यादों के बीच बड़ा ऐलान, 1990 बैच ने निभाया फर्ज, कोरल जुबली पर IIT कानपुर को 13.2 करोड़ समर्पित

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कानपुर स्थित Indian Institute of Technology Kanpur में 1990 बैच के पूर्व छात्र 35 साल बाद जब अपने कैंपस लौटे तो माहौल भावुकता और गर्व से भर उठा. कोरल जुबली रीयूनियन के इस खास मौके पर देश-विदेश से आए पूर्व छात्रों ने न सिर्फ पुरानी यादें ताजा कीं, बल्कि अपनी मातृ संस्था को गुरु दक्षिणा के रूप में 13.2 करोड़ देने का ऐलान भी किया. यह योगदान संस्थान के प्रति उनके गहरे जुड़ाव और आभार का प्रतीक है.

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मातृ संस्था का कर्ज उतारने लौटे छात्र, जुबली पर कर गए करोड़ों का योगदान, जानिएZoom

1990 बैच आईआईटी कानपुर

कानपुर. कानपुर में 1990 बैच के पूर्व छात्र 35 साल बाद जब अपने पुराने कैंपस लौटे तो माहौल भावुकता और उत्साह से भर उठा. इस खास अवसर को ‘कोरल जुबली रीयूनियन’ के रूप में मनाया गया. देश-विदेश के अलग-अलग हिस्सों से आए पूर्व छात्रों ने अपने दोस्तों, शिक्षकों और सुनहरे दिनों की यादों को एक बार फिर ताजा किया.

इस मौके की सबसे खास बात यह रही कि 1990 बैच ने अपनी मातृ संस्था को गुरु दक्षिणा के रूप में 13.2 करोड़ देने की घोषणा की. पूर्व छात्रों ने कहा कि संस्थान ने उन्हें जो पहचान, शिक्षा और जीवन में आगे बढ़ने का अवसर दिया, उसी के प्रति आभार जताने के लिए यह योगदान दिया जा रहा है.

छात्रवृत्ति, रिसर्च और कैंपस विकास में लगेगी राशि
संस्थान के निदेशक प्रो. मणीन्द्र अग्रवाल ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह केवल आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि संस्थान के साथ गहरे जुड़ाव और जिम्मेदारी का प्रतीक है.

इस राशि का उपयोग
छात्रवृत्तियों को मजबूत करने, बड़े स्तर पर शोध को बढ़ावा देने और कैंपस के बुनियादी ढांचे के विकास में किया जाएगा. अधिष्ठाता प्रो. अमेय करकरे ने कहा कि 1990 बैच ने एक बार फिर साबित किया है कि संस्थान की एलुमनाई संस्कृति कितनी सशक्त है. इस सहयोग से नए छात्रवृत्ति कार्यक्रम शुरू होंगे, रिसर्च के लिए एंडाउड चेयर्स स्थापित की जाएंगी और भविष्य में नई सुविधाएं विकसित की जाएंगी.

पहले भी किया था सहयोग, इस बार और बड़ा संकल्प
1990 बैच के समन्वयक राजीव रंजन ने बताया कि यह पहली बार नहीं है जब उनके बैच ने संस्थान की मदद की है. सिल्वर जुबली के अवसर पर बैच ने लगभग 70 लाख रुपए का योगदान दिया था, जो समय के साथ बढ़कर करीब 1.5 करोड़ हो चुका है और आज भी छात्रवृत्तियों में उपयोग हो रहा है. इस बार बैच ने 13 करोड़ का लक्ष्य रखा था, लेकिन साथियों के सहयोग से यह राशि बढ़कर 13.2 करोड़ तक पहुंच गई. उन्होंने कहा कि यह सिर्फ आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि दिल से निकला आभार है.

यादों के साथ भविष्य के नए संकल्प
रीयूनियन के दौरान पूर्व छात्रों ने वर्तमान छात्रों और शिक्षकों से मुलाकात की, अपने अनुभव साझा किए और संस्थान में चल रहे नए कार्यों की जानकारी ली. कार्यक्रम का समापन पुरानी यादों, हंसी-मजाक और भविष्य के नए संकल्पों के साथ हुआ. संस्थान प्रशासन ने 1990 बैच का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनका यह योगदान आने वाले वर्षों में शिक्षा और शोध को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.

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Madhuri Chaudhary

पिछले 4 साल से मीडिया इंडस्ट्री में काम कर रही हूं और फिलहाल News18 में कार्यरत हूं. इससे पहले एक MNC में भी काम कर चुकी हूं. यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश की बीट कवर करती हूं. खबरों के साथ-साथ मुझे…और पढ़ें

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