ravi kana noida scrap mafia: ravi kana criminal history : mafia ravi kana millionaire girlfriend kajal jha news : up police | कौन है गैंगस्टर रवि काना, जरायम की दुनिया का नया बादशाह? जानें माफिया और उसकी करोड़पति गर्लफ्रेंड की अनकही कहानी

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नोएडा. पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अपराध जगत में रवि काना एक ऐसा नाम बन गया है, जिसने पुलिस और प्रशासन की नींद उड़ा रखी है. बांदा जेल से 29 जनवरी को विवादित रिहाई के बाद काना फिर चर्चा में है. नोएडा पुलिस उसे टॉर्च लेकर ढूंढ ही रही थी कि उसने अदालत से अग्रिम जमानत ले ली. अब यूपी पुलिस के सामने चुनौती यह है कि रवि काना को कैसे फिर से सलाखों के पीछे पहुंचाया जाए? रवि काना, जिसका असली नाम रविंद्र नागर है, ग्रेटर नोएडा के दादरी इलाके के बादलपुर गांव का रहने वाला है. कभी वह अपने भाई हरेंद्र प्रधान के साये में रहकर छोटे-मोटे काम करता था, लेकिन भाई की हत्या के बाद रवि ने अपराध की दुनिया में ऐसा मुकाम हासिल किया, जिसकी कल्पना भी मुश्किल है. जानिए रवि काना कबाड़ के धंधे से कैसे करोड़पति बन गया? कैसे काना ने 500 करोड़ का विशाल साम्राज्य खड़ा कर लिया? और उसकी कथित गर्लफ्रेंड काजल झा अब कहां है, जिसके साथ वह थाईलैंड भागा था?

रवि काना पिछले कुछ दिनों से अचानक फिर से चर्चा में आ गया है. बुधवार को ही रवि काना मामले में नोएडा पुलिस को बड़ा झटका लगा है. ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर में स्थित जनपद न्यायालय ने रवि काना को अग्रिम जमानत दे दी है. रवि काना को अग्रिम जमानत मिलने से नोएडा कमिश्नरेट पुलिस को बहुत बड़ा झटका लगा है. जिला न्यायालय से अग्रिम जमानत मिलने के बाद रवि काना की गिरफ्तारी पर संशय पैदा हो गया है. क्योंकि गैंगस्टर रवि काना ने बांदा जेल से 29 जनवरी को रिहा होने के बाद गिरफ्तारी से बचने के लिए न्यायालय में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी.

कबाड़ के धंधे से रवि काना कैसे बना करोड़पति?

रवि काना का उदय 8-10 साल पहले नोएडा और ग्रेटर नोएडा की बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियों से निकलने वाले लोहे और अन्य स्क्रैप के ठेकों से हुआ. वह बड़ी कंपनियों को डरा-धमकाकर स्क्रैप यानी कबाड़ के ठेके औने-पौने दामों पर लेता था. अगर कोई कंपनी उसे ठेका देने से मना करती, तो उसकी गाड़ियों को रास्ते में रोक लिया जाता या उसके मैनेजरों को जान से मारने की धमकी दी जाती. धीरे-धीरे उसने कई फर्जी कंपनियां बनाईं और अपनी अवैध कमाई को सफेद करने लगा.

कैसे आई काजल झा रवि काना के संपर्क में?

जो लड़की नौकरी मांगने आई थी, वही बन गई गर्लफ्रेंड

इस बीच रवि काना के संपर्क में काजल झा नाम की एक लड़की आई. कबाड़ से करोड़पति बनने के सफर में काना की सबसे विश्वस्त सहयोगी बन गई काजल झा. इस दौरान काना के कई नेताओं से संबंध बने. अपनी भाभी बेबन नागर को काना ने इलेक्शन में भी खड़ा किया. लेकिन काना के जिंदगी में काजल झा के आने के बाद अचानक सितारा बुलंद होने लगा. कहा जाता है कि दिल्ली की न्यू फ्रेंड्स कॉलनी में रहने वाली काजल झा कभी नौकरी के लिए काना के पास आई थी. बाद में काजल झा रवि काना की इनती भरोसेमंद हो गई कि वह पार्टनर बन गई. काजल और रवि की नजदीकियां परिवार को सही नहीं लग रही थी. काजल रवि के काले धंधे पर सलाह देने लगी. बाद में वह भी काले कारनामों में काना की साझेदार बन गई. नोएडा पुलिस के चार्जशीट में इस बात का जिक्र है.

रवि काना के खिलाफ कितने मामले?

रवि काना के खिलाफ दर्जनों मामले दर्ज हैं. रवि काना पर गैंगरेप का भी मामला नोएडा के सेक्टर 39 थाने में दर्ज हो रखा है. दो साल पहले एक लड़की ने रवि काना और उसके 6 साथी पर दुष्कर्म का आरोप लगाया था. काना की गिरफ्तारी के बाद नोएडा पुलिस ने गैंगस्टर की गौतमबुद्धनगर, बुलंदशहर औऱ दिल्ली के करीब 350 करोड़ रुपये की संपत्ति सील की है. उत्तर प्रदेश के बुलंद शहर में काना ने 40 बीघे जमीन अवैध कमाई से खरीदी थी, उसे भी सील कर दिया गया है.

कबाड़ कारोबारी कैसे बना करोड़पति?

काजल और काना की जोड़ी क्या अभी भी साथ है?

काजल केवल रवि की साथी नहीं थी, बल्कि उसके पूरे साम्राज्य की फाइनेंशियल ब्रेन थी. वह रवि के बेनामी निवेश, पैसों का लेन-देन और कंपनियों के कागजी कामकाज संभालती थी. दिल्ली की रहने वाली काजल रवि के इतने करीब थी कि माफिया ने उसे करोड़ों का आलीशान बंगला और लग्जरी गाड़ियां तोहफे में दे रखी थीं. जब यूपी पुलिस ने रवि पर शिकंजा कसा, तो काजल ही वह शख्स थी जो उसे बचाने के लिए दांव-पेच खेल रही थी. काजल को पुलिस ने लेडी डॉन का नाम दिया क्योंकि वह गिरोह के पुरुषों को भी निर्देश देती थी.

साल 2024 की शुरुआत में नोएडा पुलिस ने रवि काना और उसके 16 गुर्गों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया. जब पुलिस ने उसकी संपत्तियों को कुर्क करना शुरू किया तो रवि काना अपनी गर्लफ्रेंड काजल झा के साथ देश छोड़कर भाग गया. वह गर्लफ्रेंड के साथ बैंकॉक में में छिपकर रह रहा था और वहीं से अपना धंधा ऑपरेट करने की कोशिश कर रहा था. हालांकि, नोएडा पुलिस और इंटरपोल के बढ़ते दबाव के चलते उसे और काजल झा को दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार कर लिया.

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