Isha Mahashivratri 2026 । ईशा महाशिवरात्रि 2026 योग केंद्र में महोत्सव, राजनाथ सिंह मुख्य अतिथि

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सद्गुरु के सान्निध्य में 33वीं महाशिवरात्रि पर जुटेंगे देश के दिग्गज नेता

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Isha Mahashivratri 2026: ईशा योग केंद्र में 15 फरवरी 2026 को 33वीं महाशिवरात्रि का आयोजन होगा. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे. देवेंद्र फडणवीस और एल मुरुगन भी कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे. अदियोगी रथ यात्रा ने तमिलनाडु और कर्नाटक के हजारों किलोमीटर की यात्रा कर लोगों को आमंत्रित किया. कार्यक्रम का लाइव प्रसारण 23 भाषाओं में दुनिया भर में किया जाएगा.

Isha Mahashivratri 2026: आध्यात्म और उत्सव का संगम कही जाने वाली ईशा महाशिवरात्रि इस साल और भी खास होने जा रही है. 15 फरवरी 2026 को तमिलनाडु के ईशा योग केंद्र में आयोजित होने वाले 33वें महाशिवरात्रि महोत्सव में देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे. उनके साथ महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और सूचना एवं प्रसारण और संसदीय कार्य राज्य मंत्री एल मुरुगन समेत कई प्रमुख गणमान्य व्यक्ति भी मौजूद रहेंगे.

योगी और आध्यात्मिक मार्गदर्शक सद्गुरु के सान्निध्य में होने वाला यह रातभर का आयोजन भक्ति, संगीत, ध्यान और ऊर्जा से भरा होता है. हर साल की तरह इस बार भी यह कार्यक्रम देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के लोगों को जोड़ने वाला आध्यात्मिक उत्सव बनने जा रहा है.

अदियोगी रथ यात्रा की भावनात्मक वापसी: महाशिवरात्रि से कुछ दिन पहले 13 फरवरी की सुबह छह अदियोगी रथ ईशा योग केंद्र पहुंचे. ये रथ तमिलनाडु और कर्नाटक के अलग अलग हिस्सों से लंबी यात्रा पूरी करके आए. अदियोगी रथ बिना मोटर वाले रथ हैं, जिनमें सात फीट ऊंची अदियोगी की प्रतिमा स्थापित रहती है. इन रथों ने हजारों किलोमीटर की यात्रा तय की और अपने साथ लाखों लोगों की आस्था और भावनाएं लेकर लौटे.

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तमिलनाडु के पांच रथों ने करीब 30000 किलोमीटर की दूरी तय की. ये रथ 1000 से ज्यादा गांवों, कस्बों और प्राचीन शिव मंदिरों से होकर गुजरे. वहीं कर्नाटक से निकला रथ करीब 1000 किलोमीटर की यात्रा करते हुए मंगलुरु, मैसूर, चिक्कबल्लापुर और अन्य शहरों से गुजरता हुआ ईशा योग केंद्र पहुंचा. रास्ते में लोगों ने दीप, फूल और भक्ति के साथ रथों का स्वागत किया.

यह रथ यात्रा उन लोगों तक महाशिवरात्रि का संदेश पहुंचाने का तरीका है, जो ईशा योग केंद्र तक नहीं पहुंच पाते. सड़कों और गलियों से गुजरते हुए ये रथ लोगों को महाशिवरात्रि में शामिल होने का निमंत्रण देते हैं.

महाशिवरात्रि की रात क्या होगा खास: 15 फरवरी की शाम 6 बजे से शुरू होने वाला यह 12 घंटे का कार्यक्रम पूरी रात चलेगा. कार्यक्रम की शुरुआत ध्यानलिंग में पंच भूत क्रिया से होगी, जो पांच तत्वों को समर्पित शुद्धिकरण प्रक्रिया है. इसके बाद लिंग भैरवी महायात्रा का भव्य जुलूस निकलेगा, जो दिव्य स्त्री शक्ति का उत्सव है.

रातभर संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी होंगी. गुजराती लोक गायक आदित्य गढ़वी अपनी दमदार प्रस्तुति देंगे. प्रशांत सोनगरा और उनकी टीम पारंपरिक ढोल और लोक संगीत का संगम पेश करेगी. साउंड्स ऑफ ईशा टीम स्वारूप खान, ब्लेज, पैराडॉक्स, स्वगत राठौड़ और पृथ्वी गंधर्व जैसे कलाकारों के साथ मंच साझा करेगी. यह कार्यक्रम परंपरा और आधुनिकता का सुंदर मेल होगा.

महाशिवरात्रि से पहले यक्ष नामक शास्त्रीय संगीत और नृत्य महोत्सव भी आयोजित किया गया, जिसमें कर्नाटक संगीत गायक सिक्किल गुरुचरण, हिंदुस्तानी गायक राहुल देशपांडे और भरतनाट्यम नृत्यांगना मीनाक्षी श्रीनिवासन ने प्रस्तुति दी.

विशेष अनुष्ठान और अदियोगी दिव्य दर्शन: इस साल पहली बार सद्गुरु स्वयं योगेश्वर लिंग महा अभिषेकम का संचालन करेंगे. यह एक पवित्र अनुष्ठान है, जिसमें दुनिया भर के लोग जुड़ सकते हैं. रात का एक प्रमुख आकर्षण अदियोगी दिव्य दर्शनम होगा. 112 फीट ऊंची अदियोगी प्रतिमा पर रोशनी और ध्वनि का विशेष कार्यक्रम होगा, जिसमें सद्गुरु योग की उत्पत्ति की कथा सुनाएंगे.

आधी रात को सद्गुरु महामंत्र दीक्षा देंगे और ब्रह्म मुहूर्त में यानी सुबह करीब 3 बजकर 40 मिनट पर एक विशेष ध्यान सत्र का मार्गदर्शन करेंगे. माना जाता है कि महाशिवरात्रि की रात ग्रहों की स्थिति ऐसी होती है, जो साधना के लिए बेहद अनुकूल होती है.

वैश्विक स्तर पर प्रसारण: यह आयोजन दुनिया भर में 140 मिलियन से ज्यादा दर्शकों तक पहुंचने की उम्मीद है. इसे 100 से अधिक टीवी चैनलों और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर 23 भाषाओं में लाइव प्रसारित किया जाएगा. जो लोग ईशा योग केंद्र नहीं पहुंच सकते, वे ऑनलाइन माध्यम से इस उत्सव का हिस्सा बन सकते हैं.

महाशिवरात्रि को शिव की महान रात कहा जाता है. यह आध्यात्मिक उन्नति का विशेष अवसर माना जाता है. ईशा योग केंद्र, जो वेल्लियंगिरी पर्वत की तलहटी में स्थित है, इस रात को विशेष ऊर्जा का स्थान माना जाता है.

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और अन्य राष्ट्रीय नेताओं की उपस्थिति इस आयोजन को आध्यात्म और सार्वजनिक जीवन के संगम का प्रतीक बना रही है. यह सिर्फ एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक एकता का उत्सव भी है.

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