पाकिस्तान नहीं, टी-20 वर्ल्डकप में ओस है भारत की सबसे बड़ी दुश्मन, इन टीमों पर भी असर

Share to your loved once


रात 9 बजे क बाद तो हालात यह हो जाते हैं कि गेंदबाज को पकड़ बनाने तक में मुसीबत होती है. सुनील गावस्कर, महेंद्र सिंह धोन, रिकी पोटिंग समेत दिग्गज क्रिकेटर लगातार इसे लेकर सवाल उठाते रहे हैं. विश्व कप में ये ज्यादा मुसीबत भरा इसलिए है, क्योंकि विश्व कप के ज्यादा मैच मुंबई, कोलकाता, कोलंबो चेन्नई समेत ऐसे मैदानों पर है जहां नमी और ओस दोनों ज्यादा होती हैं.

shubman gill, shubman gill reaction, shubman gill statement after odi series loss, india vs new Zealand, ind vs nz, shubman gill virat kohli, shubman gill statement virat kohli, shubman gill disappoint, शुभमन गिल, भारत बनाम न्यूजीलैंड, शुभमन गिल रिएक्शन

गेंदबाजी: ओस का सबसे ज्यादा प्रभाव गेंदबाजी कर रही टीम पर पड़ता है, गेंद गीली होने की वजह से पकड़ कमजोर हो जाती है, जिससे वे अपनी उंगलियों पर गेंद नहीं घुमा पाते. खासतौर से स्पिनर के तो ये और भी चुनौतीपूर्ण होता है. गुगली, कैरम बॉल या लेग स्पिन बेसअर हो जाती है. बॉल फिसलने की वजह से तेज गेंदबाजों को भी परेशानी होती है. बॉल फिसने की वजह से गुगली, कैरम बॉल या लेग स्पिन बेअसर हो जाती है.तेज गेंदबाजों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है. सीम की पकड़ न होने से स्विंग गेंदबाजी भी प्रभावित होती है.

फील्डिंग: ओस की वजह से फील्डिंग में भी परेशानी होती है, गीली गेंद को रोकना, सटीक थ्रो करना मुश्किल तो होता है कई बार कैच भी ड्रॉप हो जाते हैं. बाउंड्री लाइन के पास घास और नमी की वजह से गेंद की रफ्तार तो धीमी हो जाती है, लेकिन उसे रोकना फील्डर के लिए बेहद मुश्किल हो जाता है. ओस पहले ही बल्लेबाजों के लिए वरदान साबित होती है, गेंद पर पकड़ कमजोर होने से गति कम हो जाती है, जिससे बल्लेबाजों को शॉट खेलने में ज्यादा समय मिलता है. यही वजह है कि दूसरी पारी में रन बनाना आसान हो जाता है.

ओम की समस्या से नपिटने के लिए खिलाड़ियों को कई उपाय करने पड़ते हैं. इनमें सबसे पहले तो बॉल को बार बार सुखाना है. इसके लिए तौलिए का प्रयोग किया जाता है. कप्तान और गेंदबाज लगातार अंपायर से नई गेंद की मांग करते हैं. हालांकि नियमों के मुताबिक ऐसा पॉसिबिल नहीं होता. इसके अलावा गेंदबाजी में भी बदलाव करना पड़ता है. ओस के कारण स्पिनर गेंदबाजों की भूमिका सीमित हो जाती है. कप्तान तेज गेंदबाजों पर ज्यादा भरोसा करते हैं, हालांकि उन्हें भी दिक्कत होती हैं. गेंद की लंबाई में भी फेरबदल करना पड़ता है. यॉर्कर फेंकना मुश्किल हो जाता है क्योंकि गीली गेंद हाथ से फिसल सकती है. इसलिए गेंदबाज शॉर्ट लेंथ गेंदें फेंकते हैं.

T20 World Cup

आईसीसी टी20 विश्व कप की डिफेंडिग टीम है भारत

ओस का मैच पर खतरा हो तो यह तय हो जाता है कि टॉस ही जीत हार तय करेगा. दरअसल ज्यादातर टीमें ओस से बचने के लिए पहले गेंदबाजी चुनती हैं. पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम को सूखी पिच मिलती है, मगर दूसरी पारी में ओस गेंदबाजों की मुश्किल बढ़ा देती है.टी-20 वर्ल्डकप में तीन मैचों में ऐसा हो चुका है, जहां ओस मुसीबत बनी, इनमें भारत और यूएसए के बीच मुकाबले में यूएसए ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी की.

बेशक भारत ने मैच को 29 रन से जीत लिया, मगर यूएसए ने भारतीय गेंदबाजों को काफी परेशान किया. इसी तरह श्रीलंका और आयरलैंड के मैच में हुआ जहां आयरलैंड पहले गेंदबाजी चुनी. मैच को श्रीलंका सिर्फ 20 रन से जीत सका. इंग्लैंड से टॉस के बाद फैसला लेने में गलती हुई, उसने बल्लेबाजी चुनी, लिहाजा नेपाल जैसी टीम ने भी उसे चौंका दिया और टीम महज 4 रन से ही जीत हासिल कर पाई.

मुझे फिर चिंता है, मैं ओस से नफरत करता हूं. ओस बहुत कुछ बदल देती है. जब मैं खेलता था, तब भी ओस मुझे सबसे ज्यादा डराती थी, जहां टॉस बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है.
– महेंद्र सिंह धोनी, वर्ल्डकप से पहले एक कार्यक्रम में

ओस की वजह से खेल की सुंदरता खत्म हो रही है, खासकर हाल ही के टी-20 मैचों में इसका असर देखा गया है.
– रविचंद्रन अश्विन, पूर्व भारतीय स्पिनर

Suryakumar Yadav

USA पर जीत के बाद कप्तान सूर्यकुमार यादव

ओस हमारे कंट्रोल में नहीं है, इसीलिए हम उसे गंभीरता से नहीं लेते, हम सिर्फ तैयारी और प्लान पर फोकस करते हैं.
-सूर्य कुमार यादव, भारतीय T20 कप्तान

ओस टी20 क्रिकेट में एक अनुचित फैक्टर बन गया है. टॉस जीतना लगभग मैच जीतने के बराबर हो गया है, जो खेल की भावना के खिलाफ है। ICC को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए.
– सुनील गावस्कर, पूर्व भारतीय कप्तान

अगर मैच दोपहर 3 बजे शुरू हों और शाम 7 बजे तक खत्म हो जाएं, तो ओस की समस्या नहीं होगी, लेकिन टेलीविजन प्रसारण के कारण रात के मैच जरूरी है.
– रिकी पोंटिंग, ऑस्ट्रेलियाई दिग्गज

ricky ponting

अगर गेंद पूरी तरह गीली हो जाए, तो अंपायर को अपने विवेक से गेंद बदलने का अधिकार होना चाहिए. साथ ही, मैदान पर अतिरिक्त तौलिए रखने की सुविधा भी बढ़ानी चाहिए.
– वसीम अकरम, पूर्व क्रिकेटर, पाकिस्तान

img

खबरें पढ़ने का बेहतरीन अनुभव

QR स्कैन करें, डाउनलोड करें News18 ऐप या वेबसाइट पर जारी रखने के लिए यहां क्लिक करें

QR Code

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

GET YOUR LOCAL NEWS ON NEWS SPHERE 24      TO GET PUBLISH YOUR OWN NEWS   CONTACT US ON EMAIL OR WHATSAPP