‘उम्मीदें तो बड़ी हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर असर जरूरी’… UP बजट को लेकर आम जनता की राय, बताया सही या गलत
ग्रेटर नोएडा: उत्तर प्रदेश का बजट 2026 आकार के लिहाज से अब तक के सबसे बड़े बजटों में से एक बताया जा रहा है. सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर, महिला सशक्तिकरण, कृषि और औद्योगिक विकास पर विशेष जोर देने का दावा किया है. बजट के आंकड़े और घोषणाएं निश्चित रूप से बड़े विजन की ओर इशारा करती हैं, लेकिन आम नागरिकों के बीच इसे लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं. लोगों का कहना है कि उम्मीदें बड़ी हैं, अब नजर इस बात पर है कि इन योजनाओं का असर जमीन पर कितना दिखता है.
ग्रेटर नोएडा निवासी विजय मिश्रा का मानना है कि बजट का आकार बढ़ना सकारात्मक संकेत है. उनके अनुसार, इंफ्रास्ट्रक्चर और महिलाओं के उत्थान पर ध्यान देना जरूरी कदम है. हालांकि वे यह भी कहते हैं कि अगर आम नागरिक के नजरिए से देखें, तो यह बजट काफी हद तक केंद्रीय बजट की पुनरावृत्ति जैसा लगता है. विशेषकर मध्यम वर्ग को जिस प्रकार की राहत की अपेक्षा थी, वह उन्हें इस बजट में भी स्पष्ट रूप से नजर नहीं आई. उनका कहना है कि राज्य स्तर पर कुछ अलग और ठोस पहल की उम्मीद थी.
गांवों में अभी भी बिजली और इंटरनेट की सुविधा नहीं
स्थानीय निवासी प्रीती बजट की घोषणाओं को कागज पर प्रभावी मानती हैं, लेकिन जमीनी हकीकत पर सवाल उठाती हैं. उनका कहना है कि गांवों में अभी भी बिजली और इंटरनेट जैसी बुनियादी सुविधाएं पूरी तरह उपलब्ध नहीं हैं. ऐसे में बच्चों को मोबाइल देना तब तक पूरी तरह उपयोगी नहीं होगा, जब तक डिजिटल ढांचा मजबूत न हो. वे मानती हैं कि किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए बजट में प्रावधान किए गए हैं, लेकिन जरूरत है कि इन योजनाओं का लाभ वास्तव में गांवों तक पहुंचे.
यूपी में तेजी से विकास की जरूरत
वहीं विकास सिंह औद्योगिक विकास के दावों को लेकर संतुलित लेकिन आलोचनात्मक दृष्टिकोण रखते हैं. उनका कहना है कि उद्योग लगाने की घोषणाएं स्वागत योग्य हैं, लेकिन आम लोगों को जमीन पर बड़े बदलाव स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दे रहे. वे मानते हैं कि यदि औद्योगिक निवेश को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए, तो रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बड़ा फायदा मिल सकता है. साथ ही उन्होंने अन्य राज्यों के मॉडल से तुलना करते हुए कहा कि यूपी में अभी और तेजी से काम करने की आवश्यकता है.
किसानों को राहत की जरूरत
स्थानीय निवासी पंकज नागर बजट को संतुलित नजरिए से देखते हैं. उनके अनुसार, इस बार किसानों के लिए बजट में बढ़ोतरी की गई है, जो सकारात्मक पहल है. हालांकि वे 30 रुपए प्रति क्विंटल की दर वृद्धि को मामूली मानते हैं और कहते हैं कि किसानों को और अधिक ठोस राहत की जरूरत है. स्वास्थ्य क्षेत्र में नए मेडिकल कॉलेज खोलने की अपेक्षा थी, लेकिन फिलहाल पुराने अस्पतालों को दुरुस्त करने पर जोर दिया गया है. उनका मानना है कि यह भी जरूरी कदम है, लेकिन बढ़ती आबादी और जरूरतों को देखते हुए नए संस्थानों की स्थापना पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाना चाहिए.