Kanpur Budget Reaction : एमएसएमई देश की रीढ़, फिर भी उपेक्षा…बजट को लेकर कानपुर के व्यापारी नाराज, जानिए क्या बोले
कानपुर: केंद्र सरकार द्वारा आज देश का आम बजट पेश किया गया. औद्योगिक शहर कानपुर में इस बजट को लेकर उद्यमियों की प्रतिक्रिया सामने आई है. लोकल 18 ने जब शहर के उद्योगपतियों से बातचीत की तो अधिकतर ने बजट को साधारण और उम्मीदों से कमजोर बताया. उनका कहना है कि इस बजट में एमएसएमई सेक्टर को वह महत्व नहीं दिया गया, जिसकी उससे अपेक्षा थी.
एमएसएमई देश की रीढ़, फिर भी उपेक्षा
उद्यमियों का कहना है कि एमएसएमई देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है. यही सेक्टर सबसे ज्यादा लोगों को रोजगार देता है और स्थानीय स्तर पर उद्योगों को मजबूती देता है. इसके बावजूद बजट में न तो छोटे उद्यमियों के लिए कोई खास राहत दी गई और न ही उनकी समस्याओं पर ध्यान दिया गया.
एक्सपोर्ट-इंपोर्ट पर ज्यादा फोकस
छोटे उद्यमियों को नहीं मिली राहत
उद्यमियों ने बताया कि एमएसएमई सेक्टर पहले से ही कई मुश्किलों से गुजर रहा है. महंगाई, कच्चे माल की बढ़ती कीमतें और बाजार में कड़ी प्रतिस्पर्धा छोटे उद्योगों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं. ऐसे में बजट से उन्हें टैक्स में राहत, सस्ता लोन और सरल नीतियों की उम्मीद थी, जो पूरी नहीं हुई. उद्योगपति संजय जैन ने कहा कि यह बजट आम उद्यमियों के लिए निराशा जनक है. एमएसएमई के लिए कोई ठोस घोषणा नहीं की गई. सरकार बार-बार एमएसएमई को देश की रीढ़ बताती है, लेकिन बजट में इसका असर नजर नहीं आता.
आईआईए के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील वैश्य ने कहा कि छोटे उद्योगों के लिए इस बजट में कुछ भी नया नहीं है. छोटे उद्यमी लगातार दबाव में हैं, लेकिन सरकार की ओर से उन्हें सहारा देने के लिए कोई मजबूत कदम नहीं उठाया गया.
लेदर इंडस्ट्री को आंशिक राहत
उद्योगपति नवीन खन्ना ने कहा कि लेदर इंडस्ट्री को इस बजट में थोड़ी राहत जरूर दी गई है, लेकिन बाकी उद्योगों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है. कानपुर जैसे औद्योगिक शहरों के लिए यह बजट खास नहीं कहा जा सकता.
भविष्य को लेकर चिंता
उद्यमियों ने आशंका जताई कि अगर इसी तरह सिर्फ बड़े उद्योगों को प्राथमिकता दी जाती रही, तो आने वाले समय में देश में केवल बड़ी-बड़ी कंपनियां ही रह जाएंगी. एमएसएमई सिर्फ एक ट्रेंड बनकर सीमित हो जाएंगे, जिसका सीधा असर रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा. कानपुर के उद्यमियों का मानना है कि यह बजट एमएसएमई सेक्टर के लिए नई उम्मीद नहीं जगा सका. सरकार को चाहिए कि वह छोटे और मध्यम उद्योगों की समस्याओं को गंभीरता से समझे और आने वाले समय में उनके लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाए.