Manali Anjani Mahadev Snow Shivling Mini Amarnath। मनाली के अंजनी महादेव मंदिर में 11 हजार फीट पर प्राकृतिक बर्फ का शिवलिंग बना

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Mini Amarnath: पहाड़ों पर जब बर्फ गिरती है तो रास्ते मुश्किल हो जाते हैं, सांसें भारी हो जाती हैं और कदम संभलकर रखने पड़ते हैं. लेकिन आस्था का रास्ता अक्सर मौसम से बड़ा होता है. यही दृश्य इन दिनों मनाली के पास देखने को मिल रहा है, जहां 11 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित अंजनी महादेव मंदिर में प्राकृतिक रूप से बना 15 से 20 फीट ऊंचा बर्फ का शिवलिंग श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहा है. शून्य से नीचे तापमान, फिसलन भरे रास्ते और लगातार गिरती बर्फ के बीच भी भक्तों के कदम नहीं डगमगा रहे. लोग इसे ‘मिनी अमरनाथ’ कह रहे हैं और मान रहे हैं कि यह सिर्फ प्रकृति नहीं, बल्कि महादेव का साक्षात चमत्कार है.

बर्फ से बना शिवलिंग, श्रद्धा से भरा वातावरण
दिसंबर के मध्य से लेकर फरवरी तक यहां हर साल प्राकृतिक रूप से बर्फ का शिवलिंग आकार लेता है. स्थानीय पुजारियों के अनुसार, यह कोई साधारण घटना नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही आस्था का प्रतीक है. मंदिर से जुड़े संत शिरोमणि बाबा प्रकाश पुरी ने इस स्थल को विशेष आध्यात्मिक महत्व बताया था. मान्यता है कि माता अंजनी ने यहीं संतान प्राप्ति के लिए तप किया था और भगवान शिव ने उन्हें वरदान दिया था.

सुबह की पहली किरण जब बर्फ से ढके पहाड़ों पर पड़ती है, तो शिवलिंग की चमक अलग ही आभा बिखेरती है. ठंडी हवा चेहरे को चीरती जरूर है, लेकिन श्रद्धालुओं के चेहरों पर संतोष की गरमाहट साफ दिखाई देती है.

‘बाबा बर्फानी’ जैसा अनुभव
दर्शन करने पहुंचे कई श्रद्धालुओं का कहना है कि यहां का अनुभव उन्हें अमरनाथ गुफा मंदिर की याद दिलाता है. एक श्रद्धालु ने बताया, “मैं दो बार अमरनाथ जा चुका हूं. यहां आकर लगा जैसे बाबा ने तीसरी बार बुला लिया हो.” उनके शब्दों में थकान कम और कृतज्ञता ज्यादा थी.

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रास्ता आसान नहीं है. कई जगहों पर बर्फ जमी है, पगडंडियां फिसलन भरी हैं. कुछ लोग लकड़ी की छड़ी के सहारे चढ़ाई कर रहे हैं, तो कुछ एक-दूसरे का हाथ थामे आगे बढ़ रहे हैं. महिलाएं भी समूह में भजन गाते हुए ऊपर पहुंच रही हैं. वे कहती हैं कि चढ़ाई के दौरान सांस जरूर फूलती है, लेकिन दर्शन के बाद सारी थकान जैसे पिघल जाती है.

मौसम और पर्यटन का संगम
बर्फबारी ने जहां आम जनजीवन को थोड़ा धीमा किया है, वहीं इस स्थल ने स्थानीय पर्यटन को नई ऊर्जा दी है. होटल संचालक बताते हैं कि पिछले कुछ दिनों में श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या बढ़ी है. कई लोग एडवेंचर और आस्था दोनों का अनुभव एक साथ करना चाहते हैं. स्थानीय प्रशासन भी सुरक्षा को लेकर सतर्क है. मार्ग पर आवश्यक निर्देश लगाए गए हैं और लोगों से सावधानी बरतने की अपील की जा रही है. फिर भी, भीड़ में अनुशासन और श्रद्धा का संतुलन देखने को मिलता है.

आस्था की तपिश, ठंड पर भारी
जब तापमान शून्य से नीचे चला जाता है, तब सामान्यतः लोग घरों में दुबक जाते हैं. लेकिन यहां तस्वीर उलटी है. बच्चे, बुजुर्ग, युवा हर आयु वर्ग के लोग बर्फीले रास्तों पर बढ़ते दिखते हैं. किसी के हाथ में प्रसाद है, किसी के होठों पर ‘हर हर महादेव’ का उद्घोष. यह सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि मन की यात्रा भी है. कठिन चढ़ाई मानो जीवन की चुनौतियों का प्रतीक बन जाती है, और शिवलिंग के दर्शन उस संघर्ष का पुरस्कार. शायद यही वजह है कि हर साल यहां आने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

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