30 साल पुरानी फिल्म, जिसे दुनियाभर में मिली शोहरत, मगर भारत में लगा बैन, एआर रहमान ने कर दिया था रिजेक्ट

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साल 1996 की फिल्म भारतीय सिनेमा के इतिहास की उन सबसे विवादित मूवीज में से है, जिसने पूरी दुनिया में तहलका मचा दिया था. मशहूर डायरेक्टर मीरा नायर के निर्देशन में बनी इस कहानी में 16वीं सदी के भारत की एक ऐसी दास्तां दिखाई गई, जिसे हमारे देश के सेंसर बोर्ड ने मर्यादा के खिलाफ मानकर बैन कर दिया था. दिलचस्प बात यह है कि जहां भारत में इस पर पाबंदी लगी, वहीं इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल्स में इसे खड़े होकर तालियां मिलीं. दिल जीत लेना वाला संगीत और प्यार व जुनून की एक ऐसी बेबाक कहानी, जिसे आज भी लोग छिप-छिपकर देखते हैं.

नई दिल्ली. मीरा नायर की फिल्म कामसूत्र: ए टेल ऑफ लव’ (1996) महज एक फिल्म नहीं, बल्कि 16वीं सदी के भारत की एक बेहद खूबसूरत कहानी है. अक्सर लोग इसके नाम से इसे सिर्फ एक बोल्ड फिल्म समझ लेते हैं, लेकिन असल में यह जुनून, धोखे और खुद की तलाश की एक गहरी दास्तां है. करीब 2 घंटे की यह फिल्म राजस्थान के आलीशान महलों और किलों के बीच फिल्माई गई है, जो आपको सीधे राजा-महाराजाओं के उस दौर में ले जाती है.

कहानी दो सहेलियों तारा (सरिता चौधरी) और माया (इंदिरा वर्मा) के इर्द-गिर्द घूमती है. तारा एक राजकुमारी है और माया उसकी दासी, लेकिन बचपन से दोनों का साथ रहा है. कहानी में मोड़ तब आता है जब तारा की शादी राजकुमार राज सिंह (नवीन एंड्रयूज) से होती है, लेकिन राजा का दिल अपनी पत्नी तारा से ज्यादा माया पर आ जाता है और वो उसे अपनी खास दरबारी बना लेता है.

यहीं से शुरू होता है ईर्ष्या, बदले और वर्जित प्रेम का एक ऐसा खेल, जिसमें एक तरफ राजा है और दूसरी तरफ एक मूर्तिकार जय कुमार (रैमोन टिकाराम), जिससे माया को सच्चा जुड़ाव महसूस होता है. यह फिल्म दिखाती है कि कैसे उस दौर में औरतें सत्ता और अपनी इच्छाओं के बीच अपनी जगह बनाती थीं. यह सिर्फ जिस्मानी लगाव की नहीं, बल्कि जज्बातों की एक उलझी हुई और आलीशान कहानी है.

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दिलचस्प बात यह है कि इस फिल्म के संगीत के लिए मीरा नायर की पहली पसंद भारत के दिग्गज कंपोजर एआर रहमान थे. लेकिन रहमान ने इस ऑफर को ठुकरा दिया था. उन्हें लगा कि फिल्म की कहानी और इसके बोल्ड सीन्स उनकी अपनी इमेज और वैल्यूज के साथ मेल नहीं खाते. उस दौर में भारत में पर्दे पर सेक्सुअलिटी को लेकर काफी बंदिशें थी. रहमान के मना करने के बाद यह जिम्मेदारी माइकल डैना ने संभाली. उन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत और पश्चिमी धुनों का ऐसा बेजोड़ मेल तैयार किया कि फिल्म का म्यूजिक अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के दिलों में उतर गया.

भारत में इस फिल्म को लेकर काफी बवाल मचा और आखिरकार इसे बैन कर दिया गया. वजह थी फिल्म के बेहद बोल्ड सीन और राजघरानों की दासियों को दिखाने का बेबाक तरीका. सेंसर बोर्ड और अधिकारियों का मानना था कि यह फिल्म भारतीय संस्कृति और इतिहास को गलत तरीके से पेश करती है. वैसे यह मीरा नायर के लिए यह कोई नई बात नहीं थी, अपनी फिल्म ‘सलाम बॉम्बे!’ के वक्त भी वो ऐसी चुनौतियों का सामना कर चुकी थीं

हैरानी की बात यह है कि जहां भारत में लोग इस फिल्म को नहीं देख पा रहे थे, वहीं विदेशों में इसे हाथों-हाथ लिया गया. इंटरनेशनल ऑडियंस ने फिल्म की बोल्डनेस और इसकी भव्यता की जमकर तारीफ की. यह फिल्म एक मिसाल बन गई कि कैसे एक ही कहानी को दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में बिल्कुल अलग नजरिए से देखा जाता है.

साल 1996 में टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में प्रीमियर होने के बाद ‘कामसूत्र: ए टेल ऑफ लव’ दुनियाभर के कई फिल्म फेस्टिवल्स में दिखाई गई. लेकिन इसे लेकर आलोचकों की राय बंटी हुई थी. कुछ लोग फिल्म की आलीशान सिनेमैटोग्राफी और इसके बोल्ड विषय के मुरीद हो गए, तो वहीं कुछ ने इसे सिर्फ एक मेलोड्रामा या सनसनी फैलाने वाली फिल्म करार दिया.

फिल्म में लीड कलाकारों की एक्टिंग, खासकर इंदिरा वर्मा के काम की जमकर तारीफ हुई. उन्होंने जिस बेबाकी से इस चुनौतीपूर्ण किरदार को निभाया, उसने सबको हैरान कर दिया. अमेरिका और यूरोप में तो इस फिल्म को एक हॉट और एक्सोटिक पीरियड ड्रामा के तौर पर प्रमोट किया गया, जिसने उन विदेशी दर्शकों को खूब लुभाया जो भारतीय संस्कृति को एक अलग और कामुक नजरिए से देखना चाहते थे.

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