Chitrakoot News : जहां गांव के खेत पड़े थे बंजर, आज शहरों तक खेती, चित्रकूट में बदले हालात, जानें कैसे
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Vegetable Farming Chitrakoot : चित्रकूट में जो खेत पहले बंजर पड़े रहते थे, अब उन्हीं खेतों में टमाटर, मटर, पालक, मूली और कद्दू की फसल लहलहा रही है. किसान आधुनिक तकनीकों, सीमित सिंचाई संसाधनों और बाजार की मांग को देखते हुए सब्जी उगाने में जुटे हैं. ग्रामीण ही नहीं, शहरी क्षेत्र के लोग भी खेती करने लगे हैं. सीतापुर जैसे इलाकों में सब्जी उत्पादन किसानों का फेवरेट बन चुका है. सीतापुर के किसान जय नारायण शुक्ला लोकल 18 से बताते हैं कि वे तीन बीघा से ज्यादा जमीन पर मौसमी सब्जियों की खेती कर रहे हैं.
चित्रकूट. बुंदेलखंड के सूखे और संघर्ष की पहचान रहे चित्रकूट में अब खेती की तस्वीर बदलती नजर आ रही है. एक समय था जब यहां के किसान खेती को घाटे का सौदा मानते थे, पानी की कमी, सिंचाई के सीमित साधन और बाजार तक पहुंच की दिक्कतों ने किसानों का मनोबल तोड़ दिया था. लेकिन बदलते दौर के साथ अब हालात भी बदल रहे हैं. अब ग्रामीण ही नहीं, बल्कि शहरी क्षेत्र के लोग भी खेती की ओर रुख कर रहे हैं. खासकर सीतापुर क्षेत्र में सब्जी उत्पादन ने किसानों की सोच को नई दिशा दी है.
इन सब्जियों से लहलहा रहे खेत
जहां पहले खेत बंजर पड़े रहते थे, अब उन्हीं खेतों में टमाटर, मटर, पालक, मूली और कद्दू की हरियाली लहलहा रही है. जिले के स्थानीय किसान आधुनिक तकनीकों, सीमित सिंचाई संसाधनों और बाजार की मांग को देखते हुए सब्जी उत्पादन को आय का स्थायी जरिया बना रहे हैं. छोटे स्तर से शुरू हुई यह पहल अब कई परिवारों के लिए आर्थिक संबल बन चुकी है. कई लोगों का परिवार सब्जी की खेती से अपना पेट भर रहा है.
कितना मुनाफा
सीतापुर के किसान जय नारायण शुक्ला लोकल 18 से बताते हैं कि वे तीन बीघा से अधिक जमीन पर मौसमी सब्जियों की खेती कर रहे हैं. खेत से ताजा सब्जियां तोड़कर सीधे बाजार में बेचने से उन्हें उचित दाम मिल जाता है. उनका कहना है कि पहले पानी की कमी के कारण खेती करना जोखिम भरा लगता था. न तो पर्याप्त सिंचाई की सुविधा थी और न ही आधुनिक उपकरण थे. लेकिन जैसे-जैसे संसाधन उपलब्ध हुए हम लोगों का भरोसा भी बढ़ा है.
जय नारायण शुक्ला बताते हैं कि अब ड्रिप सिंचाई, छोटे पंप सेट और स्थानीय स्तर पर पानी संचयन के प्रयासों ने खेती को आसान बना रहे है. सरकार भी समय-समय पर किसानों के लिए योजनाएं निकलती रहती है जिससे हम लोगों को सहूलियत मिल जाती है. उनका कहना है कि हम लोग बाजार की मांग के हिसाब से फसल का चयन करते हैं. मौसम के अनुसार सब्जियों की बुवाई और कटाई करते हैं.
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Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें