स्वतंत्रता आंदोलन का ऐतिहासिक केंद्र
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Firozabad News: फिरोजाबाद का तिलक भवन आज़ादी की लड़ाई का एक जीवंत प्रतीक है. यहां देश के बड़े स्वतंत्रता सेनानी गुप्त मीटिंग करते थे और क्रांतिकारियों में जोश भरते थे. महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और पंडित जवाहरलाल नेहरू जैसी महान हस्तियां भी यहां आकर आज़ादी की अलख जगाती थी. आज यह भवन बच्चों को शिक्षा देने का केंद्र है, लेकिन इसकी दीवारें आज भी स्वतंत्रता संग्राम की गाथाओं को याद दिलाती हैं.
फिरोजाबाद. स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान कई क्रांतिकारियों ने इस देश को आज़ादी दिलाने के लिए अपनी जान की कुर्बानी दी. इसी दौरान फिरोजाबाद में भी एक महत्वपूर्ण भवन में देश के कई बड़े क्रांतिकारी आए और यहां लोगों में आज़ादी की अलख जगाई. फिरोजाबाद के तिलक भवन में आज भी पुरानी यादें ताजा हो जाती हैं. यहां बड़े स्वतंत्रता सेनानी गुप्त मीटिंग करके क्रांतिकारियों में जोश भरते थे. यहीं पर एक पुराना पुस्तकालय भी है, जहां क्रांतिकारी बैठकर किताबें पढ़ते थे. आज भी यह तिलक भवन आज़ादी का प्रतीक बना हुआ है.
तिलक भवन में गुप्त मीटिंग होती थी, और यहां नेताजी सुभाष चंद्र बोस, महात्मा गांधी और पंडित जवाहरलाल नेहरू जैसे बड़े नेताओं ने आज़ादी के लिए लोगों में अलख जगाई. फिरोजाबाद के इतिहासकार प्रो. ए.बी. चौबे ने बताया कि जब देश में आज़ादी की लड़ाई चल रही थी, तब बड़े-बड़े स्वतंत्रता सेनानी अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आंदोलन कर रहे थे. इसी दौरान फिरोजाबाद में भी स्वतंत्रता सेनानियों की मीटिंग हुआ करती थी.
गली बोहरान में बने तिलक भवन में देश के बड़े स्वतंत्रता सेनानी आकर अंग्रेजों के खिलाफ गुप्त मीटिंग किया करते थे. इस भवन में स्वतंत्रता सेनानियों से मिलने के लिए कई बड़े क्रांतिकारी जैसे नेताजी सुभाष चंद्र बोस, पंडित जवाहरलाल नेहरू आदि आए. इस भवन में पंडित बाल गंगाधर तिलक की एक प्रतिमा भी स्थापित की गई है और यहां एक पुराना पुस्तकालय भी है. इतिहासकार ने बताया कि फिरोजाबाद में आज़ादी का अलख जगाने के लिए महात्मा गांधी भी आए थे, जिन्होंने रामलीला मैदान में आकर स्वतंत्रता सेनानियों के साथ सभा का आयोजन किया.
आजादी की लड़ाई की याद दिलाता है यह भवन, और अब यहां बच्चों को मिलती है शिक्षा
इतिहासकार ने बताया कि जब देश में आज़ादी की जंग छिड़ी हुई थी, तब फिरोजाबाद के स्वतंत्रता सेनानी इसी भवन में आकर गुप्त मीटिंग किया करते थे. वहीं, इस पुस्तकालय में रखी किताबों को पढ़ा जाता था और जब अंग्रेजी पुलिस द्वारा छापेमारी होती थी, तो इन्हें यहीं छुपा दिया जाता था. आज भी यह भवन आज़ादी की लड़ाई की याद दिलाता है और अब यहां छोटे बच्चों को शिक्षा दी जाती है. इतिहासकार ने कहा कि यह भवन सिर्फ एक भवन ही नहीं, बल्कि आज़ादी के मतवालों का प्रतीक चिन्ह भी है, जिन्होंने इस देश को आज़ादी दिलाने के लिए अपनी जान की बाज़ी लगा दी.
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