष ने प्रभावी पैरवी की.
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दीप राज दीपक 2022 में न्यूज़18 से जुड़े. वर्तमान में होम पेज पर कार्यरत. राजनीति और समसामयिक मामलों, सामाजिक, विज्ञान, शोध और वायरल खबरों में रुचि. क्रिकेट और मनोरंजन जगत की खबरों में भी दिलचस्पी. बनारस हिंदू व…और पढ़ें