‘सुप्रीम कोर्ट में थूकना पड़ेगा महंगा?’ पान मसाला खाने वालों की तो खैर नहीं, सख्त फरमान जारी

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‘SC में थूकना पड़ेगा महंगा?’ पान मसाला खाने वालों की तो खैर नहीं, सख्त फरमान

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सुप्रीम कोर्ट एडमिनिस्ट्रेशन ने कोर्ट परिसर में पान मसाला, गुटखा और तंबाकू प्रोडक्ट्स चबाने और थूकने के खिलाफ सख्त चेतावनी जारी की है. एक सर्कुलर में बताया गया है कि वॉशबेसिन और कोनों में थूकने से पानी ब्लॉक हो जाता है. इससे इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है. नोटिस में सभी बिल्डिंग यूजर्स से साफ-सफाई बनाए रखने की अपील की गई है.

'SC में थूकना पड़ेगा महंगा?' पान मसाला खाने वालों की तो खैर नहीं, सख्त फरमानZoom

सुप्रीम कोर्ट ने परिसर में पान मसाला खाने और थूकने पर लगाया रोक.

Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) परिसर में पान मसाला या गुटखा चबाकर इधर-उधर थूकने वालों के लिए बुरी खबर है. सुप्रीम कोर्ट प्रशासन ने एक सख्त चेतावनी जारी की है. कोर्ट ने ऐसे लोगों को अपनी आदत सुधारने की नसीहत दी है. गुरुवार को वेबसाइट पर प्रकाशित एक नोटिस में कहा गया है कि कोर्ट परिसर में थूकने से न सिर्फ गंदगी फैलती है, बल्कि संक्रमण (Infection) का खतरा भी बढ़ता है.

11 फरवरी को जारी इस सर्कुलर में बताया गया है कि कोर्ट की बिल्डिंग इस्तेमाल करने वाले कुछ लोग पान मसाला और गुटखा चबाकर दीवारों के कोनों, वॉश बेसिन और यहां तक कि पीने के पानी की जगहों पर थूक देते हैं. इस गंदी आदत की वजह से न केवल पानी की निकासी (Water Blockage) रुक जाती है, बल्कि संक्रमण फैलने का भी डर बना रहता है. असिस्टेंट रजिस्ट्रार (Assistant Registrar) की ओर से जारी इस निर्देश में सभी संबंधित लोगों से अपील की गई है. परिसर में पान मसाला, गुटखा या तंबाकू थूकने से बचें और साफ-सफाई बनाए रखने की अपील की गई है.

गुटखा-पान मसाला पर बैन

आपको बता दें कि भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने 9 अक्टूबर 2017 को ही एक निर्देश जारी कर तंबाकू और निकोटीन वाले गुटखा और पान मसाला के निर्माण और बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया था. खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत किसी भी खाद्य उत्पाद में तंबाकू या निकोटीन का इस्तेमाल वर्जित है.

टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल के हेड और नेक सर्जन डॉ. पंकज चतुर्वेदी ने कहा कि गुटखा और पान मसाला पर FSSAI का बैन, जिसे सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर का सपोर्ट है, एक अच्छा कदम है, क्योंकि पहले सिर्फ़ राज्य सरकारें/UTs ही तंबाकू और/या निकोटीन वाले गुटखा और पान मसाला की मैन्युफैक्चरिंग और बिक्री पर बैन लगाने के ऑर्डर जारी कर रही थीं.

कमी आई है

उन्होंने बताया कि 2016-17 में किए गए ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे के नतीजे में पता चला था कि अभी 29.6 परसेंट पुरुष, 12.8 परसेंट महिलाएं और 21.4 परसेंट सभी एडल्ट स्मोकलेस तंबाकू का इस्तेमाल करते हैं. हालांकि, सरकार की तरफ से उठाए गए कदम जैसे गुटखा, पान मसाला (तंबाकू और निकोटीन के साथ) जैसे कुछ तरह के स्मोकलेस तंबाकू प्रोडक्ट्स पर बैन लगाने की वजह से, तंबाकू इस्तेमाल करने वालों की संख्या में कम से कम 81 लाख रुपये की कमी आई है.

About the Author

Deep Raj Deepak

दीप राज दीपक 2022 में न्यूज़18 से जुड़े. वर्तमान में होम पेज पर कार्यरत. राजनीति और समसामयिक मामलों, सामाजिक, विज्ञान, शोध और वायरल खबरों में रुचि. क्रिकेट और मनोरंजन जगत की खबरों में भी दिलचस्पी. बनारस हिंदू व…और पढ़ें

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