India-France Joint Statement 2026 Highlights | 50 साल की दोस्ती और मोदी-मैक्रों का ‘मास्टरस्ट्रोक’, अब पूरी दुनिया पर राज करेगा भारत-फ्रांस का यह नया ‘सुपर पावर’ गठबंधन!

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जेट से न्यूक्लियर तक, सब Made In India! भारत-फ्रांस का ‘सुपर पावर’ प्लान क्या?

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India-France Joint Statement: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भारत-फ्रांस संबंधों को ‘स्पेशल ग्लोबल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ में बदल दिया है. 17 फरवरी 2026 को जारी साझा बयान में डिफेंस, स्पेस, न्यूक्लियर एनर्जी और AI पर ऐतिहासिक समझौते हुए. राफेल-एम से लेकर स्कॉर्पीन पनडुब्बी और जेट इंजन बनाने तक, दोनों देशों ने सुरक्षा और तकनीक के हर मोर्चे पर चीन-पाकिस्तान की नींद उड़ाने वाली बड़ी डील फाइनल कर दी है.

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जेट से न्यूक्लियर तक, सब Made In India! भारत-फ्रांस का 'सुपर पावर' प्लान क्या?Zoom

मुंबई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों.

नई दिल्ली: भारत और फ्रांस के रिश्तों में 17 फरवरी 2026 का दिन सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भारत के आधिकारिक दौरे पर आए. मुंबई में दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय बातचीत की और रिश्तों को ‘स्पेशल ग्लोबल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ के ऊंचे लेवल पर ले जाने का फैसला किया. दोनों नेताओं की बातचीत के बाद जारी साझा बयान आने वाले दशकों के लिए भारत की सुरक्षा और तरक्की का एक मजबूत ब्लूप्रिंट है. दोनों देशों ने ‘होराइजन 2047 रोडमैप’ को लागू करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई. यह रोडमैप भारत की आजादी के 100 साल पूरे होने तक के लक्ष्यों को तय करता है. इसका मकसद सिर्फ व्यापार बढ़ाना नहीं है. बल्कि वैश्विक अनिश्चितता के दौर में एक स्थिर और नियम-आधारित इंटरनेशनल ऑर्डर बनाना है.

इस पार्टनरशिप के तहत दोनों देशों ने सालाना विदेश मंत्रियों के व्यापक संवाद की शुरुआत की है. यह संवाद आर्थिक सुरक्षा, ग्लोबल इश्यूज और पीपल-टू-पीपल एक्सचेंज की लगातार समीक्षा करेगा. भारत और फ्रांस अब सिर्फ दो देश नहीं रहे. वे अब एक ऐसी ताकत बन गए हैं जो दुनिया की दिशा बदलने का दम रखते हैं. मोदी और मैक्रों की यह केमिस्ट्री दिखाती है कि फ्रांस भारत का सबसे भरोसेमंद डिफेंस और स्ट्रैटेजिक पार्टनर बनकर उभरा है. दोनों देशों ने साफ कर दिया है कि उनकी दोस्ती अब जमीन, आसमान और समंदर से आगे बढ़कर स्पेस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक पहुंच चुकी है.

अब भारत में ही बनेंगे खतरनाक जेट इंजन

  • डिफेंस के क्षेत्र में भारत और फ्रांस का साथ अब तक का सबसे सफल मॉडल रहा है. साझा बयान में इस बात पर जोर दिया गया कि अब सहयोग सिर्फ खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं रहेगा. अब फोकस को-डिजाइन, को-डेवलपमेंट और को-प्रोडक्शन पर होगा.
  • सबसे बड़ी खबर यह है कि दोनों देशों ने जेट इंजन और हेलीकॉप्टर इंजन के लिए बड़े स्तर पर हाथ मिलाया है. 26 राफेल-मैरीन फाइटर जेट्स के कॉन्ट्रैक्ट की पुष्टि के साथ ही, अब फाइटर एयरक्राफ्ट इंजन बनाने की दिशा में भी बात आगे बढ़ी है. सैफरन ग्रुप और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) मिलकर इंडियन मल्टी रोल हेलीकॉप्टर (IMRH) के लिए इंजन विकसित करेंगे.
  • इतना ही नहीं, भारत में राफेल विमानों में लगने वाले M-88 इंजन की मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहाल (MRO) सुविधा भी स्थापित की जाएगी. टाटा और एयरबस मिलकर ‘मेक इन इंडिया’ के तहत H125 फाइनल असेंबली लाइन शुरू कर चुके हैं. यह प्राइवेट सेक्टर में हेलीकॉप्टर बनाने की भारत की पहली ऐसी सुविधा है.
  • वहीं, स्कॉर्पीन पनडुब्बी प्रोग्राम (P75) की सफलता को आगे बढ़ाते हुए नई पनडुब्बियों के निर्माण पर भी सहमति बनी है. फ्रांस ने भारत के पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर (MBRL) में भी अपनी गहरी रुचि दिखाई है. इसका मतलब है कि भविष्य में भारत के हथियार फ्रांस की सेना की भी ताकत बन सकते हैं.

परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भारत बनेगा दुनिया का नया हब

ऊर्जा सुरक्षा के मामले में फ्रांस ने भारत का साथ देने के लिए अपने दरवाजे पूरी तरह खोल दिए हैं. भारत ने 2047 तक 100 गीगावाट न्यूक्लियर पावर क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है. राष्ट्रपति मैक्रों ने भारत के इस साहसी फैसले और परमाणु क्षेत्र में निजी निवेश की अनुमति देने के सुधारों की जमकर तारीफ की. दोनों देशों के बीच जैतपुर न्यूक्लियर पावर प्लांट प्रोजेक्ट पर तेजी से काम करने की सहमति बनी है. इसके अलावा, स्मॉल मॉडुलर रिएक्टर्स (SMR) और एडवांस्ड मॉडुलर रिएक्टर्स (AMR) जैसी नई तकनीकों पर भी रिसर्च और डेवलपमेंट के लिए करार हुआ है.

राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी.

यह सहयोग सिर्फ बिजली बनाने तक सीमित नहीं है. बल्कि इसमें न्यूक्लियर साइंस, स्किल डेवलपमेंट और इंडस्ट्रियल एप्लीकेशन भी शामिल हैं. भारत के परमाणु ऊर्जा विभाग और फ्रांस के CEA के बीच शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए परमाणु तकनीक के उपयोग पर नई जान फूंकी गई है. इससे भारत की क्लीन एनर्जी की जरूरतों को पूरा करने में बहुत बड़ी मदद मिलेगी. साथ ही, यह दुनिया को एक कड़ा संदेश है कि भारत अब ऊर्जा के मामले में किसी पर निर्भर नहीं रहेगा.

क्यों स्पेस और साइबर दुनिया में भारत-फ्रांस की जुगलबंदी है इतनी अहम?

स्पेस के सेक्टर में इसरो (ISRO) और फ्रांस की स्पेस एजेंसी (CNES) का दशकों पुराना रिश्ता अब नई ऊंचाइयों पर है. साझा बयान के मुताबिक, दोनों देश अब जॉइंट सैटेलाइट डेवलपमेंट और ह्युमन स्पेस फ्लाइट प्रोग्राम (गगनयान) में और ज्यादा करीब आएंगे. 2026 में दोनों देश ‘स्ट्रैटेजिक स्पेस डायलॉग’ का तीसरा सेशन आयोजित करेंगे. इसमें डिफेंस स्पेस यानी अंतरिक्ष में सुरक्षा और सैटेलाइट्स की रक्षा पर खास चर्चा होगी. फ्रांस जुलाई 2026 में होने वाले इंटरनेशनल स्पेस समिट में भारत की भागीदारी का स्वागत करेगा.

साइबर सुरक्षा के मोर्चे पर भी दोनों देशों ने कमर कस ली है. वे अब मिलकर साइबर हमलों और डिजिटल खतरों से निपटेंगे. 2026 में होने वाले अगले साइबर डायलॉग में खतरनाक साइबर टूल्स के प्रसार को रोकने पर रणनीति बनेगी. साथ ही, भारत और फ्रांस ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर अपनी साझा प्रतिबद्धता जताई है. दोनों नेताओं ने एक सुरक्षित और भरोसेमंद AI बनाने पर जोर दिया है जो मानवता के काम आए.

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