first copy of showroom nike adidas skechers shoes prices | delhi police revealed big secret | delhi police | नाइकी, एडिडास और स्केचर्स जूते की यहां मिलती थी फर्स्ट कॉपी, दिल्ली पुलिस पहुंची तो खुल गया बड़ा राज

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नई दिल्ली.  क्या आप भी ब्रांडेड कंपनियों के जूते पहनने के शौकीन हैं? अगर हां तो यह खबर आपको होश उड़ा सकता है. क्योंकि, दिल्ली में बड़े-बड़े कंपनियों के लोगो लगा नकली जूते बिक रहे हैं. दिल्ली पुलिस ने राजधानी में ब्रांडेड जूतों के नाम पर चल रहे एक बड़े फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ किया है. दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने ब्रांडेड कंपनी नाइकी, एडिडास और स्केचर्स कंपनियों के फर्स्ट कॉपी के नाम पर आम जनता की जेब काटने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है. इस रेड में दो आरोपी गिरफ्तार हुए हैं. इनके पास से नाइकी, एडिडास और स्केचर्स के हजारों जूते बरामद किए हैं.  दिल्ली पुलिस को पिछले कुछ दिनों से राजधानी के कई इलाकों में ब्रांडेड जूतों के नाम पर नकली जूते बनाने वाली फैक्ट्री की लगातार शिकायत मिल रही थी. इसके बाद क्राइम ब्रांच की एंटी-एक्सटॉर्शन एंड किडनैपिंग सेल ने नांगलोई और मंडोली एक्सटेंशन में छापेमारी कर न केवल आरोपियों को दबोचा, बल्कि भारी मात्रा में मशीनों और कच्चे माल की भी बरामदगी की है.

पुलिस ने बताया कि इस जांच की शुरुआत तब हुई जब संदीप सिंह नामक व्यक्ति को सोनिया विहार इलाके से गिरफ्तार किया गया था. संदीप नाइकी, एडिडास और स्केचर्स जैसे बड़े ब्रांडों के नकली जूते बनाने की यूनिट चला रहा था. उससे पूछताछ के दौरान पुलिस को पता चला कि यह धंधा केवल एक जगह तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक पूरा तकनीकी और असेंबलिंग नेटवर्क काम कर रहा है.

इस गिरोह का सरगना शातिर दिमाग वाला

क्राइम ब्रांच के डीसीपी संजीव कुमार यादव के निर्देशन और एसीपी पंकज अरोड़ा की देखरेख में इंस्पेक्टर अमित सोलंकी की टीम ने जाल बिछाया. पुलिस की टीम ने नांगलोई और मंडोली के विभिन्न ठिकानों पर छापेमारी की, जिसके बाद इदु अंसारी उर्फ राजू और पिंटू नामक दो व्यक्तियों को हिरासत में लिया गया. नांगलोई से गिरफ्तार हुआ 30 वर्षीय इदु अंसारी उर्फ राजू इस रैकेट का तकनीकी मास्टरमाइंड माना जा रहा है. 12वीं तक पढ़ा इदु पेशे से एक ग्राफिक डिजाइनर है. उसका काम अंतरराष्ट्रीय ब्रांडों जैसे नाइकी, न्यू बैलेंस और एडिडास के जूतों के लोगो और डिजाइन की नकल करना था. वह कंप्यूटर सॉफ्टवेयर की मदद से नकली डाई तैयार करता था, जिसका उपयोग जूतों पर ब्रांड का नाम छापने के लिए किया जाता था.

ऑनलाइन कर लेता था नकल

पुलिस ने इदु के पास से एक पूरा कंप्यूटर सिस्टम बरामद किया है, जिसमें ब्रांडेड जूतों के डिजिटल स्केच और डिजाइन मौजूद थे. इसके अलावा, डाई बनाने वाली दो भारी औद्योगिक मशीनें और दो पेन ड्राइव भी जब्त की गई हैं. इदु पहली बार पुलिस की गिरफ्त में आया है, लेकिन उसकी डिजाइनिंग स्किल ने इस नकली कारोबार को असली जैसा दिखने में बड़ी मदद की थी.

दिल्ली पुलिस ने इन इलाकों में की छापेमारी

जांच का दूसरा हिस्सा मंडोली एक्सटेंशन पहुंचा, जहां 40 वर्षीय पिंटू अपनी एक असेंबलिंग और फिनिशिंग यूनिट चला रहा था. पिंटू अपनी जूते की दुकान की आड़ में इस अवैध काम को अंजाम दे रहा था. वह अलग-अलग जगहों से आए सोल, अपर और स्टिकर को असेंबल कर उन्हें मार्केट में बिकने लायक फिनिशिंग देता था. पिंटू को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस ने उसके ठिकाने से हजारों की संख्या में जूतों के हिस्से बरामद किए हैं.

भारी मात्रा में सामान बरामद

पुलिस की इस रेड में जो बरामदगी हुई है, उसने अधिकारियों को भी हैरान कर दिया. पिंटू के पास से नाइकी के 80 जोड़े जूते, 2100 जोड़े सोल और 3000 स्टिकर मिले. वहीं एडिडास के 63 जोड़े जूते और 1900 स्टिकर बरामद हुए. स्केचर्स ब्रांड के नाम पर 300 जोड़े जूते और 6300 स्टिकर जब्त किए गए. इसके अलावा न्यू बैलेंस के जूते और अपर भी मिले हैं. पुलिस ने जूते चिपकाने वाली मशीन, कंप्रेसर मशीन और हीटर मशीन सहित अन्य उपकरण भी अपने कब्जे में ले लिए हैं.

दिल्ली पुलिस का एक्श

दिल्ली पुलिस ने बताया कि ये आरोपी कॉपीराइट एक्ट और धोखाधड़ी की धाराओं के तहत कार्रवाई का सामना कर रहे हैं. इस तरह के नकली उत्पादों से न केवल असली कंपनियों को करोड़ों का घाटा होता है, बल्कि सरकार को मिलने वाले टैक्स की भी चोरी की जाती है. सबसे बड़ी बात यह है कि कम गुणवत्ता वाले इन नकली जूतों को लोग असली समझकर महंगे दामों पर खरीदते हैं.

क्राइम ब्रांच अब इस बात की जांच कर रही है कि इन नकली जूतों की सप्लाई दिल्ली के किन बड़े बाजारों जैसे करोल बाग या गफ्फार मार्केट में की जा रही थी. साथ ही, पुलिस उन कड़ियों को भी तलाश रही है जो कच्चा माल इन फैक्ट्रियों तक पहुंचाते थे. पुलिस का कहना है कि आने वाले दिनों में कुछ और गिरफ्तारियां संभव हैं.

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