Saturday Beliefs shanivar ko ullu dikhna shubh ya ashubh । शनिवार को उल्लू दिखना शुभ या अशुभ
Saturday Beliefs : शनिवार की सुबह हो या शाम, अगर अचानक रास्ते में उल्लू दिख जाए तो अक्सर लोग ठिठक जाते हैं. मन में सवाल उठता है “कहीं कुछ बुरा तो नहीं होने वाला?” बचपन से सुनते आए किस्से, पड़ोसियों की बातें और लोकधारणाएं तुरंत याद आने लगती हैं. लेकिन क्या वाकई शनिवार को उल्लू दिखना अशुभ होता है? या फिर हम बिना समझे एक प्राकृतिक संकेत को डर का रूप दे देते हैं? असल में शास्त्रों, ज्योतिष और परंपराओं में उल्लू की छवि इतनी नकारात्मक नहीं है, जितनी आम बातचीत में बना दी गई है. शनिवार और शनि देव से जुड़े संकेतों को अगर सही नजरिये से समझा जाए, तो यह डर नहीं, बल्कि ठहरकर सोचने और खुद को सुधारने का संदेश देता है. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा.
शास्त्रों में उल्लू का स्थान क्या कहता है?
शनि देव और उल्लू का संबंध
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उल्लू को शनि देव का वाहन माना जाता है. शनि देव कर्म, न्याय और अनुशासन के प्रतीक हैं. वह तुरंत फल नहीं देते, बल्कि समय लेकर कर्मों का परिणाम सामने लाते हैं. ऐसे में उल्लू का दिखना यह संकेत देता है कि इंसान को अपने काम, फैसलों और जिम्मेदारियों पर ईमानदारी से नजर डालनी चाहिए.
अंधेरे में देखने की क्षमता का प्रतीक
उल्लू रात में सक्रिय रहता है और अंधेरे में भी साफ देख सकता है. यही गुण उसे सतर्कता और गहराई से देखने का प्रतीक बनाता है. शास्त्रों में इसे छिपे हुए सच को पहचानने और भ्रम से बाहर निकलने की सीख के रूप में देखा जाता है.
ज्ञान, विवेक और धैर्य का संकेत
कई परंपराओं में उल्लू को केवल डर से नहीं, बल्कि बुद्धि से जोड़ा गया है. यह याद दिलाता है कि हर स्थिति को भावनाओं में बहकर नहीं, बल्कि विवेक से समझना चाहिए. खासकर शनिवार को दिखना यह बताता है कि जल्दबाजी से बचें और धैर्य रखें.
शनिवार को उल्लू दिखने का असली अर्थ
शनिवार को उल्लू दिखना किसी अनहोनी की चेतावनी नहीं है. इसे एक संकेत की तरह देखा जाता है, जो जीवन की रफ्तार थोड़ी धीमी करने की सलाह देता है.
यह बताता है कि:
-किसी बड़े फैसले से पहले सोच-विचार जरूरी है
-अपने कर्म और व्यवहार की समीक्षा करें
-ईमानदारी और संयम बनाए रखें
-गलत रास्तों और शॉर्टकट से दूरी रखें
दरअसल, यह शनि देव की तरह “रुकिए और सोचिए” वाला संदेश है.
अगर उल्लू दिख जाए तो क्या करें?
घबराने या डरने की बजाय कुछ साधारण और सकारात्मक कदम अपनाए जा सकते हैं. जैसे
-मन को शांत रखें और नकारात्मक सोच से बचें
-शनिवार को शनि देव के नाम से दीपक जलाएं
-काले तिल या सरसों के तेल का दान करें
-किसी जरूरतमंद, बुजुर्ग या गरीब की मदद करें
-अपने काम पूरे मन और ईमानदारी से करें
ये उपाय किसी डर को टालने के लिए नहीं, बल्कि मानसिक संतुलन और सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने के लिए होते हैं.
लोकधारणाएं और सच्चाई
समस्या तब होती है जब अफवाहें और अधूरी बातें डर पैदा करने लगती हैं. शास्त्रों में कहीं भी यह नहीं कहा गया कि सिर्फ उल्लू दिखने से कुछ बुरा होगा. डर फैलाने वाली बातें अक्सर अज्ञान से जन्म लेती हैं. जरूरी है कि परंपरा और अंधविश्वास के बीच फर्क समझा जाए.
शनिवार को उल्लू दिखना अशुभ नहीं माना जाता. शास्त्रों में यह शनि देव से जुड़ा संकेत है, जो सावधानी, कर्मों की समीक्षा और धैर्य अपनाने की सीख देता है. डरने की बजाय इसे आत्मचिंतन का अवसर समझना चाहिए.