J&K Police Busts 250 Crore Online Investment Scam, Dr. Morphine Arrested | जम्मू-कश्मीर में 250 करोड़ का महा-घोटाला, ‘डॉक्टर मॉर्फिन’ ने चीन के साथ मिलकर ऐसे लूटे देश के करोड़ों रुपये
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जम्मू-कश्मीर पुलिस ने 250 करोड़ रुपये के ऑनलाइन निवेश घोटाले का भंडाफोड़ किया है. इसका मास्टरमाइंड हिसार का डॉक्टर एकांत योगदत्त उर्फ ‘डॉक्टर मॉर्फिन’ है, जिसे दिल्ली एयरपोर्ट से पकड़ा गया. आरोपी चीनी नागरिकों के साथ मिलकर फर्जी वेबसाइटों के जरिए ठगी करता था. पुलिस ने 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है और 800 बैंक खातों की जांच की जा रही है. मामले में टेरर फंडिंग के एंगल से भी तफ्तीश जारी है.

फिलीपींस से सीखा ठगी का पाठ, दिल्ली एयरपोर्ट पर दबोचा गया 250 करोड़ के घोटाले का मास्टरमाइंड. (AI Photo)
श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर पुलिस ने देश के अब तक के सबसे बड़े ऑनलाइन इन्वेस्टमेंट स्कैम्स में से एक का पर्दाफाश किया है. इस घोटाले में फिशिंग और फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के जरिए आम लोगों की गाढ़ी कमाई लूटी जा रही थी. गांदरबल के सफापोरा निवासी फिरदौस अहमद की शिकायत पर जब पुलिस ने तफ्तीश शुरू की, तो परत दर परत एक अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट का चेहरा सामने आया. एसएसपी गांदरबल खलील पोसवाल ने इस केस के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाई थी. जांच में पता चला कि यह गिरोह ‘पैसा वॉल्ट’ (paisavault.com) जैसी फर्जी वेबसाइट्स के जरिए लोगों को निवेश पर भारी रिटर्न का लालच देता था.
‘डॉक्टर मॉर्फिन’ और फिलीपींस-चीन का खतरनाक कनेक्शन
इस पूरे घोटाले का मास्टरमाइंड हरियाणा के हिसार का रहने वाला एक डॉक्टर निकला. डॉक्टर एकांत योगदत्त उर्फ ‘डॉक्टर मॉर्फिन’ ने फिलीपींस से एमबीबीएस की पढ़ाई के दौरान धोखाधड़ी की ये तकनीकें सीखी थीं. पुलिस के मुताबिक इस डॉक्टर के तार सीधे तौर पर चीनी नागरिकों से जुड़े हुए थे. वह 10 अलग-अलग कोड नेम का इस्तेमाल करके लोगों को ठग रहा था. डॉक्टर एकांत को जम्मू-कश्मीर पुलिस ने दिल्ली एयरपोर्ट से उस वक्त गिरफ्तार किया, जब वह चीन से लौट रहा था. वह इस पूरे सिंडिकेट का ‘टीम लीडर’ था और कश्मीरी युवाओं के साथ मिलकर इसे ऑपरेट कर रहा था.
गरीबों के खातों का इस्तेमाल और बैंक कर्मियों की मिलीभगत
यह गैंग बेहद शातिर तरीके से काम करता था. कश्मीरी मूल के क्षेत्रीय हेड और अकाउंट मोबिलाइजर्स बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे) परिवारों को निशाना बनाते थे. वे गरीब लोगों को 8 से 10 हजार रुपये प्रति माह का लालच देकर उनके बैंक खाते और एटीएम कार्ड ले लेते थे. इतना ही नहीं, इस खेल में कुछ बैंक कर्मचारी भी शामिल थे, जो फर्जी वेबसाइटों के लिए बैंक खातों के क्यूआर कोड उपलब्ध कराते थे. जैसे ही कोई शिकार इन फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर पैसे डालता, वह पैसा तुरंत इन स्थानीय खातों में आता और फिर कई लेयर्स के जरिए जम्मू-कश्मीर से बाहर या विदेश भेज दिया जाता था.
800 बैंक खाते और टेरर फंडिंग का शक
पुलिस ने अब तक इस घोटाले से जुड़े 800 से ज्यादा बैंक खातों का ब्योरा जुटाया है. शुरुआती जांच में सिर्फ 300 खातों के ट्रांजैक्शन चेक किए गए, जिनमें 250 करोड़ रुपये से ज्यादा का लेनदेन पाया गया है. पूरे भारत से लोग इस ठगी का शिकार हुए हैं. एसएसपी खलील पोसवाल ने बताया कि इस घोटाले में लगभग 600 लोगों के शामिल होने का अंदेशा है. पुलिस अब इस मामले की टेरर फंडिंग के एंगल से भी जांच कर रही है. चूंकि मुख्य आरोपी डॉक्टर लगातार विदेश यात्राएं कर रहा था और चीनी नागरिकों के संपर्क में था, इसलिए इस बात की जांच की जा रही है कि क्या इस पैसे का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों में तो नहीं हो रहा था.
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दीपक वर्मा (Deepak Verma) एक पत्रकार हैं जो मुख्य रूप से विज्ञान, राजनीति, भारत के आंतरिक घटनाक्रमों और समसामयिक विषयों से जुडी विस्तृत रिपोर्ट्स लिखते हैं. वह News18 हिंदी के डिजिटल न्यूजरूम में डिप्टी न्यूज़…और पढ़ें