Tomato Chutney Without Onion-Garlic: सरसों तेल है इस टमाटर की चटनी का हीरो इंग्रीडिएंट, बिना प्याज-लहसुन तैयार!

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Tomato Chutney Without Onion-Garlic: त्योहारों या किसी विशेष पूजा के दिन बिना प्याज-लहसुन की ये चटनी बनाइए, खाने वाले उंगलियां चाटते रह जाएंगे. इससे सिंपल खाने का टेस्ट भी बहुत बढ़ जाता है. इस चटनी को टमाटर भूनकर बनाते हैं और इसका हीरो इंग्रीडिएंट है सरसों का तेल.

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जमशेदपुर. त्योहारों का मतलब सिर्फ पूजा-पाठ या नए कपड़े ही नहीं होता, असली मजा तो उस दिन बनने वाले खास खाने में छिपा रहता है. खासकर झारखंड और बिहार में जब व्रत-त्योहार, पूजा या पारिवारिक मांगलिक काम होता है, तब एक नियम लगभग हर घर में माना जाता है — उस दिन प्याज-लहसुन का इस्तेमाल नहीं किया जाता. लेकिन स्वाद कम नहीं होता, बल्कि कई बार उससे भी ज्यादा बढ़ जाता है. उसी का सबसे बढ़िया उदाहरण है देसी अंदाज में बनने वाली भुनी टमाटर की चटनी.

यह चटनी किसी होटल या रेसिपी बुक की देन नहीं, बल्कि गांव-घर की रसोई से निकली ऐसी परंपरा है जो पीढ़ियों से चलती आ रही है. बनाने का तरीका भी बेहद सरल है, लेकिन स्वाद ऐसा कि गरम भात (चावल), रोटी या खिचड़ी — सब कुछ इसके आगे फीका लगने लगे.

सबसे पहले भूनिए लाल-लाल टमाटर
सबसे पहले अच्छे पके लाल टमाटर चुन लिए जाते हैं. इन्हें साफ पानी से धोकर चूल्हे की धीमी आंच, गैस या अंगीठी पर चारों तरफ से धीरे-धीरे भुना जाता है. जब टमाटर नरम होकर हल्का-सा फटने लगे और ऊपर की त्वचा काली पड़ जाए, तभी समझिए असली खुशबू निकल चुकी है. इसके बाद टमाटर को थोड़ा ठंडा कर उसका जला हुआ छिलका सावधानी से उतार लिया जाता है.

अब बारी आती है असली देसी तरीके की. हरी मिर्च को बारीक काटकर सिलबट्टे या हाथ से ही महीन पीसा जाता है. मिक्सर का इस्तेमाल यहां कम ही किया जाता है, क्योंकि हाथ से पीसने पर जो खुशबू और स्वाद आता है, वह मशीन में कहां! फिर उसी में भुना हुआ टमाटर डालकर अच्छी तरह मसल दिया जाता है.

सरसों का तेल है गेम चेंजर
इसके बाद स्वाद के अनुसार सेंधा नमक या साधारण नमक डाला जाता है और ऊपर से 2-4 बूंद कच्चा सरसों का तेल. बस, यही वह खास चीज है जो चटनी को साधारण से लाजवाब बना देती है.अंत में चटनी तैयार होने पर ऊपर से फिर थोड़ा सरसों का तेल डाल दिया जाता है — खुशबू ऐसी उठती है कि घर के लोग रसोई में झांकने लगते हैं.

थाली में गरम-गरम भात, दाल या आलू-भुजिया के साथ जब यह चटनी परोसी जाती है, तो त्योहार का स्वाद दोगुना हो जाता है. सच मानिए, इस सादगी भरी चटनी में ही गांव-घर का असली प्यार और त्योहार की रौनक बसती है. एक बार खा लिया, तो हर पूजा-पर्व पर इसे बनाने की फरमाइश खुद ही होने लगेगी.

About the Author

Raina Shukla

बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें

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