Delhi ncr Flats prices| home rates in NCR| when to buy flat| flats prices getting cheaper| क्या अब सस्ते होना शुरू हो गए फ्लैट!यही है घर खरीदने का सही टाइम? रियल एस्टेट मार्केट का हाल बता रही रिर्पोट
कोरोना के बाद से ही सिर्फ दिल्ली-एनसीआर ही नहीं बल्कि पूरे देशभर में घरों और फ्लैटों की कीमतों ने आग लगाई हुई थी. जमीनों से लेकर प्लॉटों और आवासीय यूनिटों की कीमतों में लगातार आए भारी उछाल ने घर खरीदारों के माथे पर चिंता की लकीरें छोड़ दी थीं. हालांकि अब एक बार फिर रियल एस्टेट बाजार में कुछ राहत मिलती दिखाई दे रही है.हाल ही में सूचीबद्ध कंपनी ऑरम प्रॉपटेक द्वारा अधिग्रहित रियल एस्टेट सलाहकार कंपनी प्रॉप टाइगर के ताजा आंकड़े कुछ ऐसा ही बयां कर रहे हैं.
प्रॉप-टाइगर के ताजा आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में देश के शीर्ष आठ शहरों में औसत आवासीय कीमतों में छह प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है. हालांकि सबसे अच्छी बात है कि भले ही यह लोगों को कीमतों में वृद्धि दिखाई दे रही है लेकिन 2024 के मुकाबले यह कम है, और यही वजह है कि विशेषज्ञ इसे बाजार के लिए स्वस्थ और टिकाऊ संकेत मान रहे हैं.
रिपोर्ट बताती है कि दिल्ली-एनसीआर में आवासीय संपत्तियों की औसत कीमतें 2025 में छह प्रतिशत बढ़कर 8,105 रुपये प्रति वर्ग फुट से 8,570 रुपये प्रति वर्ग फुट तक पहुंच गई हैं. हालांकि निवेशकों और खरीदारों के लिए अच्छी बात ये है कि 2024 में जहां जमीन, आवासीय यूनिटों, फ्लैटों की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला था, वहीं अब वृद्धि की रफ्तार संतुलित हो गई है. जानकारों का मानना है कि यह मंदी नहीं, बल्कि बाजार का परिपक्व होना है, जो लंबी अवधि की स्थिरता के लिए बेहद जरूरी है.
औरम प्रॉपटेक के कार्यकारी निदेशक ओंकार शेट्ये कहते हैं कि बिक्री की मात्रा में हल्की कमी के बावजूद कीमतों में मजबूती इस बात का संकेत है कि बाजार अनुशासित और आपूर्ति-संतुलित बना हुआ है. डेवलपर्स ने अनियंत्रित छूट देने के बजाय कीमतों की स्थिरता को प्राथमिकता दी है. साथ ही बिना बिके घरों (इन्वेंट्री) का बेहतर प्रबंधन किया गया है, जिससे 2026 के लिए एक मजबूत मूल्य आधार तैयार हुआ है.
विशेषज्ञों का कहना है कि 2022 से 2024 के बीच कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी के बाद अब बाजार स्वाभाविक संतुलन की ओर बढ़ रहा है. ऊंचे आधार प्रभाव (हाई बेस इफेक्ट) के कारण वृद्धि दर में कमी आई है, लेकिन वास्तविकता यह है कि कीमतें अब भी मजबूती के साथ ऊपर की दिशा में हैं. यह संकेत देता है कि रियल एस्टेट सेक्टर में मांग पूरी तरह खत्म नहीं हुई, बल्कि अधिक परिपक्व और सोच-समझकर निवेश का दौर शुरू हुआ है.
एनसीआर में बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी परियोजनाओं, एक्सप्रेसवे और मेट्रो विस्तार जैसी सुविधाओं ने भी बाजार को समर्थन दिया है. इसके अलावा, संगठित डेवलपर्स की बढ़ती हिस्सेदारी और पारदर्शिता ने खरीदारों का विश्वास मजबूत किया है. बैंकिंग प्रणाली में स्थिर ब्याज दरों और होम लोन की उपलब्धता ने भी आवासीय मांग को आधार प्रदान किया है.
मिगसन ग्रुप के एमडी यश मिगलानी कहते हैं कि आवासीय कीमतों में छह प्रतिशत की वृद्धि को हमें मंदी के रूप में नहीं, बल्कि बाजार के परिपक्व होने के संकेत के रूप में देखना चाहिए. पिछले दो वर्षों में तेज उछाल के बाद अब मांग अधिक संतुलित और वास्तविक जरूरतों पर आधारित हो गई है. यह घर खरीदारों के लिए निवेश का अच्छा समय है.
वहीं एसकेए ग्रुप के डायरेक्टर संजय शर्मा की मानें तो वर्ष 2022 से 2024 के दौरान कीमतों में जो अचानक और तीव्र बढ़ोतरी हुई थी, उसके बाद बाजार का स्थिर होना स्वाभाविक है. वर्तमान परिदृश्य में हम एक अधिक स्थायी और विश्वसनीय ग्रोथ साइकिल की शुरुआत देख रहे हैं. एनसीआर में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास, मेट्रो विस्तार और एक्सप्रेसवे परियोजनाएं मांग को दीर्घकालिक आधार प्रदान कर रही हैं. यह चरण सेक्टर को अधिक पारदर्शी और निवेश-योग्य बनाता है.
जबकि काउंटी ग्रुप के डायरेक्टर अमित मोदी कहते हैं कि एनसीआर सहित प्रमुख शहरों में कीमतों की नियंत्रित वृद्धि यह दर्शाती है कि बाजार अब अधिक संरचित और डेटा-आधारित निर्णयों की ओर बढ़ रहा है. खरीदार पहले की तुलना में अधिक जागरूक हैं और वे गुणवत्ता, लोकेशन और डेवलपर की विश्वसनीयता को प्राथमिकता दे रहे हैं. छह प्रतिशत की औसत वृद्धि एक स्वस्थ संकेत है क्योंकि यह मांग को पूरी तरह दबाती नहीं और न ही अनियंत्रित महंगाई का कारण बनती है. इससे एंड-यूजर और निवेशक दोनों को संतुलित अवसर मिलते हैं.
अंसल हाउसिंग के डायरेक्टर कुशाग्र अंसल की मानें तो छह प्रतिशत की औसत वार्षिक वृद्धि को हमें व्यापक आर्थिक स्थिरता के संदर्भ में देखना चाहिए. ब्याज दरों में स्थिरता, रोजगार में सुधार और शहरीकरण की तेज रफ्तार आवासीय मांग को समर्थन दे रही है. एनसीआर में प्रीमियम और मिड-सेगमेंट दोनों में मांग बनी हुई है. डेवलपर्स अब अधिक योजनाबद्ध तरीके से लॉन्च कर रहे हैं, जिससे ओवरसप्लाई का जोखिम कम हुआ है. कुल मिलाकर, बाजार अब अधिक संतुलित, टिकाऊ और दीर्घकालिक निवेश के अनुकूल बन रहा है.