गर्व से चौड़ा हुआ सीना! ब्रिटेन के फाइटर पायलटों के ‘गुरु’ बनेंगे भारतीय, RAF ‘टॉप गन’ को ट्रेंड करेंगे वायुवीर
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IAF RAF News: नई व्यवस्था के तहत भारतीय वायुसेना के तीन क्वालिफाइड फ्लाइट इंस्ट्रक्टर ब्रिटेन के RAF वैली बेस पर तैनात किए जाएंगे. RAF वैली वही ट्रेनिंग बेस है, जहां ब्रिटेन के फास्ट जेट पायलटों को प्रशिक्षण दिया जाता है. यह पहली बार होगा जब भारतीय प्रशिक्षक ब्रिटिश पायलटों को फास्ट जेट की ट्रेनिंग देंगे. इनकी तैनाती शुरुआती तौर पर दो साल के लिए होगी. इससे पहले जनवरी में पहली बार भारतीय वायुसेना के एक अधिकारी को RAF कॉलेज क्रैनवेल में इंस्ट्रक्टर के रूप में भेजा गया था. अब ब्रिटेन की तीनों सैन्य अकादमियों में भारतीय अधिकारी प्रशिक्षक के तौर पर मौजूद हैं.

भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच सैन्य सहयोग को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. (एआई)
नई दिल्ली. इतिहास ने एक बार फिर करवट ली है. जिस देश ने कभी भारत पर राज किया था, आज उसी देश के लड़ाकू पायलटों को भारतीय वायुसेना (IAF) के अधिकारी फाइटर जेट उड़ाना सिखाएंगे. 12 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच हुई 19वीं ‘एयर स्टाफ वार्ता’ में यह ऐतिहासिक फैसला लिया गया है. यह खबर भारतीय सैन्य कौशल के डंके की तरह है जो अब पूरी दुनिया में बज रहा है. नए समझौते के तहत, भारतीय वायुसेना के तीन क्वालिफाइड फ्लाइट इंस्ट्रक्टर (QFI) अब ब्रिटेन के RAF वैली बेस पर तैनात होंगे, जो वहां की रॉयल एयर फोर्स (RAF) की रीढ़ माना जाता है.
RAF वैली: जहां तैयार होते हैं ब्रिटेन के ‘टॉप गन’
यह कोई साधारण तैनाती नहीं है. RAF वैली वही बेस है जहां ब्रिटेन के सबसे तेज तर्रार ‘फास्ट जेट पायलट’ तैयार किए जाते हैं. इतिहास में यह पहली बार होगा जब भारतीय इंस्ट्रक्टर ब्रिटिश पायलटों को फास्ट जेट (Fast Jet) की ट्रेनिंग देंगे. भारतीय अधिकारियों की यह तैनाती शुरुआती तौर पर दो साल के लिए होगी. यह दिखाता है कि ब्रिटेन को भारतीय पायलटों की काबिलियत और ट्रेनिंग स्टैंडर्ड्स पर कितना भरोसा है.
तीनों अकादमियों में भारतीय ‘गुरु’
जनवरी में भी एक बड़ी खबर आई थी जब पहली बार IAF के एक अधिकारी को RAF कॉलेज क्रैनवेल में इंस्ट्रक्टर बनाया गया था. लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है. अब स्थिति यह है कि ब्रिटेन की तीनों प्रमुख सैन्य अकादमियों में भारतीय अधिकारी ‘प्रशिक्षक’ (Instructor) के तौर पर मौजूद हैं. चाहे वह आर्मी हो, नेवी हो या एयरफोर्स, भारतीय सैन्य अधिकारी अब ब्रिटिश कैडेट्स को अनुशासन और युद्ध कौशल का पाठ पढ़ा रहे हैं.
सैन्य कूटनीति का नया अध्याय
यह फैसला सिर्फ ट्रेनिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की बढ़ती ‘सॉफ्ट पावर’ और रणनीतिक महत्व का सबूत है. भारत और ब्रिटेन के बीच रक्षा सहयोग अब सिर्फ हथियारों की खरीद-फरोख्त तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह ‘पार्टनरशिप’ और ‘नॉलेज शेयरिंग’ के लेवल पर पहुंच गया है. भारतीय वायुसेना के पास सुखोई से लेकर राफेल और तेजस तक उड़ाने का जो विविध अनुभव है, अब उसका फायदा ब्रिटिश रॉयल एयर फोर्स को भी मिलेगा.
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राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें