जिस बेटे का अंतिम संस्कार कर दिया, वो 3 दिन बाद घर लौटा; मेघालय खदान हादसे में प्रशासन की घोर लापरवाही
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Meghalaya Coal Mine Blast: ईस्ट जयंतिया हिल्स की अवैध कोयला खदान में धमाके के बाद मृत घोषित श्यामबाबू सिन्हा जिंदा लौट आए, जिससे शव की पहचान और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ गए. कोयला खदान में पांच फरवरी को हुए विस्फोट में कम से कम 31 लोगों की जान चली गई थी.

मेघायल कोयला खदान में हुए विस्फोट में 31 लोगों की जान चली गई थी. (एएनआई)
शिलॉन्ग. मेघालय के ईस्ट जयंतिया हिल्स (East Jaintia Hills) की अवैध कोयला खदान में हुए जानलेवा धमाके के बाद एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने प्रशासन, पुलिस और पीड़ित परिवार को सन्न कर दिया है. 5 फरवरी को हुए जिस धमाके में 31 लोगों को मृत घोषित कर दिया गया था, उनमें से एक शख्स अपनी ही ‘तेरहवीं’ की तैयारियों के बीच जिंदा घर लौट आया है. असम के रताबारी का रहने वाला श्यामबाबू सिन्हा (Shyambabu Sinha), जिसका परिवार रो-रोकर अंतिम संस्कार कर चुका था, जब 3 दिन बाद घर के दरवाजे पर खड़ा हुआ, तो गांव वाले उसे देखकर डर गए और परिजन खुशी और सदमे में डूब गए.
श्यामबाबू की वापसी ने एक खौफनाक सवाल खड़ा कर दिया है. आखिर वो लाश किसकी थी जिसे परिवार ने अपना बेटा समझकर जला दिया? सूत्रों के मुताबिक, शव की शिनाख्त की प्रक्रिया अब सवालों के घेरे में है. क्या प्रशासन ने जल्दबाजी में या खराब डॉक्यूमेंटेशन के चलते किसी और का शव सिन्हा परिवार को सौंप दिया? परिवार ने एक अनजान शख्स का अंतिम संस्कार कर दिया. अब सवाल यह है कि उस अज्ञात मृतक का असली परिवार कौन है जो शायद अभी भी अपने लापता बेटे की राह देख रहा होगा.
5 फरवरी का धमाका और मौत का मातम
यह हादसा थंगस्कू (Thangsku) इलाके के माइनसंगत गांव में एक अवैध रैट-होल खदान में हुआ था. बताया जा रहा है कि अवैध खनन के लिए डायनामाइट का इस्तेमाल किया गया था, जिससे खदान धंस गई. 9 फरवरी को राज्य सरकार ने यह मानकर रेस्क्यू ऑपरेशन बंद कर दिया था कि अब किसी के बचने की उम्मीद नहीं है. लेकिन श्यामबाबू के जिंदा लौटने से यह साबित हो गया है कि आकलन में बड़ी चूक हुई थी.
साजिश, अवैध खनन और लापरवाही
श्यामबाबू की वापसी ने जांच की दिशा बदल दी है. एनडीटीवी के मुताबिक, अब जांच एजेंसियां सिर्फ अवैध खनन नेटवर्क (Illegal Mining Networks) की ही नहीं, बल्कि ‘पहचान में हुई चूक’ की भी जांच कर रही हैं. क्या यह सिर्फ भगदड़ (Panic) का नतीजा था या फिर अवैध खनन माफियाओं द्वारा मौतों के आंकड़े छिपाने या बदलवाने की कोई गहरी साजिश (Sabotage)? जिस तरह से बिना पक्की जांच के शव सौंपे गए, उसने पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली की पोल खोल दी है.
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राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें